दिल्ली हाई कोर्ट के CAG ऑडिट फैसले ने 'आप'-डिस्कॉम सांठगांठ को बेनकाब किया: विद्युत मंत्री आशीष सूद
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के विद्युत मंत्री आशीष सूद ने सोमवार, 22 जून 2026 को पिछली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार ने निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के साथ मिलकर वित्तीय जवाबदेही से जानबूझकर पल्ला झाड़ा और दिल्ली के उपभोक्ताओं पर ₹38,000 करोड़ का अनुचित बोझ थोप दिया। यह बयान दिल्ली हाई कोर्ट के उस ऐतिहासिक फैसले के बाद आया है, जिसमें डिस्कॉम का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ऑडिट कराने की अनुमति दी गई है।
मुख्य घटनाक्रम
विद्युत मंत्री सूद ने स्पष्ट किया कि 2015 में पिछली सरकार ने एक विशेष न्यायिक फैसले की आड़ लेकर यह झूठा दावा किया था कि डिस्कॉम का CAG ऑडिट संभव नहीं है। उन्होंने कहा, 'हाई कोर्ट का यह स्पष्ट करना कि 2015 के फैसले में CAG ऑडिट पर कोई प्रतिबंध नहीं था — यह अपने आप में साबित करता है कि अरविंद केजरीवाल और उनकी सरकार पूरी तरह विफल रही।' उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान सरकार द्वारा CAG ऑडिट की अनुमति लेने की पहल के विरोध में डिस्कॉम का दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना ही इस सांठगांठ का पुख्ता प्रमाण है।
₹38,000 करोड़ के बोझ पर सवाल
सूद ने कहा कि बिजली कंपनियों के खातों में न तो कोई स्पष्ट घाटा दिखता है और न ही धन की कमी, फिर भी पिछली AAP सरकार ने 'रेगुलेटरी एसेट्स' (नियामक परिसंपत्तियों) के नाम पर दिल्ली की जनता पर ₹38,000 करोड़ का बोझ लाद दिया। उनके अनुसार, यह राशि बिना किसी ठोस औचित्य के उपभोक्ताओं पर थोपी गई, जो वित्तीय पारदर्शिता की घोर अनदेखी को दर्शाती है। गौरतलब है कि रेगुलेटरी एसेट्स वे राशियाँ होती हैं जो बिजली कंपनियाँ भविष्य में उपभोक्ताओं से वसूलने की अनुमति माँगती हैं।
सर्वोच्च न्यायालय और उपराज्यपाल कार्यालय की भूमिका
विद्युत मंत्री ने उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हुए बताया कि उपराज्यपाल कार्यालय द्वारा औपचारिक सुनवाई की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिससे CAG ऑडिट का मार्ग और भी सुगम हो गया है।
AAP का पक्ष और राजनीतिक प्रतिक्रिया
आलोचकों का कहना है कि विद्युत मंत्री के ये आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और वर्तमान सरकार पिछली सरकार की नीतियों को निशाना बनाकर अपनी उपलब्धियों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में बिजली दरों और आपूर्ति को लेकर आम उपभोक्ताओं में असंतोष बना हुआ है। AAP की ओर से इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या होगा
CAG ऑडिट की प्रक्रिया शुरू होने के बाद डिस्कॉम के खातों की गहन जाँच होने की उम्मीद है, जिसके परिणाम दिल्ली में बिजली दरों के निर्धारण और नियामक परिसंपत्तियों के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ऑडिट में अनियमितताएँ सामने आती हैं, तो उपभोक्ताओं को राहत मिलने की संभावना बन सकती है।