दिल्ली में DERC ने PPAC को मंजूरी दी, 500 यूनिट से अधिक खपत पर 7–18% सरचार्ज का बोझ
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने 13 जून 2026 को राजधानी की तीनों बिजली वितरण कंपनियों को अप्रैल 2026 के लिए पावर परचेज एडजस्टमेंट चार्ज (PPAC) वसूलने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के चलते 500 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वाले और सब्सिडी के दायरे से बाहर के उपभोक्ताओं को जून में मिलने वाले बिल में 7 से 18 प्रतिशत तक अतिरिक्त सरचार्ज चुकाना पड़ सकता है।
PPAC क्या है और क्यों लगाया गया
DERC के अनुसार, जब बिजली उत्पादन कंपनियों से बिजली खरीदने की लागत बढ़ती है, तो उस वृद्धि का एक हिस्सा उपभोक्ताओं तक पहुँचाने के लिए PPAC लगाया जाता है। कोयले और अन्य ईंधनों की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के कारण बिजली खरीद महंगी हुई है, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है।
गौरतलब है कि यह पहली बार है जब दिल्ली में PPAC की समीक्षा और वसूली मासिक आधार पर की जाएगी। इससे पहले यह प्रक्रिया प्रत्येक तीन महीने में होती थी — यह बदलाव वितरण कंपनियों को अधिक तेज़ी से लागत समायोजित करने की सुविधा देता है।
तीनों कंपनियों पर लागू दरें
DERC ने बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) को 17.94 प्रतिशत, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) को 17.43 प्रतिशत और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) को 16 प्रतिशत PPAC लगाने की अनुमति दी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि ये दरें बिजली कंपनियों की ओर से माँगी गई दरों की तुलना में कम हैं।
आम उपभोक्ताओं पर असर
दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी का लाभ लेने वाले अधिकांश परिवारों को इस बढ़ोतरी से सीधी राहत मिलेगी। 200 से 400 यूनिट तथा 500 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले सब्सिडी लाभार्थियों के बिलों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा, क्योंकि सब्सिडी बिल राशि के बजाय खपत की गई यूनिटों पर आधारित है।
हालाँकि 500 यूनिट से अधिक खपत करने वाले और सब्सिडी के दायरे से बाहर के उपभोक्ताओं को अप्रैल के बिल में 7 से 18 प्रतिशत तक अतिरिक्त सरचार्ज का सामना करना पड़ सकता है।
नया नियम 'एफ' और इसका प्रभाव
DERC ने इस आदेश के साथ नया 'नियम एफ' भी लागू किया है। इसके तहत यदि किसी महीने की कोई राशि समायोजित नहीं हो पाती है, तो उसे बाद के महीनों में धीरे-धीरे वसूला जा सकेगा। आयोग का कहना है कि इससे बिजली वितरण कंपनियों को उत्पादकों को समय पर भुगतान करने में मदद मिलेगी और ब्याज का अतिरिक्त बोझ कम होगा।
आगे क्या होगा
चूँकि PPAC अब मासिक आधार पर तय होगा, आने वाले महीनों में बिजली खरीद लागत के अनुसार दरें घट या बढ़ सकती हैं। उपभोक्ता संगठनों की नज़र इस बात पर रहेगी कि क्या मासिक समीक्षा से दरों में पारदर्शिता बढ़ती है या बिलों में अनिश्चितता।