16 सितंबर 2026
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सचिन सिवाच ने CWG 2026 में 60 किग्रा बॉक्सिंग गोल्ड जीता, 3-2 स्प्लिट डिसीजन से नामीबिया को हराया

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सचिन सिवाच ने CWG 2026 में 60 किग्रा बॉक्सिंग गोल्ड जीता, 3-2 स्प्लिट डिसीजन से नामीबिया को हराया

सारांश

ग्लासगो में सचिन सिवाच ने 3-2 के रोमांचक स्प्लिट डिसीजन से नामीबिया के न्डेवेलो को हराकर 60 किग्रा बॉक्सिंग गोल्ड जीता। शनिवार को भारत ने बॉक्सिंग में एकदिन में छह गोल्ड समेत आठ पदक जीते और कुल 35 पदकों के साथ चौथे स्थान पर पहुँचा।

मुख्य बातें

सचिन सिवाच ने CWG 2026 के पुरुषों की 60 किग्रा बॉक्सिंग फाइनल में नामीबिया के ट्राईअगेन मोर्नी न्डेवेलो को 3-2 स्प्लिट डिसीजन से हराया।
2 अगस्त 2026 को ग्लासगो में भारत ने बॉक्सिंग में एक दिन में 8 पदक जीते — 6 गोल्ड और 2 सिल्वर ।
गोल्ड विजेता: सचिन सिवाच, अरुंधति, प्रिया, साक्षी, प्रीति, जैस्मिन ; सिल्वर: लवलीना और जादुमणी सिंह ।
भारत मेडल टैली में चौथे स्थान पर — कुल 35 पदक ( 11 गोल्ड , 16 सिल्वर , 8 ब्रॉन्ज )।
भारत के 10 मुक्केबाजों ने फाइनल के लिए क्वालीफाई किया है, और अधिक पदकों की संभावना बनी हुई है।

भारतीय मुक्केबाज सचिन सिवाच ने 2 अगस्त 2026 को कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के पुरुषों की 60 किग्रा बॉक्सिंग फाइनल में नामीबिया के ट्राईअगेन मोर्नी न्डेवेलो को 3-2 के करीबी स्प्लिट डिसीजन से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। ग्लासगो में खेले गए इस मुकाबले में तीन जजों ने सचिन के पक्ष में और दो ने न्डेवेलो के पक्ष में फैसला सुनाया, जो इस भिड़ंत की असाधारण प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाता है।

मुख्य मुकाबला: राउंड-दर-राउंड कड़ी टक्कर

बॉक्सिंग प्रतियोगिता के सबसे तीव्र फाइनलों में से एक में, सचिन ने रणनीतिक अनुशासन और मानसिक दृढ़ता का परिचय दिया। तीनों राउंड में मुकाबला बराबरी का रहा — नामीबियाई मुक्केबाज ने हर पंच का जवाब देने की कोशिश की, लेकिन सचिन ने आखिरी घंटी तक अपना संयम बनाए रखा। अंततः पाँच में से तीन जजों ने भारतीय मुक्केबाज को विजेता घोषित किया।

भारत की बॉक्सिंग में ऐतिहासिक सफलता

सचिन का यह गोल्ड शनिवार को बॉक्सिंग में भारत द्वारा जीते गए आठ पदकों में से एक है, जिनमें छह गोल्ड और दो सिल्वर शामिल हैं। अरुंधति, प्रिया, साक्षी, प्रीति और जैस्मिन ने भी गोल्ड मेडल जीते, जबकि लवलीना और जादुमणी सिंह ने सिल्वर पदक हासिल किए। गौरतलब है कि भारत के कुल 10 मुक्केबाजों ने फाइनल के लिए क्वालीफाई किया है, जिससे आने वाले दिनों में और पदकों की उम्मीद बनी हुई है।

मेडल टैली में भारत की स्थिति

बॉक्सिंग की इस शानदार सफलता के साथ-साथ पुरुषों के शॉट पुट F57 में 1-2 की फिनिश और जूडो में ब्रॉन्ज मेडल ने भारत को समग्र मेडल टैली में चौथे स्थान पर पहुँचा दिया है। भारत के अब तक कुल 35 पदक हो गए हैं — 11 गोल्ड, 16 सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज

आगे क्या

बॉक्सिंग प्रतियोगिता के अंतिम चरण में भारत के शेष मुक्केबाजों के फाइनल मुकाबले बाकी हैं। यदि प्रदर्शन इसी स्तर पर रहा, तो भारत की कुल पदक संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है। CWG 2026 में भारतीय मुक्केबाजी का यह प्रदर्शन देश के बॉक्सिंग भविष्य के लिए एक मजबूत संकेत है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय मुक्केबाजी की उस परिपक्वता का प्रमाण है जो दबाव में भी रणनीति को हावी रहने देती है। एक ही दिन में छह गोल्ड जीतना संयोग नहीं — यह व्यवस्थित तैयारी और गहरे बेंच स्ट्रेंथ का नतीजा है। हालाँकि, असली परीक्षा यह होगी कि ये खिलाड़ी कॉमनवेल्थ की सफलता को ओलंपिक चक्र में कैसे रूपांतरित करते हैं, जहाँ भारतीय बॉक्सिंग का इतिहास मिला-जुला रहा है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सचिन सिवाच ने CWG 2026 में किसे हराकर गोल्ड जीता?
सचिन सिवाच ने पुरुषों की 60 किग्रा बॉक्सिंग के फाइनल में नामीबिया के ट्राईअगेन मोर्नी न्डेवेलो को 3-2 के स्प्लिट डिसीजन से हराकर गोल्ड मेडल जीता। पाँच में से तीन जजों ने सचिन के पक्ष में फैसला सुनाया।
CWG 2026 बॉक्सिंग में भारत ने कितने पदक जीते?
2 अगस्त 2026 को एक ही दिन में भारत ने बॉक्सिंग में आठ पदक जीते — छह गोल्ड और दो सिल्वर। सचिन सिवाच, अरुंधति, प्रिया, साक्षी, प्रीति और जैस्मिन ने गोल्ड, जबकि लवलीना और जादुमणी सिंह ने सिल्वर मेडल जीते।
CWG 2026 मेडल टैली में भारत किस स्थान पर है?
भारत कुल 35 पदकों के साथ मेडल टैली में चौथे स्थान पर है। इनमें 11 गोल्ड, 16 सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज शामिल हैं।
CWG 2026 में भारत के कितने मुक्केबाजों ने फाइनल में जगह बनाई?
भारत के कुल 10 मुक्केबाजों ने CWG 2026 के फाइनल के लिए क्वालीफाई किया है, जिससे आने वाले दिनों में और पदक मिलने की उम्मीद है।
स्प्लिट डिसीजन क्या होता है और सचिन की जीत में यह क्यों अहम था?
स्प्लिट डिसीजन तब होता है जब पाँच में से सभी जज एकमत नहीं होते — कुछ एक मुक्केबाज के पक्ष में और कुछ दूसरे के पक्ष में होते हैं। सचिन के मामले में तीन जजों ने उन्हें और दो ने न्डेवेलो को विजेता माना, जो दर्शाता है कि यह मुकाबला कितना कड़ा था।
राष्ट्र प्रेस
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