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दिल्ली में बिजली कटौती और दरें बढ़ीं: आतिशी का BJP सरकार पर तीखा हमला, CAG ऑडिट विवाद गहराया

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दिल्ली में बिजली कटौती और दरें बढ़ीं: आतिशी का BJP सरकार पर तीखा हमला, CAG ऑडिट विवाद गहराया

सारांश

दिल्ली में बिजली कटौती और बढ़ती दरों के बीच नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने BJP सरकार पर नाकामी का आरोप लगाया। पलटवार में उन्होंने याद दिलाया कि CAG ऑडिट का आदेश खुद AAP सरकार ने अक्टूबर 2024 में दिया था — जो मिलीभगत के BJP के दावे को सीधे चुनौती देता है।

मुख्य बातें

नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने 22 जून को BJP की दिल्ली सरकार पर बिजली देने में नाकाम होने का आरोप लगाया।
दिल्ली में बिजली कटौती और बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर जनता में नाराज़गी बढ़ रही है।
बिजली कंपनियों के पेंशन सरचार्ज CAG ऑडिट का आदेश AAP सरकार ने अक्टूबर 2024 में दिया था, जिसमें 20,000 से अधिक पेंशनरों के हित सुरक्षित रखना लक्ष्य था।
ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने AAP और बिजली कंपनियों के बीच संबंध का दावा किया; 2015 के अदालती फैसले का हवाला दिया।
दिल्ली उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय से डिस्कॉम के CAG ऑडिट का रास्ता साफ हुआ है।

दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने 22 जून को एक बयान जारी कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की दिल्ली सरकार पर सीधा हमला बोला और कहा कि मौजूदा सरकार राजधानी की जनता को निर्बाध बिजली देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। उन्होंने बिजली वितरण कंपनियों के सीएजी (CAG) ऑडिट और ऊर्जा मंत्री आशीष सूद के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए पलटवार किया।

मुख्य घटनाक्रम

आतिशी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में बिजली कटौती अब आम बात हो गई है और बिजली दरों में बढ़ोतरी से आम नागरिक परेशान हैं। उनका कहना था कि BJP सरकार अपनी इन्हीं विफलताओं को छिपाने के लिए आम आदमी पार्टी (AAP) पर निराधार आरोप लगा रही है।

आतिशी ने स्पष्ट किया कि बिजली वितरण कंपनियों के पेंशन सरचार्ज मामले में विशेष ऑडिट का आदेश स्वयं AAP सरकार ने अक्टूबर 2024 में दिया था। इस आदेश के तहत दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) को निर्देश दिया गया था कि CAG-स्वीकृत ऑडिटर्स के ज़रिए विशेष ऑडिट कराया जाए, जिससे दिल्ली विद्युत बोर्ड के 20,000 से अधिक पेंशनरों के हित सुरक्षित रह सकें।

आतिशी का तर्क

आतिशी ने सवाल उठाया कि यदि AAP और बिजली कंपनियों के बीच कोई मिलीभगत होती, तो AAP सरकार खुद ही CAG ऑडिट का आदेश क्यों देती। उनके अनुसार यह तथ्य ही BJP के आरोपों को खोखला साबित करता है।

सरकार की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, दिल्ली के ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने दावा किया कि सरकार का मानना है कि बिजली कंपनियों, AAP और अरविंद केजरीवाल के बीच संबंध रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2015 में जब डिस्कॉम के CAG ऑडिट को लेकर सवाल उठे थे, तब अदालत के एक फैसले के बाद केजरीवाल सरकार चुप हो गई थी।

सूद ने यह भी कहा कि सरकार ने तय किया है कि बिजली दरों का बोझ जनता पर नहीं पड़ने दिया जाएगा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। उनके अनुसार, बिजली कंपनियों के दिल्ली उच्च न्यायालय जाने और CAG ऑडिट के आदेश से यह साफ होता है कि गड़बड़ी की आशंका रही है और अब सच्चाई सामने आएगी।

आम जनता पर असर

राजधानी में बिजली कटौती और बढ़ती दरें आम दिल्लीवासियों के लिए सीधी चुनौती बन चुकी हैं। यह ऐसे समय में आया है जब गर्मी के मौसम में बिजली की माँग अपने चरम पर होती है। गौरतलब है कि दिल्ली में बिजली क्षेत्र वर्षों से राजनीतिक विवाद का केंद्र रहा है — AAP सरकार की मुफ्त बिजली नीति से लेकर अब CAG ऑडिट विवाद तक।

क्या होगा आगे

दिल्ली सरकार ने दावा किया है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय से बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट का मार्ग प्रशस्त हुआ है। सरकार का कहना है कि वह बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा दिल्लीवासियों को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। ऑडिट के नतीजे आने के बाद यह विवाद और नया मोड़ ले सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ असली पीड़ित — बिजली कटौती झेलने वाला आम दिल्लीवासी — चर्चा के केंद्र से बाहर है। आतिशी का यह तर्क कि AAP ने खुद अक्टूबर 2024 में CAG ऑडिट का आदेश दिया था, तथ्यात्मक रूप से महत्वपूर्ण है और BJP के 'मिलीभगत' के आख्यान पर सीधा सवाल खड़ा करता है। दूसरी ओर, ऊर्जा मंत्री सूद का 2015 के अदालती फैसले का संदर्भ यह दर्शाता है कि डिस्कॉम पारदर्शिता का मुद्दा नया नहीं, बल्कि एक दशक पुरानी अनसुलझी समस्या है। जब तक CAG ऑडिट के नतीजे सार्वजनिक नहीं होते और स्वतंत्र सत्यापन नहीं होता, तब तक दोनों पक्षों के दावे महज़ राजनीतिक बयानबाज़ी ही रहेंगे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में बिजली कंपनियों का CAG ऑडिट क्यों हो रहा है?
बिजली वितरण कंपनियों के पेंशन सरचार्ज मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दिल्ली विद्युत बोर्ड के 20,000 से अधिक पेंशनरों के हित सुरक्षित रखने के लिए यह ऑडिट कराया जा रहा है। आतिशी के अनुसार, इस ऑडिट का आदेश AAP सरकार ने अक्टूबर 2024 में दिया था।
आतिशी ने BJP सरकार पर क्या आरोप लगाए?
आतिशी ने आरोप लगाया कि BJP की दिल्ली सरकार राजधानी में निर्बाध बिजली देने में नाकाम है — शहर में बिजली कटौती आम हो गई है और दरें बढ़ी हैं। उनका कहना है कि BJP अपनी इन विफलताओं को छिपाने के लिए AAP पर बेबुनियाद आरोप लगा रही है।
ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने AAP पर क्या आरोप लगाए?
ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने दावा किया कि सरकार का मानना है कि बिजली कंपनियों, AAP और अरविंद केजरीवाल के बीच संबंध रहे हैं। उन्होंने 2015 के एक अदालती फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उस समय केजरीवाल सरकार CAG ऑडिट के सवाल पर चुप हो गई थी।
दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का क्या असर होगा?
दिल्ली उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय से बिजली कंपनियों के CAG ऑडिट का रास्ता साफ हुआ है। सरकार का कहना है कि इससे बिजली क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी और जनता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
दिल्ली में बिजली कटौती और दरें बढ़ने से आम जनता पर क्या असर पड़ रहा है?
बिजली कटौती और बढ़ती दरें दिल्लीवासियों के लिए, विशेष रूप से गर्मी के मौसम में, सीधी परेशानी का कारण बन रही हैं। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बिजली की माँग चरम पर है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से समाधान की राह और जटिल हो रही है।
राष्ट्र प्रेस
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