दिल्ली डिस्कॉम्स का सीएजी ऑडिट: ऊर्जा मंत्री आशीष सूद बोले — ₹38,000 करोड़ के रेगुलेटरी एसेट्स की होगी जांच
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार ने 2 जुलाई 2026 को राजधानी की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम्स) के भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) से ऑडिट कराने का औपचारिक आदेश जारी किया। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने इस निर्णय को बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह आदेश दिल्ली के प्रत्येक बिजली उपभोक्ता और ईमानदार करदाता की जीत है।
मुख्य घटनाक्रम
ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने स्पष्ट किया कि बिजली क्षेत्र के निजीकरण के बाद से अनेक वित्तीय निर्णय, विशेष व्यवस्थाएं और लगातार बढ़ती देनदारियाँ सार्वजनिक जांच के दायरे से बाहर रहीं। उनके अनुसार, लगभग ₹38,000 करोड़ के रेगुलेटरी एसेट्स किस प्रकार और किसके लाभ के लिए बढ़ते रहे — जबकि इसका बोझ दिल्ली की जनता पर पड़ा — यह सीएजी ऑडिट में सामने आएगा।
सूद ने कहा कि यह ऑडिट केवल अतीत की जांच नहीं, बल्कि दिल्ली के बिजली क्षेत्र में व्यापक सुधारों की आधारशिला है। उनके अनुसार, सरकार ने यह पूरी प्रक्रिया कानून के अनुरूप और पूर्ण पारदर्शिता के साथ पूरी की है।
पूर्व सरकार पर आरोप
ऊर्जा मंत्री ने पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर आरोप लगाया कि उसने बिजली क्षेत्र की मौजूदा व्यवस्था की जांच करने के बजाय उसे संरक्षण दिया। उन्होंने कहा, 'जो कार्य वे दस वर्षों में नहीं कर सके, हमारी सरकार ने कुछ ही महीनों में उसकी शुरुआत कर दी है।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में सत्ता परिवर्तन के बाद बिजली क्षेत्र की नीतियों पर सियासी बहस तेज़ हो रही है।
जनता के धन की सुरक्षा पर जोर
सूद ने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली का कोई भी ईमानदार करदाता किसी के निजी हितों, विशेष कृपा या गलत निर्णयों की कीमत चुकाने के लिए मजबूर नहीं होगा। उन्होंने कहा, 'जनता के धन का प्रत्येक रुपया सुरक्षित रखना हमारी सरकार की जिम्मेदारी है।' सरकार ने सभी डिस्कॉम्स से ऑडिट प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग की अपेक्षा जताई है।
आगे क्या होगा
ऊर्जा मंत्री के अनुसार, सीएजी ऑडिट की वास्तविक सफलता उन सुधारात्मक कदमों, अधिक प्रभावी नियमन और मजबूत जवाबदेही तंत्र से तय होगी जो ऑडिट के बाद लागू किए जाएंगे। गौरतलब है कि डिस्कॉम्स के ऑडिट का यह आदेश दिल्ली के बिजली क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले महीनों में ऑडिट रिपोर्ट और उसके आधार पर उठाए जाने वाले कदम यह तय करेंगे कि यह घोषणा वास्तव में कितनी प्रभावशाली साबित होती है।