3 जुलाई 2026
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दिल्ली डिस्कॉम सीएजी ऑडिट पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 15 जुलाई तक यथास्थिति का निर्देश

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दिल्ली डिस्कॉम सीएजी ऑडिट पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, 15 जुलाई तक यथास्थिति का निर्देश

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली की निजी बिजली कंपनियों के सीएजी ऑडिट पर फिलहाल रोक लगा दी है। असली सवाल यह नहीं कि ऑडिट हो या न हो — बल्कि यह है कि इसे कौन करे। इस कानूनी पेच का जवाब 15 जुलाई की सुनवाई तय करेगी, और इसका सीधा असर दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ सकता है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली डिस्कॉम के सीएजी ऑडिट पर अंतरिम रोक लगाई, अगली सुनवाई 15 जुलाई को।
न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने डीईआरसी की अपील पर यह आदेश दिया।
एपीटीईएल ने कहा था कि डीईआरसी कानूनन सीएजी को ऑडिट नहीं सौंप सकता; उसने स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करने का निर्देश दिया था।
मार्च 2026 में दिल्ली के उपराज्यपाल ने सीएजी ऑडिट के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।
सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को सीजेआई के समक्ष उचित पीठ गठन के लिए भेजा; विवाद अगस्त 2025 के फैसले की व्याख्या से जुड़ा।

सर्वोच्च न्यायालय ने 4 जुलाई 2025 को दिल्ली की निजी बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के प्रस्तावित सीएजी ऑडिट पर अंतरिम रोक लगा दी और 15 जुलाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। यह आदेश दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) की उन अपीलों पर सुनवाई के दौरान आया, जिनमें बिजली अपीलीय न्यायाधिकरण (एपीटीईएल) के निर्देशों को चुनौती दी गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय के अगस्त 2025 के एक पुराने फैसले से जुड़ा है, जिसमें 2011 से 2014 के बीच डीईआरसी द्वारा जारी टैरिफ आदेशों की समीक्षा की गई थी। उस फैसले में अदालत ने बिजली वितरण कंपनियों द्वारा संचित नियामकीय परिसंपत्तियों (रेगुलेटरी एसेट्स) पर चिंता व्यक्त करते हुए बिजली नियामक आयोगों को इनकी जाँच का निर्देश दिया था। हालांकि, उस फैसले में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि यह ऑडिट कौन संपन्न करेगा।

इसके बाद मार्च 2026 में दिल्ली के उपराज्यपाल ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) से ऑडिट कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इस निर्णय को एपीटीईएल में चुनौती दी गई, जहाँ न्यायाधिकरण ने कहा कि कानूनी प्रावधानों के तहत डीईआरसी सीएजी को ऑडिट का काम नहीं सौंप सकता और उसने डीईआरसी को एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करने का निर्देश दिया।

डीईआरसी की पुनर्विचार याचिकाएँ भी एपीटीईएल ने खारिज कर दीं, जिसके बाद आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश

न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए कहा कि यह विवाद एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न से जुड़ा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि फिलहाल न तो सीएजी ऑडिट की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा और न ही डीईआरसी किसी स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट की नियुक्ति करेगा।

गौरतलब है कि अदालत ने एपीटीईएल के उस विशेष आदेश पर भी रोक लगा दी, जिसमें डीईआरसी को स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था। अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित की गई है।

दोनों पक्षों के तर्क

डीईआरसी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि अगस्त 2025 के फैसले में जिस ऑडिट का उल्लेख था, वह नियामकीय परिसंपत्तियों से जुड़े मुद्दे के समाधान का अनिवार्य हिस्सा है। उनके अनुसार उपभोक्ताओं से किसी भी प्रकार की वसूली से पहले इस ऑडिट का पूरा होना आवश्यक है।

वहीं बिजली कंपनियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इस तर्क का विरोध किया। उनका कहना था कि वर्तमान विवाद केवल इस प्रश्न तक सीमित है कि ऑडिट कौन करेगा — ऑडिट और नियामकीय परिसंपत्तियों की वसूली दो पृथक मुद्दे हैं।

आगे क्या होगा

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस मामले में अगस्त 2025 के फैसले की व्याख्या आवश्यक है। इसके लिए अदालत ने मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) के समक्ष भेजने का निर्देश दिया, ताकि इसे उचित पीठ को सौंपा जा सके। यह कदम संकेत देता है कि इस विवाद का अंतिम निपटारा संभवतः एक बड़ी पीठ द्वारा किया जाएगा, जिसका असर दिल्ली के लाखों बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और ऑडिट की प्रक्रिया तय करेगी कि वह बोझ कितना बड़ा होगा। सीएजी बनाम स्वतंत्र लेखाकार की बहस में यह भी देखना होगा कि किसकी नियुक्ति किसके हित में काम करती है — नियामक के, कंपनियों के, या उपभोक्ताओं के। मुख्यधारा की कवरेज इस प्रक्रियागत विवाद को तकनीकी मानकर छोड़ देती है, जबकि असली दाँव दिल्ली के करोड़ों उपभोक्ताओं के बिजली बिल हैं।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली डिस्कॉम के सीएजी ऑडिट पर रोक क्यों लगाई?
सर्वोच्च न्यायालय ने यह रोक इसलिए लगाई क्योंकि मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न उठा है — क्या डीईआरसी कानूनन सीएजी को ऑडिट का काम सौंप सकता है। अदालत ने कहा कि इस प्रश्न पर विचार आवश्यक है और तब तक यथास्थिति बनाए रखी जाए।
यह विवाद किस पुराने फैसले से जुड़ा है?
यह विवाद सर्वोच्च न्यायालय के अगस्त 2025 के उस फैसले से जुड़ा है जिसमें 2011-2014 के डीईआरसी टैरिफ आदेशों की समीक्षा की गई थी। उस फैसले में बिजली कंपनियों की नियामकीय परिसंपत्तियों की जाँच का निर्देश दिया गया था, लेकिन ऑडिटर कौन होगा, यह स्पष्ट नहीं किया गया था।
एपीटीईएल ने क्या निर्देश दिया था और उसे क्यों चुनौती दी गई?
एपीटीईएल ने कहा था कि डीईआरसी कानूनी रूप से सीएजी को ऑडिट नहीं सौंप सकता और उसे एक स्वतंत्र चार्टर्ड अकाउंटेंट नियुक्त करना चाहिए। डीईआरसी ने इस आदेश और अपनी पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद सर्वोच्च न्यायालय में अपील की।
अगली सुनवाई कब होगी और आगे क्या होगा?
अगली सुनवाई 15 जुलाई को निर्धारित है। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष भेजा है ताकि उचित पीठ गठित की जा सके, जो अगस्त 2025 के फैसले की व्याख्या करेगी।
इस विवाद का दिल्ली के बिजली उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ सकता है?
नियामकीय परिसंपत्तियों का ऑडिट यह तय करेगा कि बिजली कंपनियों ने किन परिस्थितियों में ये परिसंपत्तियाँ जमा कीं और क्या उपभोक्ताओं से इनकी वसूली की जा सकती है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुसार उपभोक्ताओं से किसी भी वसूली से पहले ऑडिट पूरा होना आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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