सुरुचि सिंह फोगाट: भारतीय जर्सी पहनना गर्व की बात, एशियन गेम्स 2026 में 100% देने का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
शूटर सुरुचि इंदर सिंह फोगाट को एशियन गेम्स 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है। हरियाणा के झज्जर जिले के ससरोली गाँव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचने वाली 20 वर्षीया इस निशानेबाज़ का सफर संघर्ष, समर्पण और असाधारण मेहनत की कहानी है। आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स में वह मेडल की प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं।
संघर्ष से शुरू हुआ सफर
13 साल की उम्र में सुरुचि बिना किसी स्पॉन्सरशिप या पहचान के अपने पिता और भाइयों के साथ लोकल ट्रेन से भिवानी की गुरु द्रोणाचार्य शूटिंग एकेडमी जाती थीं। न कोई भारतीय जर्सी थी, न कोई बड़ा सपना — बस खेल के प्रति एक सहज लगाव। सुरुचि ने कहा, 'जब मैंने शूटिंग शुरू की थी, तो कोई मुझे नहीं जानता था। मैं बस एक आम 13 साल की लड़की थी, जिसके पास भारतीय जर्सी तक नहीं थी। आज, उस जर्सी को पहनना मेरे लिए सचमुच गर्व की बात है — यह दिखाता है कि मैंने कितना लंबा सफर तय किया है।'
शूटिंग उनके लिए कोई पूर्वनिर्धारित रास्ता नहीं था। वह लगभग संयोग से इस खेल तक पहुँचीं और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनका कहना है, 'अगर मैंने कोई टीम गेम चुना होता, तो शायद मैं यहाँ तक नहीं पहुँच पाती। शूटिंग ने मुझे अपने दम पर कुछ बनने का मौका दिया।'
शूटिंग की असली चुनौती
बाहर से यह खेल सरल दिखता है — एक निशानेबाज़ का स्थिर खड़े होकर लक्ष्य साधना। लेकिन सुरुचि के अनुसार, असली संघर्ष भीतर होता है। 'लोग शूटिंग देखते हैं और सोचते हैं, इसमें क्या मुश्किल है? लेकिन वे यह नहीं देख पाते कि आपके अंदर क्या चल रहा है। जब हर शॉट मायने रखता है, तब अपने विचारों, सांसों और भावनाओं पर काबू रखना ही असली चुनौती है।' यह मानसिक अनुशासन ही उन्हें प्रतिकूल परिस्थितियों में भी स्थिर रखता है।
हार या कमज़ोर प्रदर्शन के बाद वह निराश होकर नहीं बैठतीं। 'अगर मैं नहीं जीतती, तो मैं अपनी गलती ढूँढती हूँ — तकनीक में, तैयारी में। उससे सीखती हूँ और बेहतर होकर लौटती हूँ। इसी तरह मैं सुधार करती हूँ।'
एनआरएआई की भूमिका
नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एनआरएआई) के सपोर्ट सिस्टम को सुरुचि अपनी तरक्की का अहम हिस्सा मानती हैं। 'एनआरएआई ने मुझे सिर्फ मुकाबला करने के मौके से कहीं ज़्यादा कुछ दिया है। कोच और कैंप ने मेरे ट्रेनिंग करने, तैयारी करने और अपने खेल को समझने के तरीके को बदल दिया है।' उनके अनुसार, सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोच उन्हें बहुत करीब से जानते हैं — प्रतियोगिता में पहुँचने पर उन्हें खिलाड़ी को समझने में समय नहीं लगाना पड़ता।
शानदार प्रदर्शन का रिकॉर्ड
सुरुचि ने दोहा में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप फाइनल में जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर 2025 सीजन का समापन किया। 2026 में उन्होंने नई दिल्ली में एशियन राइफल/पिस्टल चैंपियनशिप में सम्राट राणा के साथ मिक्स्ड टीम सिल्वर मेडल जीता। इसके बाद म्यूनिख में आईएसएसएफ वर्ल्ड कप में महिलाओं के 10 मीटर एयर पिस्टल इवेंट में ईशा सिंह के साथ ऐतिहासिक 'वन-टू फिनिश' हासिल की — यानी पहला और दूसरा, दोनों स्थान भारत के नाम। इस प्रदर्शन ने उन्हें रोम में होने वाले वर्ल्ड कप फाइनल में भी जगह दिला दी।
एशियन गेम्स की तैयारी
एशियन गेम्स के करीब आते-आते सुरुचि जानबूझकर नतीजे पर नहीं, प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। 'मैं यह नहीं सोचना चाहती कि नतीजा क्या होगा। मैं बस हर शॉट के लिए लड़ना चाहती हूँ, अपना 100 प्रतिशत देना चाहती हूँ और रेंज से यह जानते हुए निकलना चाहती हूँ कि मैंने उस मेडल के लिए अपना सब कुछ दिया।' आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में उनका यह संकल्प भारतीय शूटिंग के लिए एक नई उम्मीद लेकर आता है।