15 सितंबर 2026
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दिल्ली में पीजी आवास के नए नियम: मंत्री आशीष सूद ने हाई-पावर्ड कमेटी की पहली बैठक की अध्यक्षता की

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दिल्ली में पीजी आवास के नए नियम: मंत्री आशीष सूद ने हाई-पावर्ड कमेटी की पहली बैठक की अध्यक्षता की

सारांश

दिल्ली सरकार ने पीजी आवास में मनमाने किराये और सुरक्षा की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों पर कार्रवाई शुरू की। शहरी विकास मंत्री आशीष सूद की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड कमेटी की पहली बैठक में पुलिस कमिश्नर से लेकर MCD कमिश्नर तक शामिल हुए — लाखों छात्रों के आवास भविष्य पर बड़े फैसले का रास्ता खुला।

मुख्य बातें

शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने 15 सितंबर 2026 को दिल्ली सचिवालय में छात्र आवास एवं सुरक्षा पर गठित हाई-पावर्ड कमेटी की पहली बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में मुख्य सचिव , पुलिस कमिश्नर , NDMC चेयरपर्सन और MCD कमिश्नर शामिल हुए।
बैठक में पीजी रजिस्ट्रेशन , किराया नियंत्रण , सीसीटीवी , पुलिस वेरिफिकेशन और शिकायत निवारण तंत्र पर चर्चा हुई।
कमेटी का उद्देश्य छात्रों के लिए सुरक्षित, सुलभ और व्यवस्थित पीजी आवास नीति तैयार करना है।
नियमों का मसौदा तैयार होने के बाद दिल्ली सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने की संभावना है।

दिल्ली सरकार ने 15 सितंबर 2026 को राजधानी में छात्रों के पेइंग गेस्ट (पीजी) आवास को विनियमित करने की दिशा में ठोस कदम उठाया। शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने दिल्ली सचिवालय में छात्र आवास एवं सुरक्षा पर गठित हाई-पावर्ड कमेटी की पहली बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें शहर के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी शामिल हुए। यह कमेटी दिल्ली में पीजी आवास से जुड़े नियमों की समीक्षा और उन्हें नए सिरे से तैयार करने के लिए बनाई गई है।

बैठक में कौन-कौन शामिल हुए

मंत्री आशीष सूद ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर बैठक की तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, 'दिल्ली सचिवालय में छात्रों के रहने की व्यवस्था और सुरक्षा पर बनी हाई-पावर्ड कमेटी की पहली बैठक की अध्यक्षता की।' उन्होंने बताया कि इस बैठक में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, पुलिस कमिश्नर, एनडीएमसी (NDMC) की चेयरपर्सन, एमसीडी (MCD) कमिश्नर और कमेटी के अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।

बैठक में क्या हुई चर्चा

सूत्रों के अनुसार, पहली बैठक में पीजी रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता, न्यूनतम सुविधाओं का मानक, किराया नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी की स्थापना, पुलिस वेरिफिकेशन और शिकायत निवारण तंत्र जैसे अहम मुद्दों पर विस्तृत विमर्श हुआ। मंत्री सूद ने अपने बयान में ज़ोर देकर कहा कि 'उच्च शिक्षा के लिए एक सुरक्षित और सहयोगी माहौल बनाने में छात्रों को प्राथमिकता देने का दृष्टिकोण' अपनाया जाएगा।

समस्या की जड़: क्यों ज़रूरी हैं नए नियम

नई दिल्ली देश का शैक्षिक केंद्र है — हर साल लाखों छात्र कोचिंग और उच्च शिक्षा के लिए यहाँ आते हैं और बड़ी संख्या में पीजी व किराए के कमरों में निवास करते हैं। लंबे समय से पीजी मालिकों द्वारा मनमाना किराया वसूलना, बुनियादी सुविधाओं की कमी और महिला छात्रों की सुरक्षा को लेकर शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय राजधानी में छात्र आवास की बढ़ती माँग और आपूर्ति के बीच गहरा असंतुलन बना हुआ है।

आम जनता और छात्रों पर असर

प्रस्तावित नियमों के लागू होने से पीजी संचालकों को अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा और न्यूनतम सुविधाओं का पालन करना होगा। इससे न केवल किराये की मनमानी पर अंकुश लगेगा, बल्कि शिकायत निवारण का एक स्पष्ट तंत्र भी स्थापित होगा। गौरतलब है कि इस कमेटी में पुलिस कमिश्नर की उपस्थिति यह संकेत देती है कि सुरक्षा पहलुओं को नियामक ढाँचे का अभिन्न हिस्सा बनाया जाएगा।

क्या होगा आगे

हाई-पावर्ड कमेटी अपनी समीक्षा पूरी कर नियमों का मसौदा तैयार करेगी, जिसे बाद में दिल्ली सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने की संभावना है। फिलहाल कमेटी की अगली बैठक और नियमों की समयसीमा की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। दिल्ली में पीजी आवास क्षेत्र में बड़े बदलाव की नींव इस पहली बैठक से रखी जा चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी — क्योंकि राजधानी में पीजी नियमन की माँग वर्षों से उठती रही है और हर बार घोषणाएँ कागज़ों तक सिमट गई हैं। कमेटी में पुलिस कमिश्नर की उपस्थिति सुरक्षा को केंद्र में रखने का संकेत है, लेकिन किराया नियंत्रण और पंजीकरण जैसे उपाय तभी कारगर होंगे जब उल्लंघन पर दंड का तंत्र भी स्पष्ट हो। यह भी देखने वाली बात है कि नए नियम लाखों छात्रों की पहुँच को बाधित किए बिना पीजी संचालकों की जवाबदेही कैसे सुनिश्चित करते हैं।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में पीजी आवास के नए नियम क्यों बनाए जा रहे हैं?
दिल्ली में लाखों छात्र पीजी में रहते हैं और लंबे समय से मनमाने किराये, सुविधाओं की कमी तथा सुरक्षा को लेकर शिकायतें आती रही हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए दिल्ली सरकार ने हाई-पावर्ड कमेटी का गठन किया है, जो पीजी आवास के नियमन का मसौदा तैयार करेगी।
हाई-पावर्ड कमेटी की पहली बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
सूत्रों के अनुसार, पहली बैठक में पीजी रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता, न्यूनतम सुविधाओं का मानक, किराया नियंत्रण, सीसीटीवी, पुलिस वेरिफिकेशन और शिकायत निवारण तंत्र जैसे अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
हाई-पावर्ड कमेटी में कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं?
कमेटी में दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, पुलिस कमिश्नर, NDMC चेयरपर्सन, MCD कमिश्नर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। इस कमेटी की अध्यक्षता शहरी विकास मंत्री आशीष सूद करते हैं।
नए पीजी नियम कब तक लागू होंगे?
अभी तक कमेटी की अगली बैठक या नियमों की अधिसूचना की कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की गई है। कमेटी पहले मसौदा तैयार करेगी, जिसके बाद दिल्ली सरकार उसे अधिसूचित करेगी।
इन नियमों से दिल्ली के छात्रों को क्या फायदा होगा?
नए नियमों के लागू होने पर पीजी संचालकों के लिए पंजीकरण और न्यूनतम सुविधाओं का पालन अनिवार्य होगा, जिससे मनमाने किराये पर रोक लगेगी और छात्रों के लिए स्पष्ट शिकायत निवारण तंत्र उपलब्ध होगा। महिला छात्रों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी और पुलिस वेरिफिकेशन जैसे उपाय भी इस ढाँचे का हिस्सा बनने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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