एशियन गेम्स 2026: SAI तिरुवनंतपुरम में मलेशियाई एथलीट्स ने पूरा किया एक माह का हाई-परफॉर्मेंस कैंप
सारांश
मुख्य बातें
स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के LNIPE तिरुवनंतपुरम सेंटर में मलेशियाई एथलीट्स ने एशियन गेम्स 2026 की तैयारी के लिए एक माह का हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग कैंप पूरा किया, जो 10 सितंबर 2026 को संपन्न हुआ। जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स से पहले यह कैंप भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है, जो अब अंतरराष्ट्रीय एथलीट्स के लिए एक विश्वसनीय हाई-परफॉर्मेंस हब के रूप में उभर रहा है।
कैंप में कौन शामिल थे
इस ट्रेनिंग कैंप में मलेशिया के दो मिडिल और लॉन्ग-डिस्टेंस एथलीट — 800 मीटर के धावक वान मुहम्मद फजरी और 400 मीटर/800 मीटर के खिलाड़ी उमर उस्मान — ने हिस्सा लिया। दोनों ने मलेशिया एथलेटिक्स के हेड कोच मोहम्मद अजहरुद्दीन की निगरानी में तैयारी की।
गौरतलब है कि एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) ने जुलाई 2026 में SAI LNIPE से अनुरोध किया था कि मलेशियाई दल के आवास, भोजन और ट्रेनिंग का प्रबंध किया जाए, और इसका खर्च SAI पर न डाला जाए।
कोच अजहरुद्दीन का भारत से पुराना नाता
मलेशियाई एथलेटिक्स के हेड कोच मोहम्मद अजहरुद्दीन स्वयं भारत के पूर्व एथलीट और SAI बेंगलुरु से जुड़े रह चुके हैं। उन्होंने 2020 से 2025 तक भारतीय राष्ट्रीय टीम के साथ काम किया, इसके बाद मलेशियाई एथलेटिक्स से जुड़े।
उन्होंने कहा, 'मैं 2020 से 2025 तक भारतीय राष्ट्रीय टीम का हिस्सा था। फिर मैंने SAI बेंगलुरु से इस्तीफा दे दिया और मलेशियाई एथलेटिक्स से जुड़ गया। इसलिए मेरे लिए भारत में होना कोई हैरानी की बात नहीं है। मुझे पता है कि यहाँ की सुविधाएँ बहुत अच्छी हैं।'
भारत में ट्रेनिंग का मकसद
कोच अजहरुद्दीन के अनुसार, मलेशियाई एथलीट्स को भारत लाने का मुख्य उद्देश्य उन्हें एक प्रतिस्पर्धी और एशियाई परिवेश में ट्रेनिंग का अनुभव दिलाना था। उन्होंने स्पष्ट किया, 'पहली बात एक्सपोजर है, ताकि वे जान सकें कि भारतीय स्तर क्या है। दूसरी बात भारतीय एथलीट्स के साथ ट्रेनिंग करना है, जो उनके लिए अधिक फायदेमंद है।'
उन्होंने यह भी बताया कि एशियन गेम्स की तैयारी के लिए उन्होंने जानबूझकर यूरोपीय देशों को नहीं चुना। उनके शब्दों में, 'एशियन गेम्स हमारे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं। यूरोपीय माहौल में ट्रेनिंग करने से एशियाई प्रतिस्पर्धा के स्तर का अनुभव नहीं मिलता।'
भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका
तिरुवनंतपुरम कैंप अकेला उदाहरण नहीं है। नेपाल के मुक्केबाजों ने SAI गुवाहाटी कैंपस में ट्रेनिंग की, जबकि ईरान के कबड्डी खिलाड़ियों ने SAI सोनीपत कैंपस का उपयोग किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत खेल कूटनीति के क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।
मलेशियाई दल को भारत प्रवास के दौरान 22 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर — सिल्वर लेवल मीटिंग में भाग लेने का अवसर भी मिला, जिससे उन्हें असली मुकाबले का अनुभव प्राप्त हुआ।
आगे क्या
कोच अजहरुद्दीन का मानना है कि इस तरह के एक्सचेंज प्रोग्राम से भारत और मलेशिया, दोनों के एथलीट्स का प्रतिस्पर्धा स्तर ऊँचा होगा। आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 के करीब आते ही SAI सेंटर्स की माँग और बढ़ने की संभावना है, क्योंकि एशियाई देश अपनी अंतिम तैयारियाँ पूरी कर रहे हैं।