कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: पीटी उषा ने ग्लासगो में भारत के प्रदर्शन को बताया 'वर्ल्ड-क्लास', 2030 पर नज़र
सारांश
मुख्य बातें
इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) की अध्यक्ष पीटी उषा ने 30 जुलाई 2026 को ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि एथलेटिक्स से लेकर बॉक्सिंग और वेटलिफ्टिंग तक भारत का यह प्रदर्शन विश्व स्तरीय रहा है और यह कई खेलों में देश की बढ़ती ताकत को दर्शाता है।
मुख्य प्रदर्शन और पदक
उषा ने एथलेटिक्स में भारत की उपलब्धियों को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'खिलाड़ियों को मेडल जीतते हुए देखकर मुझे बहुत खुशी हो रही है, खासकर एथलेटिक्स में हमें मेडल मिल रहे हैं। यह लगभग वर्ल्ड-क्लास परफॉर्मेंस जैसा है।' लॉन्ग जंप, हाई जंप और 10,000 मीटर दौड़ में पदक मिले, जबकि पैरा 100 मीटर और पैरा शॉट पुट में क्रमशः गोल्ड और ब्रॉन्ज पदक भी भारत के खाते में आए।
बॉक्सिंग में आठ भारतीय मुक्केबाज़ सेमीफाइनल तक पहुँचे, जो अपने आप में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। वेटलिफ्टिंग टीम ने भी शानदार प्रदर्शन किया। उषा ने यह भी बताया कि तैराकी में भले ही पदक न मिला हो, लेकिन रिले टीम का पाँचवें या छठे स्थान पर रहना भी एक बड़ी कामयाबी है।
सफलता के पीछे का सपोर्ट सिस्टम
IOA अध्यक्ष ने इस बेहतर प्रदर्शन का श्रेय भारत सरकार और IOA की संयुक्त कोशिशों को दिया। उन्होंने कहा, 'अब बहुत बदलाव आए हैं। भारत सरकार खिलाड़ियों को बहुत अच्छे तरीके से सपोर्ट कर रही है — चाहे एक्सपोजर हो, विदेशी कोच, फिजियो या कोई और मदद, सरकार वह सब मुहैया करा रही है।'
उन्होंने दिनशॉ पारदीवाला की मेडिकल टीम का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि IOA ने इस पूरे अभियान को एथलीट-केंद्रित बनाया है। उनके शब्दों में, 'खिलाड़ी जो भी चाहते हैं, IOA और सरकार एक साथ मिलकर वह सब दे रहे हैं — एक टीम, एक टीम इंडिया।'
कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की तैयारी
उषा ने ग्लासगो की इस कामयाबी को अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए एक स्प्रिंगबोर्ड बताया। उन्होंने कहा, 'हमें न सिर्फ कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 का आयोजन करना है, बल्कि बहुत सारे मेडल भी जीतने चाहिए।' ग्लासगो में हाल ही में खुले अहमदाबाद कॉमनवेल्थ गेम्स एक्सपीरियंस सेंटर के बारे में उन्होंने कहा कि यह 2030 की भव्यता की महज एक झलक है।
गौरतलब है कि 2030 के खेल कॉमनवेल्थ गेम्स के 100 वर्ष पूरे होने का जश्न भी होंगे, जिसे उषा ने नई पीढ़ी के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बताया। ग्लासगो में भारतीय समुदाय के साथ मनाए गए पतंग महोत्सव को उन्होंने अहमदाबाद की सांस्कृतिक विरासत की पहचान बताया।
आगे की राह
उषा का संदेश स्पष्ट है — ग्लासगो में मिली सफलता को बनाए रखना होगा और 2030 में घरेलू मैदान पर और बेहतर प्रदर्शन करना होगा। उन्होंने कहा, 'हमें इसका फायदा उठाना चाहिए और सिर्फ हिस्सा ही नहीं लेना चाहिए, बल्कि अपने देश के लिए ज्यादा मेडल भी जीतने चाहिए।' भारतीय खेल जगत के लिए यह ग्लासगो अभियान एक नई शुरुआत की नींव बन सकता है।