29 जुलाई 2026
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: सचिन सिवाच, साक्षी, अंकुश और नरेंद्र सेमीफाइनल में, भारत के 4 और मेडल पक्के

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: सचिन सिवाच, साक्षी, अंकुश और नरेंद्र सेमीफाइनल में, भारत के 4 और मेडल पक्के

सारांश

ग्लासगो में बुधवार को भारतीय बॉक्सिंग का जलवा रहा — सचिन सिवाच, साक्षी, अंकुश और नरेंद्र, चारों ने क्वार्टरफाइनल जीते और सेमीफाइनल में जगह बनाई। गुरु पूर्णिमा पर दिवंगत कोच को समर्पित मेडल, दो अलग रंग के जूते और पहली घंटी पर घबराहट का गायब होना — यह दिन सिर्फ जीत का नहीं, जज्बे का भी था।

मुख्य बातें

सचिन सिवाच ने 60 किग्रा क्वार्टरफाइनल में बोत्सवाना के मोरेमी ट्रेजर को 5-0 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।
साक्षी ने 51 किग्रा वर्ग में नॉर्दन आयरलैंड की कैटलिन फ्रायर्स को 5-0 से हराया; यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स है।
अंकुश ने 80 किग्रा में सेशेल्स के जेड माइकोक को 5-0 से हराया; गुरु पूर्णिमा पर कोच की सलाह पर दो अलग रंग के जूते पहने।
नरेंद्र ने 90 किग्रा+ में समोआ के माइकल सेको को 3-2 स्प्लिट डिसीजन से हराया; वे सेमीफाइनल में पहुँचने वाले आठवें भारतीय मुक्केबाज बने।
नरेंद्र ने यह मेडल अपने दिवंगत कोच देवराज सर को समर्पित किया।
भारत के लिए कम से कम 4 ब्रॉन्ज मेडल बॉक्सिंग में पक्के; सेमीफाइनल में गोल्ड की दावेदारी जारी।

भारतीय मुक्केबाज सचिन सिवाच ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुषों के 60 किग्रा क्वार्टरफाइनल में बोत्सवाना के मोरेमी ट्रेजर को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया और देश के लिए कम से कम ब्रॉन्ज मेडल सुनिश्चित कर दिया। 29 जुलाई 2026 को ग्लासगो में खेले गए इन क्वार्टरफाइनल मुकाबलों में साक्षी, अंकुश और नरेंद्र ने भी जीत दर्ज कर भारत की पदक संख्या और बढ़ाई।

सचिन सिवाच: घबराहट से जीत तक

सिवाच ने मुकाबले के बाद बताया, 'मुकाबले से पहले मैं घबराया हुआ था, लेकिन पहली घंटी बजते ही सब बदल गया। एक बार मुकाबला शुरू होने के बाद, मेरा पूरा ध्यान अपनी बॉक्सिंग और गेम प्लान पर था।' स्कोरलाइन भले ही एकतरफा रही, लेकिन सिवाच ने प्रतिद्वंद्वी को हल्के में लेने से साफ इनकार किया। उनके अनुसार, 'यहाँ हर बॉक्सर उलटफेर करने में सक्षम है। मैंने अपने प्रतिद्वंद्वी का सम्मान किया, धैर्य बनाए रखा और अपनी रणनीति पर अमल किया।'

सचिन ने देश के युवाओं को संदेश देते हुए कहा, 'वे अपने माता-पिता का सम्मान करें और कड़ी मेहनत करें। अगर आप समर्पित रहते हैं और खुद पर विश्वास रखते हैं, तो एक दिन आप निश्चित रूप से सफलता हासिल करेंगे।'

साक्षी का पहला कॉमनवेल्थ मेडल पक्का

महिला मुक्केबाज साक्षी ने 51 किग्रा वर्ग के क्वार्टरफाइनल में नॉर्दन आयरलैंड की कैटलिन फ्रायर्स को 5-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई। यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स है। जीत के बाद साक्षी ने कहा, 'यह मेरा पहला कॉमनवेल्थ गेम्स है। मैं लॉन्ग रेंज का गेम खेलना चाहती थी, जिसमें कामयाब रही। मेरी कोशिश है कि इसे गोल्ड में बदलूं। मैं पूरे देश को यह जीत समर्पित करना चाहूंगी।'

अंकुश की 5-0 जीत और गुरु पूर्णिमा का अनोखा अंदाज़

80 किग्रा वर्ग में अंकुश ने सेशेल्स के जेड माइकोक को 5-0 से हराया। इस मुकाबले में वे दो अलग-अलग रंग के जूते पहनकर उतरे। उन्होंने बताया कि यह उनके कोच की सलाह थी, जिसे उन्होंने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पूरे मन से स्वीकार किया। अंकुश ने कहा, 'आज गुरु पूर्णिमा है, और मेरे लिए मेरे कोच की बात ही आखिरी होती है।' उन्होंने यह मेडल अपने माता-पिता, परिवार और कोच को समर्पित किया तथा गोल्ड का लक्ष्य जताया। बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के सहयोग की भी उन्होंने सराहना की।

नरेंद्र बने आठवें भारतीय सेमीफाइनलिस्ट

नरेंद्र कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में पहुँचने वाले आठवें भारतीय मुक्केबाज बने। उन्होंने पुरुषों के 90 किग्रा+ वर्ग के क्वार्टरफाइनल में समोआ के माइकल सेको को 3-2 के स्प्लिट डिसीजन से हराया। नरेंद्र ने अपना यह मेडल अपने दिवंगत कोच देवराज सर को समर्पित किया और कहा, 'आज गुरु पूर्णिमा के मौके पर मैं यह मेडल अपने कोच देवराज सर को समर्पित करता हूं, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। हमें मेहनत करते रहनी चाहिए, हार-जीत तो होती ही रहती है।'

भारत की पदक तालिका में उछाल

बुधवार के इन नतीजों ने भारत की बॉक्सिंग पदक संख्या में उल्लेखनीय इजाफा किया है। चारों मुक्केबाज अब सेमीफाइनल में हैं, जिसका अर्थ है कि भारत को कम से कम 4 ब्रॉन्ज मेडल मिलना तय है। गौरतलब है कि यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब गुरु पूर्णिमा के अवसर पर कई खिलाड़ियों ने अपने कोचों को पदक समर्पित किए — जो भारतीय खेल संस्कृति की गहरी भावना को दर्शाता है। सेमीफाइनल में इन मुक्केबाजों का प्रदर्शन यह तय करेगा कि इनमें से कितने गोल्ड या सिल्वर तक पहुँच पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे अक्सर मीडिया नज़रअंदाज़ करता है। नरेंद्र का दिवंगत कोच देवराज सर को मेडल समर्पित करना और अंकुश का गुरु पूर्णिमा पर कोच की बात मानकर अलग रंग के जूते पहनना — ये प्रतीक बताते हैं कि भारतीय बॉक्सिंग में गुरु-शिष्य परंपरा अभी भी प्रदर्शन की नींव है। सवाल यह है कि क्या बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया इस पीढ़ी के लिए संरचनात्मक समर्थन को उसी स्तर पर बनाए रख सकता है जब अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा और तेज़ होगी।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सचिन सिवाच ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में किसे और कैसे हराया?
सचिन सिवाच ने 29 जुलाई 2026 को ग्लासगो में पुरुषों के 60 किग्रा क्वार्टरफाइनल में बोत्सवाना के मोरेमी ट्रेजर को 5-0 के सर्वसम्मत फैसले से हराया। इस जीत से उन्होंने भारत के लिए कम से कम ब्रॉन्ज मेडल सुनिश्चित कर दिया।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के लिए कितने बॉक्सिंग मेडल पक्के हुए?
29 जुलाई 2026 को सचिन सिवाच, साक्षी, अंकुश और नरेंद्र — चारों के सेमीफाइनल में पहुँचने से भारत के लिए कम से कम 4 ब्रॉन्ज मेडल पक्के हो गए हैं। सेमीफाइनल के नतीजों के आधार पर गोल्ड या सिल्वर की संभावना भी बनी हुई है।
नरेंद्र कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में कैसे पहुँचे और उन्होंने मेडल किसे समर्पित किया?
नरेंद्र ने 90 किग्रा+ वर्ग के क्वार्टरफाइनल में समोआ के माइकल सेको को 3-2 के स्प्लिट डिसीजन से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई और वे इस टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुँचने वाले आठवें भारतीय मुक्केबाज बने। उन्होंने यह मेडल अपने दिवंगत कोच देवराज सर को समर्पित किया।
साक्षी ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में क्या उपलब्धि हासिल की?
साक्षी ने 51 किग्रा वर्ग के क्वार्टरफाइनल में नॉर्दन आयरलैंड की कैटलिन फ्रायर्स को 5-0 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स है और उन्होंने जीत को पूरे देश को समर्पित करते हुए गोल्ड का लक्ष्य जताया।
अंकुश ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में दो अलग रंग के जूते क्यों पहने?
अंकुश ने बताया कि उनके कोच ने उन्हें अलग-अलग रंग के जूते पहनने की सलाह दी थी, जिसे उन्होंने गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पूरे सम्मान के साथ माना। उन्होंने 80 किग्रा क्वार्टरफाइनल में सेशेल्स के जेड माइकोक को 5-0 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई।
राष्ट्र प्रेस
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