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दिल्ली हाई कोर्ट के CAG ऑडिट फैसले ने 'आप'-डिस्कॉम सांठगांठ को बेनकाब किया: विद्युत मंत्री आशीष सूद

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दिल्ली हाई कोर्ट के CAG ऑडिट फैसले ने 'आप'-डिस्कॉम सांठगांठ को बेनकाब किया: विद्युत मंत्री आशीष सूद

सारांश

दिल्ली हाई कोर्ट ने डिस्कॉम का CAG ऑडिट मंजूर किया — और विद्युत मंत्री आशीष सूद ने इसे AAP-डिस्कॉम सांठगांठ का 'पुख्ता सबूत' बताया। केजरीवाल सरकार पर आरोप है कि उसने जनता पर ₹38,000 करोड़ का बोझ डाला और जानबूझकर ऑडिट से बचती रही।

मुख्य बातें

दिल्ली हाई कोर्ट ने निजी डिस्कॉम का CAG ऑडिट कराने की अनुमति दी।
विद्युत मंत्री आशीष सूद ने पिछली AAP सरकार पर डिस्कॉम के साथ सांठगांठ का आरोप लगाया।
आरोप है कि पूर्ववर्ती सरकार ने 'रेगुलेटरी एसेट्स' के नाम पर दिल्ली की जनता पर ₹38,000 करोड़ का बोझ डाला।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2015 के फैसले में CAG ऑडिट पर कोई प्रतिबंध नहीं था।
सर्वोच्च न्यायालय ने ऑडिट प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार किया; उपराज्यपाल कार्यालय ने सुनवाई प्रक्रिया शुरू की।

दिल्ली के विद्युत मंत्री आशीष सूद ने सोमवार, 22 जून 2026 को पिछली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार ने निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के साथ मिलकर वित्तीय जवाबदेही से जानबूझकर पल्ला झाड़ा और दिल्ली के उपभोक्ताओं पर ₹38,000 करोड़ का अनुचित बोझ थोप दिया। यह बयान दिल्ली हाई कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के बाद आया है, जिसमें डिस्कॉम का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ऑडिट कराने की अनुमति दी गई है।

मुख्य घटनाक्रम

विद्युत मंत्री सूद ने स्पष्ट किया कि 2015 में पिछली सरकार ने एक विशेष न्यायिक फैसले की आड़ लेकर यह झूठा दावा किया था कि डिस्कॉम का CAG ऑडिट संभव नहीं है। उन्होंने कहा, 'हाई कोर्ट का यह स्पष्ट करना कि 2015 के फैसले में CAG ऑडिट पर कोई प्रतिबंध नहीं था — यह अपने आप में साबित करता है कि अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार पूरी तरह विफल रही।' उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान सरकार द्वारा CAG ऑडिट की अनुमति लेने की पहल के विरोध में डिस्कॉम का दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना ही इस सांठगांठ का पुख्ता प्रमाण है।

₹38,000 करोड़ के बोझ पर सवाल

सूद ने कहा कि बिजली कंपनियों के खातों में न तो कोई स्पष्ट घाटा दिखता है और न ही धन की कमी, फिर भी पिछली AAP सरकार ने 'रेगुलेटरी एसेट्स' (नियामक परिसंपत्तियों) के नाम पर दिल्ली की जनता पर ₹38,000 करोड़ का बोझ लाद दिया। उनके अनुसार, यह राशि बिना किसी ठोस औचित्य के उपभोक्ताओं पर थोपी गई, जो वित्तीय पारदर्शिता की घोर अनदेखी को दर्शाती है। गौरतलब है कि रेगुलेटरी एसेट्स वे राशियाँ होती हैं जो बिजली कंपनियाँ भविष्य में उपभोक्ताओं से वसूलने की अनुमति माँगती हैं।

सर्वोच्च न्यायालय और उपराज्यपाल कार्यालय की भूमिका

विद्युत मंत्री ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हुए बताया कि उपराज्यपाल कार्यालय द्वारा औपचारिक सुनवाई की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे CAG ऑडिट का मार्ग और भी सुगम हो गया है।

AAP का पक्ष और राजनीतिक प्रतिक्रिया

आलोचकों का कहना है कि विद्युत मंत्री के ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और वर्तमान सरकार पिछली सरकार की नीतियों को निशाना बनाकर अपनी उपलब्धियों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में बिजली दरों और आपूर्ति को लेकर आम उपभोक्ताओं में असंतोष बना हुआ है। AAP की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आगे क्या होगा

CAG ऑडिट की प्रक्रिया शुरू होने के बाद डिस्कॉम के खातों की गहन जाँच होने की उम्मीद है, जिसके परिणाम दिल्ली में बिजली दरों के निर्धारण और नियामक परिसंपत्तियों के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ऑडिट में अनियमितताएँ सामने आती हैं, तो उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना बन सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि CAG ऑडिट में क्या निकलता है — बयानबाज़ी से नहीं, आँकड़ों से तस्वीर साफ होगी। ₹38,000 करोड़ की रेगुलेटरी देनदारी दशकों की नियामक विफलता का नतीजा है, जिसमें कई सरकारों की भूमिका रही है — केवल AAP की नहीं। डिस्कॉम का हाई कोर्ट जाना निश्चित रूप से सवाल खड़े करता है, लेकिन सांठगांठ साबित करने के लिए ऑडिट रिपोर्ट का इंतज़ार ज़रूरी है। यदि ऑडिट में अनियमितताएँ सामने आती हैं, तो यह दिल्ली की बिजली नियामक व्यवस्था की सबसे बड़ी जाँच बन सकती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली हाई कोर्ट का डिस्कॉम CAG ऑडिट फैसला क्या है?
दिल्ली हाई कोर्ट ने निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा ऑडिट कराने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 2015 के किसी पूर्व फैसले में ऐसे ऑडिट पर कोई रोक नहीं थी।
आशीष सूद ने AAP पर क्या आरोप लगाए हैं?
विद्युत मंत्री आशीष सूद ने आरोप लगाया है कि पूर्ववर्ती AAP सरकार ने डिस्कॉम के साथ मिलकर CAG ऑडिट जानबूझकर रोका और 'रेगुलेटरी एसेट्स' के नाम पर दिल्ली की जनता पर ₹38,000 करोड़ का अनुचित बोझ डाला। उन्होंने डिस्कॉम के हाई कोर्ट जाने को इस सांठगांठ का प्रमाण बताया।
रेगुलेटरी एसेट्स क्या होती हैं और इनसे जनता पर क्या असर पड़ता है?
रेगुलेटरी एसेट्स वे राशियाँ होती हैं जो बिजली नियामक संस्था बिजली कंपनियों को भविष्य में उपभोक्ताओं से वसूलने की अनुमति देती है। इनका बोझ सीधे बिजली बिलों के रूप में आम उपभोक्ताओं पर पड़ता है, और दिल्ली में यह राशि ₹38,000 करोड़ बताई जा रही है।
सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में क्या भूमिका निभाई?
सर्वोच्च न्यायालय ने CAG ऑडिट प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे उपराज्यपाल कार्यालय की औपचारिक सुनवाई प्रक्रिया बिना किसी बाधा के जारी रह सकती है।
इस CAG ऑडिट से दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं को क्या फायदा हो सकता है?
यदि ऑडिट में डिस्कॉम के खातों में अनियमितताएँ सामने आती हैं, तो नियामक परिसंपत्तियों की समीक्षा हो सकती है और भविष्य में बिजली दरों में राहत मिलने की संभावना बन सकती है। हालाँकि, ऑडिट के नतीजे आने तक कोई ठोस निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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