दिल्ली बिजली बिल में PPAC वृद्धि पर मंत्री आशीष सूद बोले — उपभोक्ताओं पर नहीं डालेंगे अतिरिक्त बोझ
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली सरकार के बिजली मंत्री आशीष सूद ने शनिवार, 13 जून को स्पष्ट किया कि राजधानी के बिजली बिलों में पावर परचेज एडजस्टमेंट कॉस्ट (PPAC) में हुई हालिया वृद्धि का कारण पश्चिम एशिया संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों में आया उछाल है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार उपभोक्ताओं पर कोई अनावश्यक वित्तीय बोझ नहीं डालेगी।
PPAC क्या है और यह क्यों बढ़ा
मंत्री सूद ने बताया कि PPAC कोई नई व्यवस्था नहीं है — यह देश के विद्यमान बिजली नियमों के तहत एक स्थापित तंत्र है, जो बिजली कंपनियों को ईंधन लागत में बदलाव के अनुसार दरों में समायोजन की अनुमति देता है। बिजली उत्पादन में प्रयुक्त ईंधन की कीमतें सीधे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से जुड़ी होती हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में जारी संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के कारण ईंधन की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई, जिसका सीधा असर बिजली कंपनियों की खरीद लागत पर पड़ा।
सरकार ने कितना बोझ रोका
मंत्री आशीष सूद ने आँकड़े साझा करते हुए बताया कि विभिन्न क्षेत्रों में औसत बिजली खरीद लागत पिछले महीने लगभग 31 प्रतिशत तक बढ़ गई थी। हालाँकि, सरकार के हस्तक्षेप के कारण उस दौर में केवल 14.5 प्रतिशत का PPAC समायोजन ही स्वीकृत किया गया था।
इस बार भी 31 प्रतिशत की लागत वृद्धि के बावजूद सरकार ने केवल 2.4 प्रतिशत की PPAC बढ़ोतरी को मंजूरी दी है — यानी लागत और उपभोक्ता पर डाले गए बोझ के बीच का बड़ा अंतर सरकार ने स्वयं वहन किया है।
उपभोक्ताओं पर असर
बिजली मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य आम जनता पर बिजली दरों का न्यूनतम प्रभाव सुनिश्चित करना है। सरकार इस मामले पर लगातार निगरानी बनाए हुए है और बिजली कंपनियों पर पड़ रहे अतिरिक्त वित्तीय दबाव को उपभोक्ताओं तक स्थानांतरित होने से रोकने के प्रयास जारी हैं।
आगे क्या होगा
वैश्विक ईंधन बाज़ार में अनिश्चितता बनी रहने के बीच दिल्ली सरकार ने संकेत दिया है कि वह भविष्य में भी PPAC समायोजन को न्यूनतम रखने की कोशिश करेगी। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में बिजली की माँग गर्मियों के चरम पर है और ईंधन आपूर्ति का दबाव बना हुआ है।