28 जुलाई 2026
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दिल्ली में DERC ने PPAC को मंजूरी दी, 500 यूनिट से अधिक खपत पर 7–18% सरचार्ज का बोझ

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दिल्ली में DERC ने PPAC को मंजूरी दी, 500 यूनिट से अधिक खपत पर 7–18% सरचार्ज का बोझ

सारांश

दिल्ली में DERC ने मासिक PPAC वसूली की शुरुआत की — यह तीन महीने वाली पुरानी व्यवस्था से बड़ा बदलाव है। 500 यूनिट से अधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को जून बिल में 7–18% का अतिरिक्त सरचार्ज झेलना पड़ सकता है, जबकि सब्सिडी लाभार्थियों को राहत बरकरार है।

मुख्य बातें

DERC ने अप्रैल 2026 के लिए तीनों बिजली वितरण कंपनियों को PPAC वसूलने की मंजूरी दी।
BRPL को 17.94% , BYPL को 17.43% और TPDDL को 16% PPAC लगाने की अनुमति।
500 यूनिट से अधिक खपत और सब्सिडी से बाहर के उपभोक्ताओं पर 7 से 18% अतिरिक्त सरचार्ज।
200 से 500 यूनिट तक के सब्सिडी लाभार्थियों के बिल पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं।
PPAC की समीक्षा अब मासिक आधार पर होगी, पहले यह तिमाही थी।
नया 'नियम एफ' लागू — असमायोजित राशि अगले महीनों में वसूली जाएगी।

दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (DERC) ने 13 जून 2026 को राजधानी की तीनों बिजली वितरण कंपनियों को अप्रैल 2026 के लिए पावर परचेज एडजस्टमेंट चार्ज (PPAC) वसूलने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के चलते 500 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वाले और सब्सिडी के दायरे से बाहर के उपभोक्ताओं को जून में मिलने वाले बिल में 7 से 18 प्रतिशत तक अतिरिक्त सरचार्ज चुकाना पड़ सकता है।

PPAC क्या है और क्यों लगाया गया

DERC के अनुसार, जब बिजली उत्पादन कंपनियों से बिजली खरीदने की लागत बढ़ती है, तो उस वृद्धि का एक हिस्सा उपभोक्ताओं तक पहुँचाने के लिए PPAC लगाया जाता है। कोयले और अन्य ईंधनों की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के कारण बिजली खरीद महंगी हुई है, जिसके चलते यह कदम उठाया गया है।

गौरतलब है कि यह पहली बार है जब दिल्ली में PPAC की समीक्षा और वसूली मासिक आधार पर की जाएगी। इससे पहले यह प्रक्रिया प्रत्येक तीन महीने में होती थी — यह बदलाव वितरण कंपनियों को अधिक तेज़ी से लागत समायोजित करने की सुविधा देता है।

तीनों कंपनियों पर लागू दरें

DERC ने बीएसईएस राजधानी पावर लिमिटेड (BRPL) को 17.94 प्रतिशत, बीएसईएस यमुना पावर लिमिटेड (BYPL) को 17.43 प्रतिशत और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (TPDDL) को 16 प्रतिशत PPAC लगाने की अनुमति दी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि ये दरें बिजली कंपनियों की ओर से माँगी गई दरों की तुलना में कम हैं।

आम उपभोक्ताओं पर असर

दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी का लाभ लेने वाले अधिकांश परिवारों को इस बढ़ोतरी से सीधी राहत मिलेगी। 200 से 400 यूनिट तथा 500 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले सब्सिडी लाभार्थियों के बिलों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा, क्योंकि सब्सिडी बिल राशि के बजाय खपत की गई यूनिटों पर आधारित है।

हालाँकि 500 यूनिट से अधिक खपत करने वाले और सब्सिडी के दायरे से बाहर के उपभोक्ताओं को अप्रैल के बिल में 7 से 18 प्रतिशत तक अतिरिक्त सरचार्ज का सामना करना पड़ सकता है।

नया नियम 'एफ' और इसका प्रभाव

DERC ने इस आदेश के साथ नया 'नियम एफ' भी लागू किया है। इसके तहत यदि किसी महीने की कोई राशि समायोजित नहीं हो पाती है, तो उसे बाद के महीनों में धीरे-धीरे वसूला जा सकेगा। आयोग का कहना है कि इससे बिजली वितरण कंपनियों को उत्पादकों को समय पर भुगतान करने में मदद मिलेगी और ब्याज का अतिरिक्त बोझ कम होगा।

आगे क्या होगा

चूँकि PPAC अब मासिक आधार पर तय होगा, आने वाले महीनों में बिजली खरीद लागत के अनुसार दरें घट या बढ़ सकती हैं। उपभोक्ता संगठनों की नज़र इस बात पर रहेगी कि क्या मासिक समीक्षा से दरों में पारदर्शिता बढ़ती है या बिलों में अनिश्चितता।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि अब हर महीने दर बदल सकती है। दिल्ली की सब्सिडी संरचना मध्यम वर्ग के उन उपभोक्ताओं को असुरक्षित छोड़ती है जो 500 यूनिट की सीमा के ठीक ऊपर हैं — यह वर्ग न तो सब्सिडी पाता है, न ही बड़े उद्योगों की तरह दर-वार्ता की स्थिति में है। असली सवाल यह है कि क्या DERC ने कंपनियों की माँगी दरों में कटौती करते हुए भी उपभोक्ता हित की पर्याप्त रक्षा की है, या यह कटौती महज़ प्रतीकात्मक है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में PPAC क्या है और यह क्यों लगाया जाता है?
PPAC यानी पावर परचेज एडजस्टमेंट चार्ज एक सरचार्ज है जो तब लगाया जाता है जब बिजली उत्पादन कंपनियों से बिजली खरीदने की लागत बढ़ जाती है। DERC इस बढ़ी हुई लागत का एक हिस्सा उपभोक्ताओं तक पहुँचाने के लिए वितरण कंपनियों को PPAC वसूलने की अनुमति देता है।
500 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वालों के बिल में कितनी बढ़ोतरी होगी?
500 यूनिट से अधिक खपत करने वाले और सब्सिडी के दायरे से बाहर के उपभोक्ताओं को अप्रैल 2026 के बिल में 7 से 18 प्रतिशत तक अतिरिक्त सरचार्ज चुकाना पड़ सकता है। यह सरचार्ज जून में मिलने वाले बिल में दिखेगा।
क्या दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी पाने वाले उपभोक्ताओं पर भी असर पड़ेगा?
नहीं, 200 से 500 यूनिट तक बिजली खर्च करने वाले सब्सिडी लाभार्थियों के बिलों पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं आएगा। सब्सिडी बिल राशि पर नहीं, बल्कि खपत की गई यूनिटों पर आधारित है, इसलिए PPAC का असर इन उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा।
DERC ने PPAC की समीक्षा मासिक क्यों की?
DERC के अनुसार, मासिक समीक्षा से वितरण कंपनियाँ बिजली उत्पादकों को समय पर भुगतान कर सकेंगी और ब्याज का अतिरिक्त बोझ कम होगा। इससे पहले यह प्रक्रिया तिमाही आधार पर होती थी।
नया 'नियम एफ' क्या है?
DERC द्वारा लागू 'नियम एफ' के तहत यदि किसी महीने की PPAC राशि पूरी तरह समायोजित नहीं हो पाती, तो उसे बाद के महीनों में धीरे-धीरे वसूला जा सकेगा। इससे वितरण कंपनियों पर एकमुश्त वित्तीय दबाव कम होगा।
राष्ट्र प्रेस
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