15 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

एशियन गेम्स 2026: SAI तिरुवनंतपुरम में मलेशियाई एथलीट्स ने पूरा किया एक माह का हाई-परफॉर्मेंस कैंप

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
एशियन गेम्स 2026: SAI तिरुवनंतपुरम में मलेशियाई एथलीट्स ने पूरा किया एक माह का हाई-परफॉर्मेंस कैंप

सारांश

एशियन गेम्स 2026 से पहले भारत के SAI सेंटर्स सिर्फ भारतीय एथलीट्स के लिए नहीं, बल्कि मलेशिया, ईरान और नेपाल जैसे देशों की तैयारी के लिए भी अहम बन गए हैं। तिरुवनंतपुरम में पूरा हुआ एक माह का यह कैंप भारत की खेल कूटनीति की बढ़ती ताकत की मिसाल है।

मुख्य बातें

SAI LNIPE तिरुवनंतपुरम सेंटर में मलेशिया के एथलीट्स ने 10 सितंबर 2026 तक एक माह का एशियन गेम्स 2026 तैयारी कैंप पूरा किया।
800 मीटर धावक वान मुहम्मद फजरी और 400/800 मीटर खिलाड़ी उमर उस्मान ने हेड कोच मोहम्मद अजहरुद्दीन की देखरेख में ट्रेनिंग की।
कोच अजहरुद्दीन 2020 से 2025 तक SAI बेंगलुरु से जुड़े भारत के पूर्व एथलीट हैं।
नेपाल के मुक्केबाजों ने SAI गुवाहाटी और ईरान के कबड्डी खिलाड़ियों ने SAI सोनीपत में तैयारी की।
मलेशियाई दल ने 22 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर में वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर — सिल्वर लेवल मीटिंग में भी हिस्सा लिया।

स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के LNIPE तिरुवनंतपुरम सेंटर में मलेशियाई एथलीट्स ने एशियन गेम्स 2026 की तैयारी के लिए एक माह का हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग कैंप पूरा किया, जो 10 सितंबर 2026 को संपन्न हुआ। जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स से पहले यह कैंप भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है, जो अब अंतरराष्ट्रीय एथलीट्स के लिए एक विश्वसनीय हाई-परफॉर्मेंस हब के रूप में उभर रहा है।

कैंप में कौन शामिल थे

इस ट्रेनिंग कैंप में मलेशिया के दो मिडिल और लॉन्ग-डिस्टेंस एथलीट — 800 मीटर के धावक वान मुहम्मद फजरी और 400 मीटर/800 मीटर के खिलाड़ी उमर उस्मान — ने हिस्सा लिया। दोनों ने मलेशिया एथलेटिक्स के हेड कोच मोहम्मद अजहरुद्दीन की निगरानी में तैयारी की।

गौरतलब है कि एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) ने जुलाई 2026 में SAI LNIPE से अनुरोध किया था कि मलेशियाई दल के आवास, भोजन और ट्रेनिंग का प्रबंध किया जाए, और इसका खर्च SAI पर न डाला जाए।

कोच अजहरुद्दीन का भारत से पुराना नाता

मलेशियाई एथलेटिक्स के हेड कोच मोहम्मद अजहरुद्दीन स्वयं भारत के पूर्व एथलीट और SAI बेंगलुरु से जुड़े रह चुके हैं। उन्होंने 2020 से 2025 तक भारतीय राष्ट्रीय टीम के साथ काम किया, इसके बाद मलेशियाई एथलेटिक्स से जुड़े।

उन्होंने कहा, 'मैं 2020 से 2025 तक भारतीय राष्ट्रीय टीम का हिस्सा था। फिर मैंने SAI बेंगलुरु से इस्तीफा दे दिया और मलेशियाई एथलेटिक्स से जुड़ गया। इसलिए मेरे लिए भारत में होना कोई हैरानी की बात नहीं है। मुझे पता है कि यहाँ की सुविधाएँ बहुत अच्छी हैं।'

भारत में ट्रेनिंग का मकसद

कोच अजहरुद्दीन के अनुसार, मलेशियाई एथलीट्स को भारत लाने का मुख्य उद्देश्य उन्हें एक प्रतिस्पर्धी और एशियाई परिवेश में ट्रेनिंग का अनुभव दिलाना था। उन्होंने स्पष्ट किया, 'पहली बात एक्सपोजर है, ताकि वे जान सकें कि भारतीय स्तर क्या है। दूसरी बात भारतीय एथलीट्स के साथ ट्रेनिंग करना है, जो उनके लिए अधिक फायदेमंद है।'

उन्होंने यह भी बताया कि एशियन गेम्स की तैयारी के लिए उन्होंने जानबूझकर यूरोपीय देशों को नहीं चुना। उनके शब्दों में, 'एशियन गेम्स हमारे लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता हैं। यूरोपीय माहौल में ट्रेनिंग करने से एशियाई प्रतिस्पर्धा के स्तर का अनुभव नहीं मिलता।'

भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भूमिका

तिरुवनंतपुरम कैंप अकेला उदाहरण नहीं है। नेपाल के मुक्केबाजों ने SAI गुवाहाटी कैंपस में ट्रेनिंग की, जबकि ईरान के कबड्डी खिलाड़ियों ने SAI सोनीपत कैंपस का उपयोग किया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत खेल कूटनीति के क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

मलेशियाई दल को भारत प्रवास के दौरान 22 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर — सिल्वर लेवल मीटिंग में भाग लेने का अवसर भी मिला, जिससे उन्हें असली मुकाबले का अनुभव प्राप्त हुआ।

आगे क्या

कोच अजहरुद्दीन का मानना है कि इस तरह के एक्सचेंज प्रोग्राम से भारत और मलेशिया, दोनों के एथलीट्स का प्रतिस्पर्धा स्तर ऊँचा होगा। आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 के करीब आते ही SAI सेंटर्स की माँग और बढ़ने की संभावना है, क्योंकि एशियाई देश अपनी अंतिम तैयारियाँ पूरी कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या इन सुविधाओं का पूरा लाभ पहले भारतीय एथलीट्स को मिल रहा है। मलेशिया, ईरान और नेपाल जैसे देशों की मदद करना खेल कूटनीति के लिहाज से समझ में आता है, परंतु यह तभी टिकाऊ होगा जब घरेलू एथलीट्स की जरूरतों के साथ कोई समझौता न हो। AFI का यह मॉडल — जिसमें खर्च मेहमान देश उठाता है — एक व्यावहारिक मिसाल है जिसे आगे और विस्तार दिया जा सकता है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SAI तिरुवनंतपुरम में मलेशिया का एशियन गेम्स कैंप कब और क्यों हुआ?
यह एक माह का हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग कैंप 10 सितंबर 2026 को संपन्न हुआ, जो जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 की तैयारी के लिए आयोजित किया गया था। मलेशियाई कोच ने भारत को इसलिए चुना क्योंकि वे चाहते थे कि उनके एथलीट एशियाई प्रतिस्पर्धा के स्तर से परिचित हों।
कैंप में कौन-से मलेशियाई एथलीट्स शामिल थे?
कैंप में 800 मीटर धावक वान मुहम्मद फजरी और 400 मीटर/800 मीटर के खिलाड़ी उमर उस्मान शामिल थे। दोनों ने हेड कोच मोहम्मद अजहरुद्दीन की देखरेख में ट्रेनिंग की।
क्या अन्य देशों ने भी SAI सुविधाओं का उपयोग किया है?
हाँ, नेपाल के मुक्केबाजों ने SAI गुवाहाटी कैंपस में और ईरान के कबड्डी खिलाड़ियों ने SAI सोनीपत कैंपस में एशियन गेम्स 2026 की तैयारी की। ये सभी पहलें SAI सेंटर्स की अंतरराष्ट्रीय पहुँच को दर्शाती हैं।
कोच अजहरुद्दीन का भारत से क्या संबंध है?
मोहम्मद अजहरुद्दीन भारत के पूर्व एथलीट हैं जो 2020 से 2025 तक SAI बेंगलुरु और भारतीय राष्ट्रीय टीम से जुड़े रहे। इसके बाद उन्होंने मलेशियाई एथलेटिक्स के हेड कोच का पद संभाला।
क्या मलेशियाई एथलीट्स ने भारत में कोई प्रतियोगिता में भी हिस्सा लिया?
हाँ, मलेशियाई दल ने 22 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड एथलेटिक्स कॉन्टिनेंटल टूर — सिल्वर लेवल मीटिंग में भाग लिया, जो उनके ट्रेनिंग कार्यक्रम का हिस्सा था।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 14 मिनट पहले
  2. 1 घंटा पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 8 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले