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साहिल जाधव: 7 साल के संघर्ष से एशियन गेम्स 2026 तक, शेन वॉटसन की किताब ने बदली सोच

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साहिल जाधव: 7 साल के संघर्ष से एशियन गेम्स 2026 तक, शेन वॉटसन की किताब ने बदली सोच

सारांश

सात साल की निराशा, परिवार का बलिदान और एक क्रिकेटर की किताब — साहिल जाधव की आर्चरी यात्रा किसी फिल्म से कम नहीं। शंघाई में वर्ल्ड कप ब्रॉन्ज जीतने के बाद अब वे एशियन गेम्स 2026 में भारत का झंडा थामने को तैयार हैं।

मुख्य बातें

साहिल जाधव ने 19 साल की उम्र में तीरंदाज़ी शुरू की और पहले राष्ट्रीय पदक के लिए 7 साल इंतज़ार किया।
2024 में सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक ; 2025 वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में व्यक्तिगत स्वर्ण और टीम रजत पदक ।
2026 आर्चरी वर्ल्ड कप स्टेज 2 ( शंघाई ) में पुरुष व्यक्तिगत कंपाउंड में ब्रॉन्ज मेडल — करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि।
शेन वॉटसन की किताब 'द विनर्स माइंडसेट' से दबाव प्रबंधन और फोकस में सुधार आया।
एशियन गेम्स 2026 में जापान के आइची-नागोया में भारत की 12 सदस्यीय आर्चरी टीम का हिस्सा।
कोलकाता के साई नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में पिछले 3-4 वर्षों से प्रशिक्षण जारी।

भारतीय कंपाउंड आर्चर साहिल जाधव एशियन गेम्स 2026 में भारत की 12 सदस्यीय आर्चरी टीम का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं — और यह सफर आसान नहीं रहा। 19 साल की उम्र में तीरंदाज़ी की दुनिया में कदम रखने के बाद साहिल को अपने करियर का पहला राष्ट्रीय पदक हासिल करने के लिए पूरे सात साल का धैर्य रखना पड़ा। महाराष्ट्र के सातारा से आए इस युवा खिलाड़ी की कहानी साहस, परिवार के बलिदान और मानसिक दृढ़ता की मिसाल है।

सात साल का इंतज़ार, फिर सोने की चमक

साहिल ने बताया कि शुरुआती वर्षों में लगातार निराशा हाथ लगती रही। उन्होंने कहा, 'नेशनल लेवल पर अपना पहला मेडल जीतने में मुझे सात साल लग गए। यह सब्र और हिम्मत की परीक्षा थी क्योंकि हर साल मैं बहुत कम अंतर से चूक जाता था।' इस कठिन दौर में उनके परिवार ने अटूट समर्थन दिया। साहिल के शब्दों में, 'असल में, मेरे परिवार ने मुझसे ज़्यादा त्याग किए हैं।'

वर्षों की मेहनत 2024 में रंग लाई जब साहिल ने सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में अपने करियर का पहला पदक — और वह भी स्वर्ण पदक — जीता। इसके बाद 2025 में वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में चैंपियनशिप हासिल की और टीम इवेंट में रजत पदक भी जीता।

शंघाई में करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि

2026 की शुरुआत में चीन के शंघाई में आयोजित आर्चरी वर्ल्ड कप स्टेज 2 में साहिल ने पुरुषों के व्यक्तिगत कंपाउंड इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का सबसे बड़ा मुकाम हासिल किया। पोडियम पर खड़े होने के उस पल को याद करते हुए साहिल ने कहा, 'मुझे अपने माता-पिता, उनके त्याग और पिछले कुछ वर्षों में मैंने जो संघर्ष किया था, उन सबके बारे में ख्याल आया।'

शेन वॉटसन की किताब ने बदला नज़रिया

साहिल की मानसिक बदलाव की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है। ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेट ऑलराउंडर शेन वॉटसन की किताब 'द विनर्स माइंडसेट' ने उनकी सोच को नई दिशा दी। उन्होंने बताया, 'मेरा शुरुआती मकसद फोन पर स्क्रॉल करने में लगने वाले समय को कम करना था। हालांकि, मुझे इससे दबाव का सामना करने और प्रतियोगिताओं के दौरान खुद को फोकस्ड रखने के बारे में बहुत काम की जानकारी मिली है।' यह बदलाव उनके प्रदर्शन में साफ़ दिखने लगा है।

एशियन गेम्स 2026: सबसे बड़ी चुनौती

जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 साहिल के करियर का अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय असाइनमेंट होगा। वे साउथ कोरिया, चीन और जापान जैसी तीरंदाज़ी की महाशक्तियों से मुकाबला करेंगे। साहिल ने स्वीकार किया कि भारतीय टीम को दबाव में छोटी गलतियों से बचना होगा। उनके शब्दों में, 'अगर हम अपना 100 प्रतिशत दें, तो कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।'

गौरतलब है कि भारतीय टीम का चयन ट्रायल दुनिया के सबसे कठिन चयन परीक्षणों में से एक माना जाता है। साहिल ने कहा, 'अगर हमने भारतीय टीम में अपनी जगह बनाई है, तो इसका मतलब है कि हमारे अंदर दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों को हराने की काबिलियत है।'

साई की ट्रेनिंग का अहम योगदान

फिलहाल कोलकाता के साई नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में तैयारी कर रहे साहिल पिछले 3-4 वर्षों से यहाँ प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने कहा, 'मुझे जो अंतरराष्ट्रीय सफलता मिली है, उसमें साई का बहुत बड़ा हाथ है।' एशियन गेम्स की तैयारी अपने अंतिम चरण में है और साहिल का पूरा ध्यान इसी लक्ष्य पर केंद्रित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन साई के ढाँचे और पारिवारिक समर्थन ने उन्हें टिकाए रखा। यह सवाल ज़रूर उठता है कि क्या भारत में ऐसे कितने साहिल समय पर सही सहयोग न मिलने के कारण बीच रास्ते में ही छोड़ देते हैं। एशियन गेम्स में दक्षिण कोरिया और चीन जैसी टीमों के खिलाफ असली परीक्षा यह होगी कि क्या मानसिक बदलाव बड़े मंच पर भी टिकता है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साहिल जाधव कौन हैं और वे किस खेल में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं?
साहिल जाधव महाराष्ट्र के सातारा से आने वाले भारतीय कंपाउंड आर्चर हैं जो एशियन गेम्स 2026 में भारत की 12 सदस्यीय आर्चरी टीम का हिस्सा हैं। उन्होंने 2026 आर्चरी वर्ल्ड कप स्टेज 2 (शंघाई) में पुरुष व्यक्तिगत कंपाउंड इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीता है।
साहिल जाधव को पहला राष्ट्रीय पदक जीतने में इतना समय क्यों लगा?
साहिल ने 19 साल की उम्र में तीरंदाज़ी शुरू की और हर साल बहुत कम अंतर से राष्ट्रीय पदक से चूकते रहे। 2024 में सीनियर नेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने अपना पहला स्वर्ण पदक जीता — शुरुआत के सात साल बाद।
शेन वॉटसन की किताब 'द विनर्स माइंडसेट' ने साहिल जाधव को कैसे प्रभावित किया?
साहिल ने बताया कि उन्होंने यह किताब फोन से ध्यान हटाने के लिए पढ़नी शुरू की, लेकिन इससे उन्हें प्रतियोगिताओं के दौरान दबाव प्रबंधन और फोकस बनाए रखने के अहम तरीके सीखने को मिले। इस बदलाव का असर उनके अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन पर सकारात्मक रूप से दिखा।
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय आर्चरी टीम की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 में भारत को साउथ कोरिया, चीन और जापान जैसी तीरंदाज़ी की शीर्ष टीमों से मुकाबला करना होगा। साहिल के अनुसार, दबाव में छोटी गलतियाँ और एक-दो अंकों की चूक भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी बाधा रही है।
साहिल जाधव अभी कहाँ और कैसे तैयारी कर रहे हैं?
साहिल जाधव कोलकाता के साई नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में पिछले 3-4 वर्षों से प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने साई को अपनी अंतरराष्ट्रीय सफलता का श्रेय दिया है, जो ट्रेनिंग, रहने-खाने, उपकरण और अन्य सुविधाएँ उपलब्ध कराता है।
राष्ट्र प्रेस
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