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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: पी.टी. उषा ने 8 स्वर्ण जीतने वाली भारतीय महिला एथलीटों को सराहा

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: पी.टी. उषा ने 8 स्वर्ण जीतने वाली भारतीय महिला एथलीटों को सराहा

सारांश

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के 13 स्वर्ण में से 8 महिलाओं के नाम — मीराबाई चानू से लेकर पाँच बॉक्सर तक। IOA अध्यक्ष पी.टी. उषा ने इसे 'नारी शक्ति की असली भावना' बताया। ग्लासगो में भारतीय महिलाएँ अब कभी-कभार की दावेदार नहीं, बल्कि निरंतर विजेता हैं।

मुख्य बातें

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के 13 स्वर्ण पदकों में से 8 महिला एथलीटों ने जीते।
उषा ने महिला एथलीटों की उपलब्धियों को 'नारी शक्ति की असली भावना' करार दिया।
मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग में स्वर्ण जीता; अस्मिता डे ने जूडो में भारत का पहला कॉमनवेल्थ स्वर्ण हासिल कर इतिहास रचा।
बॉक्सिंग में साक्षी चौधरी , प्रीति पवार , जैस्मीन लैम्बोरिया , प्रिया घनघस और अरुंधति चौधरी — पाँचों ने स्वर्ण पदक जीते।
पैरा एथलेटिक्स में शर्मिला धनखड़ ने महिला शॉट पुट में स्वर्ण पदक जीता।
यह प्रदर्शन जमीनी स्तर पर बढ़े निवेश और महिला खेलों में आई गहराई का परिणाम माना जा रहा है।

भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) की अध्यक्ष पी.टी. उषा ने 2 अगस्त 2026 को ग्लासगो में जारी कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला एथलीटों के असाधारण प्रदर्शन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। भारत के कुल 13 स्वर्ण पदकों में से 8 स्वर्ण महिला एथलीटों ने अपने नाम किए हैं, जो देश के खेल इतिहास में एक उल्लेखनीय मील का पत्थर है।

उषा का बयान: 'यही नारी शक्ति की असली भावना है'

IOA की आधिकारिक विज्ञप्ति में पी.टी. उषा ने कहा, 'भारत की महिलाओं को हमारे 13 में से 8 स्वर्ण पदक जीतते देखना मुझे बेहद गर्व से भर देता है। ये उपलब्धियाँ एथलीटों, उनके परिवारों, कोचों और सपोर्ट टीमों के वर्षों की अथक लगन का प्रतिफल हैं। हर पदक समर्पण और त्याग की एक अनूठी कहानी कहता है।' उन्होंने आगे कहा कि ये चैंपियन पूरे भारत में अनगिनत युवा लड़कियों को यह विश्वास दिला रही हैं कि वे भी भारत की जर्सी पहनकर वैश्विक मंचों पर सफलता का परचम लहरा सकती हैं।

मुख्य पदक विजेता: कौन-कौन सी एथलीट बनीं चैंपियन

ओलंपिक चैंपियन मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग में एक और कॉमनवेल्थ स्वर्ण जीतकर अंतरराष्ट्रीय खेलों में अपनी श्रेष्ठता को एक बार फिर साबित किया। पैरा एथलेटिक्स में शर्मिला धनखड़ ने महिलाओं की शॉट पुट स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि अस्मिता डे ने जूडो में भारत का पहला कॉमनवेल्थ गेम्स स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

बॉक्सिंग में भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया, जहाँ साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैस्मीन लैम्बोरिया, प्रिया घनघस और अरुंधति चौधरी — पाँचों ने पोडियम के शीर्ष पायदान पर जगह बनाई। यह उपलब्धि पिछले एक दशक में भारतीय महिला मुक्केबाज़ी में आई गहराई और विविधता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है।

भारतीय महिला खेलों में बदलाव की बड़ी तस्वीर

इन आठ चैंपियनों ने मिलकर ग्लासगो में भारत के अभियान की दिशा और दशा बदल दी है। यह ऐसे समय में आया है जब जमीनी स्तर पर खेल विकास में निवेश बढ़ा है, प्रशिक्षण सुविधाओं तक पहुँच बेहतर हुई है और महिला एथलीटों को मिलने वाली पहचान में उल्लेखनीय इज़ाफ़ा हुआ है। गौरतलब है कि भारतीय महिलाएँ अब केवल कभी-कभार पदक की दावेदार नहीं हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर निरंतर विजेता के रूप में उभरी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार महिला एथलीटों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए युवा लड़कियों को खेलों में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया है, जो महिला सशक्तिकरण पर व्यापक राष्ट्रीय फोकस का हिस्सा है।

प्रेरणा का स्रोत: अगली पीढ़ी पर असर

देश भर के घरों, स्कूलों और खेल अकादमियों में लाखों युवा लड़कियों ने मीराबाई चानू, शर्मिला धनखड़, अस्मिता डे, साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैस्मीन लैम्बोरिया, प्रिया घनघस और अरुंधति चौधरी को तिरंगे के साथ पोडियम पर गर्व से खड़े देखा है। पदकों से परे, इन एथलीटों ने अपने युवा साथियों को सलाह देकर और एक-दूसरे की जीत का जश्न मनाकर टीम इंडिया की एकता को नई परिभाषा दी है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिलाओं का यह प्रदर्शन आने वाले वर्षों में देश की खेल नीति और निवेश की दिशा को और मज़बूत करने का आधार बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भी उतना ही ज़रूरी है कि पदकों की यह चमक जमीनी स्तर पर खेल बुनियादी ढाँचे और कोचिंग तक समान पहुँच की माँग को और तेज़ करे। अस्मिता डे का जूडो में ऐतिहासिक स्वर्ण और पाँच बॉक्सरों की एकसाथ जीत यह संकेत देती है कि भारतीय महिला खेल अब किसी एक सितारे पर निर्भर नहीं है — गहराई आ चुकी है। असली परीक्षा यह होगी कि ग्लासगो की यह ऊर्जा 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक तक बनाए रखने के लिए नीति और निवेश दोनों स्तरों पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिलाओं ने कितने स्वर्ण पदक जीते?
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय महिला एथलीटों ने देश के कुल 13 स्वर्ण पदकों में से 8 स्वर्ण पदक जीते। यह भारत के किसी भी कॉमनवेल्थ अभियान में महिलाओं का अब तक का सबसे प्रभावशाली सामूहिक प्रदर्शन माना जा रहा है।
पी.टी. उषा ने भारतीय महिला एथलीटों के बारे में क्या कहा?
IOA अध्यक्ष पी.टी. उषा ने कहा कि यह उपलब्धि एथलीटों, उनके परिवारों, कोचों और सपोर्ट टीमों की वर्षों की लगन का नतीजा है। उन्होंने इसे 'नारी शक्ति की असली भावना' बताते हुए कहा कि ये चैंपियन पूरे भारत में युवा लड़कियों को वैश्विक मंचों पर सफल होने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कौन-सा इतिहास रचा?
अस्मिता डे कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की पहली एथलीट बन गई हैं। यह भारतीय जूडो के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत की किन महिला बॉक्सरों ने स्वर्ण पदक जीते?
ग्लासगो में साक्षी चौधरी, प्रीति पवार, जैस्मीन लैम्बोरिया, प्रिया घनघस और अरुंधति चौधरी — पाँचों ने अपनी-अपनी भार वर्ग स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीते। यह भारतीय महिला मुक्केबाज़ी के लिए एकसाथ सबसे बड़ी उपलब्धि है।
मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में क्या हासिल किया?
ओलंपिक चैंपियन मीराबाई चानू ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में वेटलिफ्टिंग में स्वर्ण पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय खेलों में अपनी निरंतर श्रेष्ठता को एक बार फिर प्रमाणित किया। इस जीत से वे भारत के शीर्ष एथलीटों में अपनी स्थिति और मज़बूत करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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