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क्या साइना नेहवाल ने भारतीय बैडमिंटन को आगे बढ़ाया?

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क्या साइना नेहवाल ने भारतीय बैडमिंटन को आगे बढ़ाया?

सारांश

भारतीय बैडमिंटन की दिग्गज साइना नेहवाल ने खेल से संन्यास लेने का ऐलान किया। यह निर्णय उनके लिए और उनके प्रशंसकों के लिए एक बड़ा झटका है। युवराज सिंह ने उनके करियर की सराहना की और उन्हें शुभकामनाएँ दी। जानिए उनके करियर की उपलब्धियाँ और ये फैसला क्यों लिया गया।

मुख्य बातें

साइना नेहवाल का बैडमिंटन से संन्यास भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ा झटका है।
उन्होंने भारत को बैडमिंटन में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ दिलाई हैं।
युवराज सिंह जैसे सितारों ने उनके कार्यों की सराहना की है।
उनका करियर युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मंगलवार की सुबह भारतीय बैडमिंटन प्रेमियों के लिए एक निराशाजनक घटना साबित हुई। इसकी वजह भारतीय बैडमिंटन की एक प्रमुख खिलाड़ी साइना नेहवाल का खेल से संन्यास लेना रहा। यह फैसला उन खेलप्रेमियों के लिए एक चौंकाने वाला था, जो उनकी वापसी की उम्मीद लगाए बैठे थे।

साइना को उनके शानदार करियर के लिए बधाइयाँ मिल रही हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर युवराज सिंह ने भी उनकी सराहना की है।

युवराज सिंह ने एक्स पर लिखा, "बहुत अच्छा खेला, साइना। आपके शानदार करियर के लिए बधाई। आपने भारतीय बैडमिंटन को आगे बढ़ाया और एक पीढ़ी को प्रेरित किया। भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।"

साइना ने घुटने की पुरानी समस्या के कारण लगभग दो साल तक प्रतियोगी मैचों से दूरी बनाए रखने के बाद खेल से संन्यास का निर्णय लिया।

साइना ने कहा, "दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बनने के लिए आठ से नौ घंटे ट्रेनिंग करनी होती है। लेकिन अब, मेरे घुटने एक या दो घंटे में ही जवाब दे जाते थे। सूजन आ गई थी, जिसके कारण आगे बढ़ना कठिन हो गया। इसलिए मुझे लगा कि अब और जोर नहीं लगा सकती। मेरा कार्टिलेज पूरी तरह से खराब हो चुका है। आर्थराइटिस हो गया है और वापसी मुश्किल है।"

साइना नेहवाल भारतीय बैडमिंटन की विशाल हस्तियों में से एक रही हैं। वह ओलंपिक में देश को बैडमिंटन में पदक दिलाने वाली पहली खिलाड़ी हैं। 2012 में लंदन ओलंपिक में उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था।

हिसार की इस बैडमिंटन खिलाड़ी ने 2008 में जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप जीतकर और बीजिंग 2008 ओलंपिक्स में एकल क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर इतिहास रचा। 2009 में, उन्होंने इंडोनेशिया ओपन जीतकर बीडब्ल्यूएफ सुपर सीरीज टूर्नामेंट जीतने वाली पहली भारतीय बनकर एक और उपलब्धि हासिल की। 2010 में, उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स चैंपियन का खिताब जीता।

2015 में, उन्होंने एकल बैडमिंटन रैंकिंग में दुनिया की नंबर 1 बनकर एक ऐतिहासिक मुकाम प्राप्त किया। वह ऐसा करने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और प्रकाश पादुकोण के बाद शीर्ष पर पहुंचने वाली दूसरी भारतीय शटलर बनीं। उसी साल, वह बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड चैंपियनशिप के फाइनल में भी पहुंचीं, ऐसा करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी थीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि युवा खिलाड़ियों को प्रेरणा भी दी। हमें उनकी उपलब्धियों को मान्यता देते हुए उन्हें एक सशक्त भविष्य की शुभकामनाएँ देनी चाहिए।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साइना नेहवाल ने कब संन्यास लिया?
साइना ने 20 जनवरी को बैडमिंटन से संन्यास लेने की घोषणा की।
साइना नेहवाल के करियर की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
साइना ने लंदन 2012 ओलंपिक्स में कांस्य पदक, 2008 जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप और 2015 में विश्व रैंकिंग में नंबर 1 बनने जैसी उपलब्धियाँ हासिल की।
युवराज सिंह ने साइना के बारे में क्या कहा?
युवराज सिंह ने साइना की सराहना की और उन्हें उनके शानदार करियर के लिए बधाई दी।
राष्ट्र प्रेस
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