साहिल जाधव का एशियन गेम्स 2026 सपना: शेन वॉटसन की किताब से मिली मानसिक ताकत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय आर्चरी के उभरते सितारे साहिल जाधव की नज़रें एशियन गेम्स 2026 में पदक जीतने पर टिकी हैं, और उनकी इस यात्रा में प्रेरणा का स्रोत कोई तीरंदाज नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेट ऑलराउंडर शेन वॉटसन हैं। कोलकाता के साई नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ट्रेनिंग कर रहे 25 वर्षीय जाधव ने बताया कि वॉटसन की किताब ने उन्हें प्रतिस्पर्धा के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखने का तरीका सिखाया।
वॉटसन की किताब से मिली 'विनर्स माइंडसेट'
जाधव ने कहा, 'मैंने लगभग एक महीने पहले शेन वॉटसन की 'द विनर्स माइंडसेट' नाम की किताब पढ़नी शुरू की थी। मेरा शुरुआती इरादा अपने फोन पर स्क्रॉल करने में लगने वाले समय को कम करना था। मुझे दबाव से निपटने और प्रतियोगिता के दौरान खुद को फोकस रखने के बारे में कीमती जानकारी मिली है।' यह दिलचस्प है कि एक तीरंदाज की मानसिक तैयारी का आधार एक क्रिकेटर की सोच पर टिका है — जो खेल की सीमाओं से परे मानसिक अनुशासन की सार्वभौमिकता को दर्शाता है।
सात साल की निराशा, फिर राष्ट्रीय स्वर्ण
महाराष्ट्र के सतारा के रहने वाले जाधव ने 19 साल की उम्र में तीरंदाजी शुरू की। राष्ट्रीय स्तर पर पहला पदक जीतने में उन्हें पूरे सात साल लगे — एक ऐसा सफर जो धैर्य और परिवार के अटूट समर्थन से संभव हुआ। उन्होंने कहा, 'हर साल मैं बहुत कम अंतर से चूक जाता था। यह सब्र और हिम्मत का टेस्ट था।' 2024 में उन्होंने सीनियर नेशनल्स में स्वर्ण पदक जीतकर इस लंबे इंतजार को विराम दिया।
जाधव ने जब पोडियम पर कदम रखा, तो उनके मन में माता-पिता के त्याग की यादें थीं। उन्होंने कहा, 'मैंने अपने माता-पिता, उनके त्याग और पिछले कुछ सालों में जो भी संघर्ष करना पड़ा, उसके बारे में सोचा।'
अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ता कद
राष्ट्रीय सफलता के बाद जाधव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स 2025 में व्यक्तिगत श्रेणी में स्वर्ण और टीम इवेंट में रजत पदक जीता। इस साल की शुरुआत में चीन के शंघाई में आयोजित आर्चरी वर्ल्ड कप 2026 स्टेज 2 में पुरुषों के व्यक्तिगत कंपाउंड इवेंट में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अपने करियर का अब तक का सबसे बड़ा परिणाम हासिल किया।
एशियन गेम्स की चुनौती और 'छोटी-छोटी' बातों का महत्व
अगले महीने जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 में दक्षिण कोरिया, चीन और जापान जैसी वैश्विक आर्चरी महाशक्तियों से मुकाबला होगा। जाधव ने माना कि भारतीय तीरंदाज कभी-कभी दबाव में छोटी-मोटी गलतियाँ कर देते हैं। उन्होंने कहा, 'हमने इस तरह से तीन वर्ल्ड कप में कांस्य पदक गंवाए हैं। अगर हम 100 प्रतिशत देते हैं, तो परिणाम बेहतर होंगे।'
जाधव के अनुसार भारतीय टीम में चयन दुनिया में सबसे कठिन प्रक्रियाओं में से एक है, और यही चयन यह साबित करता है कि भारतीय खिलाड़ियों में वैश्विक श्रेष्ठों को हराने की क्षमता है।
साई की भूमिका और आगे की राह
जाधव पिछले 3-4 सालों से कोलकाता स्थित साई के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, ईस्टर्न सेंटर में ट्रेनिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'साई ट्रेनिंग, रहने की जगह, खाना, उपकरण और दूसरी सुविधाओं का ध्यान रखता है। मेरी अंतरराष्ट्रीय सफलता में साई का अहम योगदान है।' एशियन गेम्स 2026 में पदक जीतना जाधव का अगला बड़ा लक्ष्य है — और उनकी तैयारी, मानसिक दृढ़ता और परिवार का समर्थन इस सपने को हकीकत में बदलने की नींव बन रहे हैं।