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दिल्ली बिजली बिल में PPAC वृद्धि पर मंत्री आशीष सूद बोले — उपभोक्ताओं पर नहीं डालेंगे अतिरिक्त बोझ

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दिल्ली बिजली बिल में PPAC वृद्धि पर मंत्री आशीष सूद बोले — उपभोक्ताओं पर नहीं डालेंगे अतिरिक्त बोझ

सारांश

पश्चिम एशिया संकट से ईंधन की कीमतें 31% उछलीं, लेकिन दिल्ली सरकार ने उपभोक्ताओं पर केवल 2.4% PPAC बढ़ोतरी का बोझ डाला। बिजली मंत्री आशीष सूद का स्पष्ट संदेश — आम जनता की जेब पर चोट नहीं पड़ने देंगे।

मुख्य बातें

दिल्ली के बिजली बिलों में पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (PPAC) में वृद्धि का कारण पश्चिम एशिया संकट से उपजी अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी है।
बिजली खरीद लागत लगभग 31 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन सरकार ने उपभोक्ताओं पर केवल 2.4 प्रतिशत PPAC समायोजन स्वीकृत किया।
पिछले दौर में भी 31% लागत वृद्धि के बावजूद केवल 14.5% PPAC ही मंजूर की गई थी।
बिजली मंत्री आशीष सूद ने 13 जून को कहा कि उपभोक्ताओं पर अनावश्यक वित्तीय बोझ नहीं डाला जाएगा।
PPAC देश के विद्यमान बिजली नियमों के तहत एक स्थापित तंत्र है, कोई नई व्यवस्था नहीं।

दिल्ली सरकार के बिजली मंत्री आशीष सूद ने शनिवार, 13 जून को स्पष्ट किया कि राजधानी के बिजली बिलों में पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (PPAC) में हुई हालिया वृद्धि का कारण पश्चिम एशिया संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों में आया उछाल है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार उपभोक्ताओं पर कोई अनावश्यक वित्तीय बोझ नहीं डालेगी।

PPAC क्या है और यह क्यों बढ़ा

मंत्री सूद ने बताया कि PPAC कोई नई व्यवस्था नहीं है — यह देश के विद्यमान बिजली नियमों के तहत एक स्थापित तंत्र है, जो बिजली कंपनियों को ईंधन लागत में बदलाव के अनुसार दरों में समायोजन की अनुमति देता है। बिजली उत्पादन में प्रयुक्त ईंधन की कीमतें सीधे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से जुड़ी होती हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में जारी संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के कारण ईंधन की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसका सीधा असर बिजली कंपनियों की खरीद लागत पर पड़ा।

सरकार ने कितना बोझ रोका

मंत्री आशीष सूद ने आँकड़े साझा करते हुए बताया कि विभिन्न क्षेत्रों में औसत बिजली खरीद लागत पिछले महीने लगभग 31 प्रतिशत तक बढ़ गई थी। हालाँकि, सरकार के हस्तक्षेप के कारण उस दौर में केवल 14.5 प्रतिशत का PPAC समायोजन ही स्वीकृत किया गया था।

इस बार भी 31 प्रतिशत की लागत वृद्धि के बावजूद सरकार ने केवल 2.4 प्रतिशत की PPAC बढ़ोतरी को मंजूरी दी है — यानी लागत और उपभोक्ता पर डाले गए बोझ के बीच का बड़ा अंतर सरकार ने स्वयं वहन किया है।

उपभोक्ताओं पर असर

बिजली मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य आम जनता पर बिजली दरों का न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करना है। सरकार इस मामले पर लगातार निगरानी बनाए हुए है और बिजली कंपनियों पर पड़ रहे अतिरिक्त वित्तीय दबाव को उपभोक्ताओं तक स्थानांतरित होने से रोकने के प्रयास जारी हैं।

आगे क्या होगा

वैश्विक ईंधन बाज़ार में अनिश्चितता बनी रहने के बीच दिल्ली सरकार ने संकेत दिया है कि वह भविष्य में भी PPAC समायोजन को न्यूनतम रखने की कोशिश करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बिजली की माँग गर्मियों के चरम पर है और ईंधन आपूर्ति का दबाव बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि लागत और उपभोक्ता शुल्क के बीच के इस अंतर की भरपाई कौन कर रहा है — करदाता, बिजली कंपनियाँ, या सरकारी सब्सिडी? PPAC तंत्र पारदर्शी तो है, पर इसकी गणना और अनुमोदन प्रक्रिया आम उपभोक्ता की समझ से परे रहती है। जब तक दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) की स्वतंत्र समीक्षा सार्वजनिक नहीं होती, तब तक '2.4% ही क्यों' — इस सवाल का जवाब अधूरा है। वैश्विक ईंधन अस्थिरता लंबी खिंच सकती है; एकमुश्त बयान से बेहतर होगा एक दीर्घकालिक नीतिगत ढाँचा।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली बिजली बिल में PPAC क्या होता है?
PPAC यानी पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट एक नियामक तंत्र है, जो बिजली कंपनियों को ईंधन की बदलती लागत के अनुसार बिजली दरों में समायोजन की अनुमति देता है। यह देश के विद्यमान बिजली नियमों के तहत स्थापित व्यवस्था है, कोई नई प्रणाली नहीं।
इस बार PPAC क्यों बढ़ाया गया?
पश्चिम एशिया में जारी संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण ईंधन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसका सीधा असर बिजली उत्पादन लागत पर पड़ा, जिसके चलते PPAC में समायोजन आवश्यक हो गया।
उपभोक्ताओं पर बिजली बिल कितना बढ़ेगा?
बिजली मंत्री आशीष सूद के अनुसार, हालाँकि बिजली खरीद लागत लगभग 31 प्रतिशत बढ़ी है, इस बार उपभोक्ताओं पर केवल 2.4 प्रतिशत का PPAC समायोजन ही लागू किया गया है। सरकार ने बाकी बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला है।
क्या भविष्य में बिजली दरें और बढ़ सकती हैं?
वैश्विक ईंधन बाज़ार में अनिश्चितता बनी रहने के कारण यह संभावना बनी रहती है। हालाँकि दिल्ली सरकार ने कहा है कि वह स्थिति पर लगातार निगरानी रखेगी और उपभोक्ताओं पर न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करने का प्रयास जारी रहेगा।
पिछली बार PPAC कितना बढ़ाया गया था?
पिछले दौर में भी बिजली खरीद लागत लगभग 31 प्रतिशत बढ़ी थी, लेकिन सरकार के हस्तक्षेप के बाद केवल 14.5 प्रतिशत का PPAC समायोजन ही स्वीकृत किया गया था। इस बार यह और कम — मात्र 2.4 प्रतिशत — रखा गया है।
राष्ट्र प्रेस
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