27 जुलाई 2026
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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: पी.टी. उषा बोलीं — हर पदक में कोच का पसीना शामिल है

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कॉमनवेल्थ गेम्स 2026: पी.टी. उषा बोलीं — हर पदक में कोच का पसीना शामिल है

सारांश

ग्लासगो में भारत के पदक चमक रहे हैं, लेकिन IOA अध्यक्ष पी.टी. उषा ने याद दिलाया कि असली नायक वे कोच हैं जो सालों की मेहनत के बाद भी पोडियम से दूर रहते हैं। उनका यह बयान कोचिंग संस्कृति को राष्ट्रीय खेल नीति के केंद्र में लाने की माँग को नई ऊर्जा देता है।

मुख्य बातें

उषा ने 27 जुलाई 2026 को ग्लासगो से कोचों की भूमिका को सार्वजनिक रूप से सराहा।
उषा ने कहा कि भारत का हर पदक एक कोच की प्रतिबद्धता और त्याग को दर्शाता है।
मुख्य वेटलिफ्टिंग कोच विजय शर्मा को मीराबाई चानू की अंतरराष्ट्रीय सफलता का प्रमुख सूत्रधार बताया गया।
एथलेटिक्स कोच राधाकृष्णन नायर , तैराकी कोच निहार अमीन व संदीप सेजवाल , और पैरा कोच जितेंद्र पाल सिंह की विशेष भूमिका रेखांकित की गई।
IOA ने सभी खेलों में एथलीटों को पूरे गेम्स के दौरान अनुभवी कोचिंग सपोर्ट सुनिश्चित करने की पुष्टि की।

इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) की अध्यक्ष पी.टी. उषा ने 27 जुलाई 2026 को ग्लासगो से कॉमनवेल्थ गेम्स के दौरान कोचों की अनदेखी भूमिका को रेखांकित किया और कहा कि भारत का हर पदक दरअसल एक कोच की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय दल का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा है, और उषा ने इस सफलता का श्रेय पर्दे के पीछे अथक परिश्रम करने वाले कोचिंग स्टाफ को दिया।

उषा का संदेश: कोच बिना पोडियम पर आए जीताते हैं

IOA की एक आधिकारिक विज्ञप्ति में पी.टी. उषा ने कहा, 'एक एथलीट के तौर पर, मेरा हमेशा से मानना रहा है कि हर शानदार प्रदर्शन के पीछे एक बेहतरीन कोच होता है। कोच सालों तक प्रतिभा को निखारने, आत्मविश्वास बनाने और एथलीटों को उनके सबसे बड़े पलों के लिए तैयार करने में बिताते हैं। हो सकता है कि वे पोडियम पर न खड़े हों, लेकिन भारत का जीता हर पदक एक कोच की प्रतिबद्धता और त्याग को दिखाता है। इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन उनके योगदान को बहुत महत्व देता है। हम अपने एथलीटों को मज़बूत कोचिंग सपोर्ट देने पर फोकस कर रहे हैं।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत ग्लासगो में एक के बाद एक पदक जीत रहा है और देशभर में एथलीटों की चर्चा है — लेकिन उनके कोचों के नाम अक्सर सुर्खियों से बाहर रह जाते हैं।

वेटलिफ्टिंग: विजय शर्मा की अगुवाई में भारत का पावरहाउस

ग्लासगो में भारत की वेटलिफ्टिंग सफलता ने एक बार फिर कोच-एथलीट साझेदारी की अहमियत उजागर की। मुख्य कोच विजय शर्मा, जो ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू को लगातार अंतरराष्ट्रीय सफलता दिलाने में मार्गदर्शक रहे हैं, भारत को वेटलिफ्टिंग में एक विश्वसनीय ताकत के रूप में स्थापित करने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। उनके साथ सहायक कोच और सपोर्ट स्टाफ प्रतियोगिता के दौरान एथलीट को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार रखने के लिए अथक प्रयास करते हैं।

एथलेटिक्स से तैराकी तक: विशेषज्ञ कोचों का नेटवर्क

एथलेटिक्स के मुख्य कोच राधाकृष्णन नायर एक कुशल टीम का नेतृत्व करते हैं जो स्प्रिंट, मध्य और लंबी दूरी के इवेंट, जंप और थ्रो के विशेषज्ञों को सहयोग देती है। नीरज चोपड़ा और मुरली श्रीशंकर जैसे शीर्ष एथलीट अपने निजी कोच के साथ बेहतर तालमेल से लाभान्वित होते हैं।

तैराकी में कोच निहार अमीन और संदीप सेजवाल तकनीकी दक्षता को अपने एलीट प्रतिस्पर्धी अनुभव के साथ जोड़कर भारतीय तैराकों को अंतरराष्ट्रीय चुनौती के लिए सक्षम बनाते हैं। मुक्केबाज़ी कोच विपक्षी टीम का गहन अध्ययन करने, रणनीति परिष्कृत करने और राउंड के बीच निर्णायक सलाह देने में घंटों लगाते हैं — जहाँ कुछ शब्द किसी कड़े मुकाबले का रुख बदल सकते हैं।

पैरा एथलीटों पर भी कोचिंग का वही असर

गौरतलब है कि टीम इंडिया का अभियान पैरा पावरलिफ्टिंग में पदक के साथ शुरू हुआ, जो सुनियोजित तैयारी और मज़बूत कोच-एथलीट संबंधों की अहमियत को और पुख्ता करता है। कोच जितेंद्र पाल सिंह जैसे विशेषज्ञ पैरा एथलीटों को कॉमनवेल्थ मंच पर श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। IOA ने सुनिश्चित किया है कि सभी खेलों के एथलीटों को पूरे गेम्स के दौरान अनुभवी कोच और तकनीकी स्टाफ का पूर्ण सहयोग मिले।

जैसे-जैसे कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहे हैं, भारत की पदक तालिका में हर नई उपलब्धि के साथ उन गुमनाम कोचों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है, जिनकी मेहनत कैमरे की नज़र से अक्सर ओझल रहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या IOA कोचों की पहचान और पारिश्रमिक को नीतिगत प्राथमिकता देता है — या यह महज़ प्रशंसा तक सीमित है। भारत में शीर्ष कोचों की संख्या और उनके अनुबंध की शर्तें अक्सर अपारदर्शी रहती हैं। जब तक कोचिंग पारिस्थितिकी तंत्र में निवेश, प्रमाणन और करियर सुरक्षा को संस्थागत रूप नहीं दिया जाता, तब तक ऐसे बयान प्रेरणादायक तो होंगे, पर परिवर्तनकारी नहीं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पी.टी. उषा ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में कोचों के बारे में क्या कहा?
IOA अध्यक्ष पी.टी. उषा ने कहा कि भारत का हर पदक एक कोच की प्रतिबद्धता और त्याग को दर्शाता है। उन्होंने जोर दिया कि कोच पोडियम पर नहीं होते, लेकिन उनकी भूमिका एथलीट की सफलता में निर्णायक होती है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के वेटलिफ्टिंग कोच कौन हैं?
भारत के वेटलिफ्टिंग मुख्य कोच विजय शर्मा हैं, जो ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू को लगातार अंतरराष्ट्रीय सफलता दिलाने में मार्गदर्शक रहे हैं। वे भारत को वेटलिफ्टिंग में एक विश्वसनीय ताकत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
IOA ने ग्लासगो में कोचिंग सपोर्ट को लेकर क्या कदम उठाए हैं?
IOA ने सुनिश्चित किया है कि कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के दौरान सभी खेलों के एथलीटों को अनुभवी कोच और तकनीकी स्टाफ का पूर्ण सहयोग मिले। संस्था का फोकस एथलीटों को मज़बूत कोचिंग सपोर्ट देने पर है।
भारत के पैरा एथलीटों के कोच कौन हैं और उनकी भूमिका क्या है?
कोच जितेंद्र पाल सिंह पैरा एथलीटों को कॉमनवेल्थ मंच पर बेहतर प्रदर्शन के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। टीम इंडिया का अभियान पैरा पावरलिफ्टिंग में पदक के साथ शुरू हुआ, जो सुनियोजित कोचिंग की सफलता का प्रमाण है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत के एथलेटिक्स और तैराकी कोच कौन हैं?
एथलेटिक्स के मुख्य कोच राधाकृष्णन नायर हैं, जो स्प्रिंट से लेकर थ्रो तक के विशेषज्ञों की टीम का नेतृत्व करते हैं। तैराकी में कोच निहार अमीन और संदीप सेजवाल तकनीकी दक्षता को प्रतिस्पर्धी अनुभव के साथ जोड़कर भारतीय तैराकों को तैयार करते हैं।
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