15 अक्टूबर 2026
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पश्चिम बंगाल में निवेश का नया दौर: मंत्री दिलीप घोष बोले — 'हर दिन उद्योगों का उद्घाटन हो रहा है'

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पश्चिम बंगाल में निवेश का नया दौर: मंत्री दिलीप घोष बोले — 'हर दिन उद्योगों का उद्घाटन हो रहा है'

सारांश

पश्चिम बंगाल में सत्ता-परिवर्तन के बाद मंत्री दिलीप घोष का दावा — नई कंपनियाँ, ज़मीन आवंटन और रोज़ उद्घाटन। साथ ही 58,000 पूजा समितियों को सहायता और सनातनी परंपराओं की वापसी का संकेत — यह बंगाल की बदलती राजनीतिक-सांस्कृतिक तस्वीर है।

मुख्य बातें

मंत्री दिलीप घोष ने 15 अक्टूबर 2026 को खड़गपुर में कहा कि पश्चिम बंगाल में निवेश का नया माहौल बन रहा है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी लगभग हर दिन कहीं न कहीं उद्योगों और कारखानों का उद्घाटन कर रहे हैं।
इस वर्ष सरकार ने 58,000 पूजा समितियों को आर्थिक सहायता दी, पिछले साल यह संख्या 45,000 थी।
मंत्री अरूप कुमार दास ने पितृ पक्ष में दुर्गा पूजा उद्घाटन को सनातनी परंपराओं के विरुद्ध बताया और पूर्व CM ममता बनर्जी पर परोक्ष निशाना साधा।
घोष के अनुसार राज्य में नए उद्योगों से पैसा, कारोबार और रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे।

पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष ने 15 अक्टूबर 2026 को खड़गपुर में कहा कि राज्य में निवेश का माहौल तेज़ी से बदल रहा है — नई कंपनियाँ आ रही हैं, उद्योग लगाए जा रहे हैं और ज़मीन आवंटित की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में एक सकारात्मक औद्योगिक वातावरण बन रहा है।

निवेश और रोज़गार पर मंत्री का बयान

मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'नई कंपनियां आ रही हैं, उद्योग लगाए जा रहे हैं और जमीन आवंटित की जा रही है। मुख्यमंत्री लगभग हर दिन कहीं न कहीं उद्योगों और कारखानों का उद्घाटन कर रहे हैं। इसलिए, बंगाल में एक नया माहौल है।' उन्होंने आगे कहा कि इन गतिविधियों से राज्य में पूंजी प्रवाह बढ़ेगा, कारोबार को गति मिलेगी और युवाओं के लिए रोज़गार के अवसर खुलेंगे।

दुर्गा पूजा उत्सव पर घोष का उत्साह

दुर्गा पूजा के बारे में बात करते हुए मंत्री दिलीप घोष ने कहा, 'इस बार बंगाल में दुर्गा पूजा कुछ अलग तरह से मनाई जा रही है। गांवों से लेकर शहरों तक, हर जगह लोगों में भारी उत्साह है। सरकार ने महालया के दिन से ही पूजा पंडालों का उद्घाटन शुरू कर दिया और देवी दुर्गा का आह्वान भी शुरू हो गया है।' उन्होंने बताया कि इस वर्ष सरकार ने लगभग 58,000 पूजा समितियों को आर्थिक सहायता प्रदान की है, जबकि पिछली बार यह संख्या 45,000 थी — यानी एक साल में 13,000 अधिक समितियों को लाभ मिला।

मंत्री अरूप कुमार दास की सनातनी परंपराओं पर टिप्पणी

बंगाल में दुर्गा पूजा आयोजन के तरीके पर मंत्री अरूप कुमार दास ने कांथी में अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'सबसे पहली बात यह है कि देवी पक्ष शुरू होने से पहले हम देवी का आह्वान कैसे कर सकते हैं? हमने बार-बार कहा है कि पितृ पक्ष के दौरान दुर्गा पूजा का उद्घाटन करना, कम से कम हमारी नजर में, सनातनी परंपराओं के खिलाफ है।' उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर परोक्ष निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मनमर्जी के हिसाब से एक नई संस्कृति लाने की कोशिश की। दास ने कहा कि मौजूदा मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी सनातनी परंपराओं और शास्त्र-सम्मत रीति-रिवाजों में विश्वास रखते हैं।

राजनीतिक संदर्भ और पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्ता-परिवर्तन के बाद राज्य की औद्योगिक और सांस्कृतिक नीतियों पर बहस तेज़ हो गई है। गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लंबे शासन के बाद बनी नई सरकार निवेश आकर्षित करने और सांस्कृतिक परंपराओं को पुनर्स्थापित करने को अपनी प्राथमिकता बता रही है। दुर्गा पूजा समितियों को दी जाने वाली सरकारी सहायता में 28% की वृद्धि इस दिशा में एक ठोस कदम के रूप में देखी जा रही है।

आगे क्या होगा

मंत्री दिलीप घोष के बयानों के बाद औद्योगिक निवेश की वास्तविक प्रगति पर नज़र रहेगी — विशेष रूप से यह कि नए उद्योगों से राज्य में कितने रोज़गार का सृजन हो पाता है। साथ ही, दुर्गा पूजा के बाद राज्य सरकार की अगली औद्योगिक नीति-घोषणाएँ इस नई दिशा की परीक्षा होंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि उद्घाटन-संख्याएँ वास्तविक रोज़गार सृजन में कब तब्दील होती हैं — पश्चिम बंगाल की औद्योगिक हिस्सेदारी राष्ट्रीय औसत से पहले से ही पीछे है। दुर्गा पूजा सहायता में 28% की वृद्धि और सनातनी परंपराओं पर ज़ोर स्पष्ट रूप से नई सरकार की सांस्कृतिक-राजनीतिक पहचान गढ़ने की रणनीति का हिस्सा है, जो TMC के दौर से खुद को अलग दिखाने की कोशिश है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है, वह यह है कि 58,000 पूजा समितियों को सरकारी धन देना जहाँ एक ओर लोकप्रिय है, वहीं राज्य के वित्त और धर्मनिरपेक्षता की बहस को भी जन्म देता है।
RashtraPress
15 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मंत्री दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल में निवेश के बारे में क्या कहा?
मंत्री दिलीप घोष ने 15 अक्टूबर 2026 को खड़गपुर में कहा कि बंगाल में एक नया माहौल है — नई कंपनियाँ आ रही हैं, उद्योग लगाए जा रहे हैं और ज़मीन आवंटित की जा रही है। उनके अनुसार मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी लगभग हर दिन कहीं न कहीं उद्योगों और कारखानों का उद्घाटन कर रहे हैं।
पश्चिम बंगाल सरकार ने दुर्गा पूजा समितियों को कितनी सहायता दी?
इस वर्ष राज्य सरकार ने लगभग 58,000 पूजा समितियों को आर्थिक सहायता दी है, जबकि पिछले साल यह संख्या 45,000 थी। यानी एक साल में 13,000 अधिक समितियों को सरकारी मदद मिली।
मंत्री अरूप कुमार दास ने दुर्गा पूजा की परंपराओं पर क्या कहा?
मंत्री अरूप कुमार दास ने कांथी में कहा कि पितृ पक्ष के दौरान दुर्गा पूजा का उद्घाटन करना सनातनी परंपराओं के विरुद्ध है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर परोक्ष निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मनमर्जी से एक नई संस्कृति लाने की कोशिश की, जबकि मौजूदा CM सुवेंदु अधिकारी शास्त्र-सम्मत रीति-रिवाजों में विश्वास रखते हैं।
पश्चिम बंगाल में नए उद्योगों से रोज़गार पर क्या असर होगा?
मंत्री दिलीप घोष के अनुसार राज्य में नई कंपनियों और उद्योगों के आने से पूंजी प्रवाह बढ़ेगा, कारोबारी गतिविधियाँ तेज़ होंगी और लोगों के लिए रोज़गार के नए अवसर पैदा होंगे। हालाँकि, इन दावों की पुष्टि के लिए वास्तविक रोज़गार आँकड़ों का इंतज़ार रहेगा।
नई बंगाल सरकार पिछली ममता बनर्जी सरकार से सांस्कृतिक नीति में कैसे अलग है?
नई सरकार के मंत्रियों ने सनातनी परंपराओं और शास्त्र-सम्मत रीति-रिवाजों को प्राथमिकता देने की बात कही है। मंत्री अरूप कुमार दास ने स्पष्ट रूप से कहा कि पूर्व CM ममता बनर्जी ने पितृ पक्ष में पूजा उद्घाटन कर एक नई संस्कृति थोपने की कोशिश की, जिसे नई सरकार ने बदला है।
राष्ट्र प्रेस
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