15 सितंबर 2026
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पश्चिम बंगाल में बस किराया बढ़ोतरी: दुर्गा पूजा के बाद संशोधन के संकेत, मंत्री दिलीप घोष ने किया समर्थन

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पश्चिम बंगाल में बस किराया बढ़ोतरी: दुर्गा पूजा के बाद संशोधन के संकेत, मंत्री दिलीप घोष ने किया समर्थन

सारांश

पश्चिम बंगाल में 2018 के बाद पहली बार बस किराया बढ़ सकता है। पंचायत मंत्री दिलीप घोष के समर्थन और ट्रांसपोर्ट मंत्री अर्जुन सिंह के आश्वासन के बाद बस मालिकों को उम्मीद है कि दुर्गा पूजा के बाद सरकार ठोस कदम उठाएगी।

मुख्य बातें

पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने 15 सितंबर 2026 को बस किराया वृद्धि की माँग का समर्थन किया।
ट्रांसपोर्ट मंत्री अर्जुन सिंह ने सोमवार को बस मालिकों को दुर्गा पूजा के बाद कार्रवाई का आश्वासन दिया।
पश्चिम बंगाल में बस और मिनी बस किराये में आखिरी बार 2018 में बढ़ोतरी हुई थी।
जॉइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट्स के महासचिव तपन बनर्जी ने कहा कि मंत्री के आश्वासन पर भरोसा है।
बढ़ती ईंधन लागत, टोल शुल्क और रखरखाव खर्च के कारण बस संचालक आर्थिक दबाव में हैं।

पश्चिम बंगाल में यात्री बस किराये में बढ़ोतरी की दिशा में बड़ा कदम उठता दिख रहा है — राज्य के पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को बस मालिकों की किराया वृद्धि की माँग का खुलकर समर्थन किया। यह बयान ट्रांसपोर्ट विभाग द्वारा दुर्गा पूजा के बाद किराया संशोधन प्रक्रिया शुरू करने के संकेत दिए जाने के ठीक एक दिन बाद आया है।

मंत्री दिलीप घोष का बयान

न्यू टाउन के इको पार्क में सुबह की सैर के दौरान मीडिया से बात करते हुए मंत्री घोष ने कहा कि राजस्व बढ़ाने और यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए किराया वृद्धि आवश्यक है। उन्होंने कहा, 'हम लोगों की आमदनी नहीं बढ़ाएंगे, किराया नहीं बढ़ाएंगे, तो ऐसा नहीं हो सकता कि हम लोगों को गरीब बनाए रखें और सोचें कि हम उन पर कोई एहसान कर रहे हैं।'

घोष ने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में सरकारी संस्थानों को कमज़ोर करने का चलन रहा है और किसी भी सभ्य देश में यह स्वीकार्य नहीं है। उनके अनुसार यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ देने के लिए बस संचालकों की आय बढ़ाना ज़रूरी है।

यात्री बेहतर सेवा के लिए अधिक किराया देने को तैयार

मंत्री घोष ने एसी बसों और एसी ट्रेनों की अग्रिम बुकिंग का हवाला देते हुए कहा कि यात्री पहले ही बेहतर सुविधाओं के लिए अधिक भुगतान करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा, 'एसी बसों की बुकिंग और सीट बुकिंग पहले ही हो जाती है क्योंकि लोग बेहतर सुविधा के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने को तैयार हैं।' उनका तर्क था कि सुविधाओं के साथ-साथ किराया न बढ़ाने पर राजस्व का स्रोत सूख जाएगा।

ट्रांसपोर्ट मंत्री और बस मालिकों की बैठक

राज्य के ट्रांसपोर्ट मंत्री अर्जुन सिंह ने सोमवार को एक बैठक में प्राइवेट बस मालिकों की माँगें सुनीं और उन्हें आश्वस्त किया। बैठक में किराया वृद्धि के अलावा टोल शुल्क, पुलिस द्वारा कथित उत्पीड़न, वाहन ज़ब्ती और पुराने व्यावसायिक वाहनों से जुड़ी दीर्घकालिक आर्थिक समस्याओं पर भी चर्चा हुई।

जॉइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट्स के महासचिव तपन बनर्जी ने कहा, 'मंत्री ने हमें आश्वासन दिया है कि पूजा के बाद वे किराया बढ़ाने के मामले में कार्रवाई करेंगे। हमें मंत्री पर पूरा भरोसा है।'

2018 के बाद से नहीं बदला किराया

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में बसों और मिनी बसों के किराये में आखिरी बार बढ़ोतरी 2018 में हुई थी। तब से ईंधन की कीमतों और अन्य परिचालन खर्चों में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद किराये में कोई संशोधन नहीं किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में ईंधन लागत और वाहन रखरखाव के खर्च तेज़ी से बढ़े हैं, जिससे छोटे बस संचालकों पर आर्थिक दबाव काफी बढ़ गया है।

बस मालिकों का तर्क है कि बिना किराया वृद्धि के यात्री सेवाएँ आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं रह सकतीं। जॉइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट्स ने माँग की है कि दुर्गा पूजा के बाद सरकार ठोस कदम उठाए।

आगे क्या होगा

ट्रांसपोर्ट विभाग और बस मालिकों के बीच हुई बैठक के बाद अब सभी की नज़रें दुर्गा पूजा के बाद होने वाली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं। यदि किराया संशोधन होता है तो यह 2018 के बाद पहली बार होगा, जिसका सीधा असर लाखों रोज़ाना यात्रियों की जेब पर पड़ेगा। राज्य सरकार के सामने चुनौती है कि वह बस संचालकों की व्यावसायिक माँग और आम यात्रियों की वहनीयता के बीच संतुलन बनाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो असली सवाल यह है कि किराया वृद्धि की मात्रा क्या होगी और उसे किस तरह से लागू किया जाएगा — क्योंकि बड़ी छलाँग से आम यात्रियों पर एकमुश्त बोझ पड़ सकता है। गौरतलब है कि यह घोषणा दुर्गा पूजा से ठीक पहले आई है, जो संकेत देती है कि सरकार त्योहारी भीड़ के दौरान विवाद से बचना चाहती है और पूजा के बाद की राजनीतिक ज़मीन पर यह निर्णय लेगी।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल में बस किराया कब बढ़ेगा?
ट्रांसपोर्ट मंत्री अर्जुन सिंह ने बस मालिकों को आश्वासन दिया है कि दुर्गा पूजा के बाद किराया संशोधन पर कार्रवाई की जाएगी। हालाँकि कोई आधिकारिक तिथि अभी तय नहीं हुई है।
पश्चिम बंगाल में पिछली बार बस किराया कब बढ़ा था?
पश्चिम बंगाल में बसों और मिनी बसों के किराये में आखिरी बार 2018 में बढ़ोतरी हुई थी। तब से ईंधन की कीमतों और परिचालन खर्चों में भारी वृद्धि के बावजूद किराये में कोई बदलाव नहीं किया गया।
बस मालिक किराया बढ़ाने की माँग क्यों कर रहे हैं?
बस मालिकों का तर्क है कि बढ़ती ईंधन लागत, टोल शुल्क और रखरखाव खर्च के कारण मौजूदा किराये पर सेवाएँ आर्थिक रूप से टिकाऊ नहीं रहीं। 2018 के बाद से किराये में कोई संशोधन न होने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हुई है।
मंत्री दिलीप घोष ने किराया वृद्धि पर क्या कहा?
पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि राजस्व बढ़ाने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएँ देने के लिए किराया वृद्धि जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि एसी बसों और ट्रेनों की अग्रिम बुकिंग से साबित होता है कि यात्री बेहतर सेवा के लिए अधिक भुगतान करने को तैयार हैं।
जॉइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट्स ने क्या माँगें रखी हैं?
जॉइंट काउंसिल ऑफ बस सिंडिकेट्स ने किराया वृद्धि के अलावा टोल शुल्क में राहत, पुलिस उत्पीड़न बंद करने, वाहन ज़ब्ती की समस्या सुलझाने और पुराने व्यावसायिक वाहनों से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार के सामने माँगें रखी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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