दिल्ली में पीजी आवास के नए नियम: मंत्री आशीष सूद ने हाई-पावर्ड कमेटी की पहली बैठक की अध्यक्षता की
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार ने 15 सितंबर 2026 को राजधानी में छात्रों के पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास को विनियमित करने की दिशा में ठोस कदम उठाया। शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने दिल्ली सचिवालय में छात्र आवास एवं सुरक्षा पर गठित हाई-पावर्ड कमेटी की पहली बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें शहर के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी शामिल हुए। यह कमेटी दिल्ली में पीजी आवास से जुड़े नियमों की समीक्षा और उन्हें नए सिरे से तैयार करने के लिए बनाई गई है।
बैठक में कौन-कौन शामिल हुए
मंत्री आशीष सूद ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'दिल्ली सचिवालय में छात्रों के रहने की व्यवस्था और सुरक्षा पर बनी हाई-पावर्ड कमेटी की पहली बैठक की अध्यक्षता की।' उन्होंने बताया कि इस बैठक में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, पुलिस कमिश्नर, एनडीएमसी (NDMC) की चेयरपर्सन, एमसीडी (MCD) कमिश्नर और कमेटी के अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।
बैठक में क्या हुई चर्चा
सूत्रों के अनुसार, पहली बैठक में पीजी रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता, न्यूनतम सुविधाओं का मानक, किराया नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी की स्थापना, पुलिस वेरिफिकेशन और शिकायत निवारण तंत्र जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत विमर्श हुआ। मंत्री सूद ने अपने बयान में ज़ोर देकर कहा कि 'उच्च शिक्षा के लिए एक सुरक्षित और सहयोगी माहौल बनाने में छात्रों को प्राथमिकता देने का दृष्टिकोण' अपनाया जाएगा।
समस्या की जड़: क्यों ज़रूरी हैं नए नियम
नई दिल्ली देश का शैक्षिक केंद्र है — हर साल लाखों छात्र कोचिंग और उच्च शिक्षा के लिए यहाँ आते हैं और बड़ी संख्या में पीजी व किराए के कमरों में निवास करते हैं। लंबे समय से पीजी मालिकों द्वारा मनमाना किराया वसूलना, बुनियादी सुविधाओं की कमी और महिला छात्रों की सुरक्षा को लेकर शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय राजधानी में छात्र आवास की बढ़ती माँग और आपूर्ति के बीच गहरा असंतुलन बना हुआ है।
आम जनता और छात्रों पर असर
प्रस्तावित नियमों के लागू होने से पीजी संचालकों को अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा और न्यूनतम सुविधाओं का पालन करना होगा। इससे न केवल किराये की मनमानी पर अंकुश लगेगा, बल्कि शिकायत निवारण का एक स्पष्ट तंत्र भी स्थापित होगा। गौरतलब है कि इस कमेटी में पुलिस कमिश्नर की उपस्थिति यह संकेत देती है कि सुरक्षा पहलुओं को नियामक ढाँचे का अभिन्न हिस्सा बनाया जाएगा।
क्या होगा आगे
हाई-पावर्ड कमेटी अपनी समीक्षा पूरी कर नियमों का मसौदा तैयार करेगी, जिसे बाद में दिल्ली सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने की संभावना है। फिलहाल कमेटी की अगली बैठक और नियमों की समयसीमा की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। दिल्ली में पीजी आवास क्षेत्र में बड़े बदलाव की नींव इस पहली बैठक से रखी जा चुकी है।