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साहिल जाधव का एशियन गेम्स 2026 सपना: शेन वॉटसन की किताब से मिली मानसिक ताकत

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साहिल जाधव का एशियन गेम्स 2026 सपना: शेन वॉटसन की किताब से मिली मानसिक ताकत

सारांश

सतारा से कोलकाता तक — साहिल जाधव की कहानी सात साल की निराशा, परिवार के त्याग और एक क्रिकेटर की किताब से मिली मानसिक ताकत की है। एशियन गेम्स 2026 में दक्षिण कोरिया और चीन को चुनौती देने की तैयारी में जुटे इस तीरंदाज का सफर भारतीय खेल जगत की एक अनकही मेहनत की दास्तान है।

मुख्य बातें

साहिल जाधव एशियन गेम्स 2026 ( आइची-नागोया, जापान ) में पदक के लक्ष्य के साथ कोलकाता के साई नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ट्रेनिंग कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर शेन वॉटसन की किताब 'द विनर्स माइंडसेट' जाधव की मानसिक तैयारी का आधार बनी है।
जाधव ने 2024 में सीनियर नेशनल्स में स्वर्ण पदक जीता — राष्ट्रीय स्तर पर पहली सफलता, जो सात साल की कड़ी मेहनत के बाद मिली।
वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स 2025 में व्यक्तिगत स्वर्ण और टीम रजत ; आर्चरी वर्ल्ड कप 2026 स्टेज 2 (शंघाई) में कांस्य पदक जीता।
एशियन गेम्स में दक्षिण कोरिया , चीन और जापान से कड़ी प्रतिस्पर्धा की उम्मीद; जाधव ने दबाव में 'छोटी गलतियों' को सबसे बड़ी चुनौती बताया।

भारतीय आर्चरी के उभरते सितारे साहिल जाधव की नज़रें एशियन गेम्स 2026 में पदक जीतने पर टिकी हैं, और उनकी इस यात्रा में प्रेरणा का स्रोत कोई तीरंदाज नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेट ऑलराउंडर शेन वॉटसन हैं। कोलकाता के साई नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ट्रेनिंग कर रहे 25 वर्षीय जाधव ने बताया कि वॉटसन की किताब ने उन्हें प्रतिस्पर्धा के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखने का तरीका सिखाया।

वॉटसन की किताब से मिली 'विनर्स माइंडसेट'

जाधव ने कहा, 'मैंने लगभग एक महीने पहले शेन वॉटसन की 'द विनर्स माइंडसेट' नाम की किताब पढ़नी शुरू की थी। मेरा शुरुआती इरादा अपने फोन पर स्क्रॉल करने में लगने वाले समय को कम करना था। मुझे दबाव से निपटने और प्रतियोगिता के दौरान खुद को फोकस रखने के बारे में कीमती जानकारी मिली है।' यह दिलचस्प है कि एक तीरंदाज की मानसिक तैयारी का आधार एक क्रिकेटर की सोच पर टिका है — जो खेल की सीमाओं से परे मानसिक अनुशासन की सार्वभौमिकता को दर्शाता है।

सात साल की निराशा, फिर राष्ट्रीय स्वर्ण

महाराष्ट्र के सतारा के रहने वाले जाधव ने 19 साल की उम्र में तीरंदाजी शुरू की। राष्ट्रीय स्तर पर पहला पदक जीतने में उन्हें पूरे सात साल लगे — एक ऐसा सफर जो धैर्य और परिवार के अटूट समर्थन से संभव हुआ। उन्होंने कहा, 'हर साल मैं बहुत कम अंतर से चूक जाता था। यह सब्र और हिम्मत का टेस्ट था।' 2024 में उन्होंने सीनियर नेशनल्स में स्वर्ण पदक जीतकर इस लंबे इंतजार को विराम दिया।

जाधव ने जब पोडियम पर कदम रखा, तो उनके मन में माता-पिता के त्याग की यादें थीं। उन्होंने कहा, 'मैंने अपने माता-पिता, उनके त्याग और पिछले कुछ सालों में जो भी संघर्ष करना पड़ा, उसके बारे में सोचा।'

अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ता कद

राष्ट्रीय सफलता के बाद जाधव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स 2025 में व्यक्तिगत श्रेणी में स्वर्ण और टीम इवेंट में रजत पदक जीता। इस साल की शुरुआत में चीन के शंघाई में आयोजित आर्चरी वर्ल्ड कप 2026 स्टेज 2 में पुरुषों के व्यक्तिगत कंपाउंड इवेंट में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अपने करियर का अब तक का सबसे बड़ा परिणाम हासिल किया।

एशियन गेम्स की चुनौती और 'छोटी-छोटी' बातों का महत्व

अगले महीने जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 में दक्षिण कोरिया, चीन और जापान जैसी वैश्विक आर्चरी महाशक्तियों से मुकाबला होगा। जाधव ने माना कि भारतीय तीरंदाज कभी-कभी दबाव में छोटी-मोटी गलतियाँ कर देते हैं। उन्होंने कहा, 'हमने इस तरह से तीन वर्ल्ड कप में कांस्य पदक गंवाए हैं। अगर हम 100 प्रतिशत देते हैं, तो परिणाम बेहतर होंगे।'

जाधव के अनुसार भारतीय टीम में चयन दुनिया में सबसे कठिन प्रक्रियाओं में से एक है, और यही चयन यह साबित करता है कि भारतीय खिलाड़ियों में वैश्विक श्रेष्ठों को हराने की क्षमता है।

साई की भूमिका और आगे की राह

जाधव पिछले 3-4 सालों से कोलकाता स्थित साई के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, ईस्टर्न सेंटर में ट्रेनिंग कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'साई ट्रेनिंग, रहने की जगह, खाना, उपकरण और दूसरी सुविधाओं का ध्यान रखता है। मेरी अंतरराष्ट्रीय सफलता में साई का अहम योगदान है।' एशियन गेम्स 2026 में पदक जीतना जाधव का अगला बड़ा लक्ष्य है — और उनकी तैयारी, मानसिक दृढ़ता और परिवार का समर्थन इस सपने को हकीकत में बदलने की नींव बन रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

मानसिक युद्ध है, और जाधव इसे पहचानते हैं। साई की भूमिका सराहनीय है, लेकिन संरचित स्पोर्ट्स साइकोलॉजी प्रोग्राम के बिना, व्यक्तिगत खिलाड़ियों को स्वयं ही यह रास्ता खोजना पड़ता है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साहिल जाधव कौन हैं और उनकी उपलब्धियाँ क्या हैं?
साहिल जाधव महाराष्ट्र के सतारा के 25 वर्षीय भारतीय कंपाउंड तीरंदाज हैं। उन्होंने 2024 में सीनियर नेशनल्स में स्वर्ण, वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स 2025 में व्यक्तिगत स्वर्ण व टीम रजत, और आर्चरी वर्ल्ड कप 2026 स्टेज 2 (शंघाई) में कांस्य पदक जीता है।
शेन वॉटसन की किताब से साहिल जाधव को क्या मिला?
जाधव ने शेन वॉटसन की किताब 'द विनर्स माइंडसेट' से दबाव में फोकस बनाए रखने और मानसिक संतुलन की तकनीक सीखी। उन्होंने बताया कि किताब पढ़ने का शुरुआती उद्देश्य फोन स्क्रॉलिंग कम करना था, लेकिन इससे प्रतिस्पर्धा के दौरान मानसिक तैयारी में बड़ा बदलाव आया।
एशियन गेम्स 2026 कब और कहाँ होंगे?
एशियन गेम्स 2026 जापान के आइची-नागोया में अगले महीने (अगस्त 2026 के बाद) आयोजित होने वाले हैं। इसमें भारत का मुकाबला आर्चरी की दिग्गज टीमों — दक्षिण कोरिया, चीन और जापान — से होगा।
साहिल जाधव की ट्रेनिंग कहाँ हो रही है?
जाधव कोलकाता स्थित साई (भारतीय खेल प्राधिकरण) के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, ईस्टर्न सेंटर में पिछले 3-4 सालों से ट्रेनिंग कर रहे हैं। साई उनकी ट्रेनिंग, आवास, भोजन और उपकरण सुविधाएँ प्रदान करता है।
भारतीय तीरंदाजों के लिए एशियन गेम्स में सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
जाधव के अनुसार दबाव में छोटी-मोटी गलतियाँ और एक-दो पॉइंट की चूक सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने बताया कि इसी वजह से भारत तीन वर्ल्ड कप में कांस्य पदक गंवा चुका है, और एशियन गेम्स में बेहतर परिणाम के लिए 'छोटी-छोटी' बातों पर ध्यान देना जरूरी होगा।
राष्ट्र प्रेस
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