एशियन गेम्स 2026: नौकायन खिलाड़ी टेंडेनथोई देवी का मेडल का सपना, बहन को भरोसा — 'तुम जीत सकती हो'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौकायन खिलाड़ी टेंडेनथोई देवी हाओबिजाम ने एशियन गेम्स 2026 से पहले आत्मविश्वास से भरपूर बयान दिया है कि लंबे समय की साझा ट्रेनिंग और परिवार के अटूट समर्थन ने उन्हें आइची-नागोया में पदक के लिए पूरी तरह तैयार किया है। 23 वर्षीय इस खिलाड़ी की बहन को पूरा विश्वास है कि वह इस बार एशियाई खेलों में मेडल जीत सकती हैं।
पहली बार से अब तक का सफर
टेंडेनथोई देवी ने 2023 एशियन गेम्स में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदार्पण किया था। उस वक्त वह नए अनुभव से गुज़र रही थीं और सीनियर खिलाड़ियों से सीखने की कोशिश में थीं। उन्होंने कहा, 'मेरी पहली इंटरनेशनल प्रतियोगिता 2023 में एशियन गेम्स था। मेरा प्रदर्शन अच्छा था, लेकिन मैं बहुत कॉन्फिडेंट नहीं थी क्योंकि मैं उस समय जूनियर थी।'
हालांकि, पिछले तीन वर्षों में उनकी यात्रा में उल्लेखनीय बदलाव आया है। टीम के साथ लंबे समय तक अभ्यास और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुभव ने उनके आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा दिया है।
टीम तालमेल और विमेंस कॉक्सलेस फोर
टेंडेनथोई देवी, पूनम, अलीना एंटो और गुरबानी कौर के साथ मिलकर विमेंस कॉक्सलेस फोर स्पर्धा में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। इस चौकड़ी ने साथ मिलकर ऑस्ट्रेलिया और यूरोप में ट्रेनिंग कैंप में प्रशिक्षण लिया है और दो-तीन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया है।
टेंडेनथोई ने बताया, 'हम पिछले साल से साथ हैं, इसलिए हम एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जान पाए और साथ में आगे बढ़ने का मौका मिला। इससे हमें बहुत कॉन्फिडेंस मिला है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि विदेशी दौरों से उन्हें दबाव संभालने और एक क्रू के रूप में प्रदर्शन करने की कला सीखने का मौका मिला।
इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट की भूमिका
इंस्पायर इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट (IIS) में ट्रेनिंग ने उनके प्रदर्शन में व्यापक बदलाव लाया। उन्होंने कहा, 'आईआईएस आने के बाद बहुत सारे बदलाव आए हैं। पहले हम एक-दूसरे से मुकाबला करते थे, लेकिन यहां आने के बाद हमें ज़्यादा कॉन्फिडेंस महसूस होता है।' IIS के स्टाफ द्वारा खिलाड़ियों के पोषण (न्यूट्रिशन), शरीर विज्ञान (फिजियोलॉजी) और मनोविज्ञान (साइकोलॉजी) का विशेष ध्यान रखा जाता है।
गौरतलब है कि इस तरह का संस्थागत सहयोग भारतीय नौकायन के लिए अपेक्षाकृत नई पहल है, और एशियाई खेलों में बेहतर नतीजों की उम्मीद इसी प्रशिक्षण ढाँचे की बदौलत बन रही है।
कोच लक्ष्मी का प्रेरणादायक प्रभाव
टेंडेनथोई देवी ने बताया कि वह अपनी कोच लक्ष्मी को 2007-08 से जानती हैं। उन्होंने कहा, 'मैंने उनकी प्रैक्टिस देखी थी और देखा था कि उन्होंने राज्य को कितनी पहचान दिलाई। उन्होंने एशियन गेम्स में हिस्सा लिया था, और रोइंग शुरू करने से पहले ही मैं उनसे प्रेरित थी।' अब कोच के रूप में लक्ष्मी उन्हें आत्मविश्वास की कमी महसूस होने पर प्रेरित करती हैं।
परिवार का अटूट समर्थन
टेंडेनथोई देवी ने खुलकर बताया कि उनके माता-पिता और बहन ने उनके इस सफर में हमेशा साथ दिया। उन्होंने कहा, 'जब से मैंने नौकायन का खेल खेलना शुरू किया, तो मेरे माता-पिता ने मुझे बहुत सपोर्ट किया है। उन्होंने हमेशा कहा कि अगर मैं कड़ी मेहनत करूं और अनुशासन में रहूं तो मैं बहुत आगे जा सकती हूं।'
उन्होंने विशेष रूप से बहन का उल्लेख किया: 'मेरी बहन ने भी मेरा बहुत साथ दिया है। उन्हें लगता है कि मैं एशियन गेम्स में मेडल जीत सकती हूं।' यह पारिवारिक विश्वास ही उनके खेल जीवन की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।
शनिवार से आइची-नागोया में शुरू होने वाले एशियन गेम्स 2026 में टेंडेनथोई और उनकी टीम का प्रदर्शन यह तय करेगा कि वर्षों की मेहनत और परिवार का भरोसा किस हद तक सच साबित होता है।