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अनाहत सिंह का एशियन गेम्स 2026 पर फोकस: 'पूरी जान झोंक दूंगी, ओलंपिक बर्थ है सपना'

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अनाहत सिंह का एशियन गेम्स 2026 पर फोकस: 'पूरी जान झोंक दूंगी, ओलंपिक बर्थ है सपना'

सारांश

वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश खिताब जीतने के बाद अनाहत सिंह की नज़रें एशियन गेम्स 2026 पर हैं — और दांव सिर्फ पदक नहीं, बल्कि 2028 ओलंपिक की ऐतिहासिक पहली स्क्वैश बर्थ भी है। 18 साल की यह खिलाड़ी मलेशिया, हांगकांग और जापान के टॉप-10 प्रतिद्वंद्वियों से मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार है।

मुख्य बातें

अनाहत सिंह वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं, जिन्होंने कनाडा में मिस्र का दशकों पुराना दबदबा तोड़ा।
उन्होंने एशियन गेम्स 2026 को अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट बताया और पूरी तैयारी का संकल्प लिया।
स्क्वैश पहली बार 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में शामिल होगा; एशियन गेम्स ओलंपिक क्वालिफिकेशन का अहम मार्ग है।
अनाहत फिलहाल विश्व की टॉप-20 में शामिल हैं; मलेशिया, हांगकांग और जापान के टॉप-10 खिलाड़ियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा अपेक्षित।
वह पहले भी एशियन गेम्स में भाग ले चुकी हैं और उस अनुभव को इस बार की प्रेरणा बता रही हैं।

वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी अनाहत सिंह ने साफ कर दिया है कि एशियन गेम्स 2026 उनके करियर का अब तक का सबसे बड़ा लक्ष्य है। नई दिल्ली में आयोजित एक सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि इस कॉन्टिनेंटल इवेंट में न केवल पदक, बल्कि 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक का क्वालिफिकेशन भी दांव पर है। 18 वर्षीया इस खिलाड़ी के लिए यह दोहरा दबाव और दोहरी प्रेरणा दोनों है।

ऐतिहासिक जीत के बाद बड़ा लक्ष्य

अनाहत ने हाल ही में कनाडा में आयोजित वर्ल्ड जूनियर विमेंस सिंगल्स इवेंट में मिस्र के दशकों पुराने वर्चस्व को तोड़ते हुए ऐतिहासिक खिताब जीता था। यह उपलब्धि हासिल करने वाली वह पहली भारतीय बनीं। अब उनकी नज़रें एशियन गेम्स पर टिकी हैं, जहाँ एशिया के शीर्ष खिलाड़ियों से मुकाबला होगा।

स्क्वैश फेडरेशन ऑफ इंडिया और HACL स्क्वैश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मान समारोह में अनाहत ने कहा, "मुझे लगता है कि यह मेरे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट होने वाला है। इसलिए मैं अगले कुछ महीनों में इसमें अपनी पूरी जान लगा दूंगी।"

ओलंपिक डेब्यू की राह से गुज़रता है एशियन गेम्स

स्क्वैश पहली बार 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में शामिल होगा — यह इस खेल के इतिहास में एक मील का पत्थर है। एशियन गेम्स इस ओलंपिक बर्थ के लिए एक अहम क्वालिफिकेशन मार्ग माना जा रहा है। अनाहत ने कहा, "ओलंपिक में जगह बनाना हर एथलीट का सपना होता है। और ऐसा करने वाली पहली स्क्वैश खिलाड़ी बनना मेरे लिए दुनिया की सबसे खुशी की बात होगी।"

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय स्क्वैश अपने इतिहास के सबसे उज्जवल दौर में है — अनाहत की जूनियर खिताबी जीत ने देश में इस खेल के प्रति नई उम्मीदें जगाई हैं।

कड़ी प्रतिस्पर्धा का अंदाज़ा

फिलहाल विश्व की टॉप-20 में शामिल अनाहत को एशियन गेम्स में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, "मलेशिया, हांगकांग और जापान के कई खिलाड़ी हैं जो दुनिया की टॉप-10 या टॉप-20 रैंकिंग में हैं और वे बहुत बड़े प्रतियोगी भी हैं।" इन देशों के खिलाड़ी एशियाई सर्किट में लंबे समय से दबदबा बनाए हुए हैं, जिससे यह टूर्नामेंट अनाहत के लिए कठिन परीक्षा साबित होगा।

पिछले अनुभव से मिल रही प्रेरणा

अनाहत पहले भी एशियन गेम्स में शिरकत कर चुकी हैं और उस अनुभव ने उन्हें इस बार और अधिक उत्साहित किया है। उन्होंने कहा, "पिछली बार जब मैंने एशियन गेम्स खेले थे, तो वे मेरी ज़िंदगी के सबसे अच्छे दो हफ्ते थे। विलेज में रहना और इतने सारे टॉप एथलीट्स को देखना एक शानदार अनुभव था। इस बार मैं इसे अच्छा प्रदर्शन करने और अपना बेस्ट गेम खेलने के लिए एक प्रेरणा के तौर पर देख रही हूं।"

आगे की तैयारी

एशियन गेम्स से पहले बचे हुए महीनों का भरपूर उपयोग करने की योजना बनाते हुए अनाहत ने कहा, "अगर मैं अगले कुछ महीनों तक कड़ी ट्रेनिंग कर पाऊं और सच में सुधार करके एशियन गेम्स में अपना बेस्ट गेम खेल सकूं, तो यह बहुत शानदार होगा। यह तो बस शुरुआत है।" भारतीय स्क्वैश के लिए यह युवा खिलाड़ी अब सिर्फ एक उभरता नाम नहीं, बल्कि ओलंपिक पदक की उम्मीद बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा एशियाई सर्किट में है जहाँ मलेशिया और हांगकांग की खिलाड़ी विश्व रैंकिंग में उनसे ऊपर हैं। वर्ल्ड जूनियर खिताब जीनियस की झलक देता है, पर सीनियर एशियन स्तर पर निरंतरता अलग चुनौती है। भारतीय स्क्वैश के लिए यह क्षण ऐतिहासिक है — पहली बार ओलंपिक में खेल के शामिल होने से पहले एक 18 वर्षीय चेहरा पूरे देश की उम्मीद बन चुकी है। अब देखना यह है कि स्क्वैश फेडरेशन ऑफ इंडिया इस प्रतिभा को सही संसाधन और अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र दे पाती है या नहीं।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनाहत सिंह कौन हैं और उन्होंने क्या उपलब्धि हासिल की है?
अनाहत सिंह वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं। उन्होंने कनाडा में आयोजित विमेंस सिंगल्स इवेंट में मिस्र के लंबे समय से चले आ रहे वर्चस्व को तोड़ा और यह खिताब अपने नाम किया।
अनाहत सिंह के लिए एशियन गेम्स 2026 इतना अहम क्यों है?
एशियन गेम्स 2026 न केवल एक बड़ा कॉन्टिनेंटल इवेंट है, बल्कि यह 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन का एक महत्वपूर्ण मार्ग भी माना जा रहा है। स्क्वैश पहली बार 2028 ओलंपिक में शामिल होगा, इसलिए अनाहत इस ऐतिहासिक मौके का हिस्सा बनना चाहती हैं।
स्क्वैश ओलंपिक में पहली बार कब खेला जाएगा?
स्क्वैश पहली बार 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक में शामिल होगा। यह इस खेल के इतिहास में एक ऐतिहासिक क्षण होगा और अनाहत सिंह उस पहली ओलंपिक स्क्वैश प्रतियोगिता में भाग लेने की इच्छुक हैं।
एशियन गेम्स 2026 में अनाहत सिंह के सामने कौन-सी चुनौतियाँ होंगी?
अनाहत को मलेशिया, हांगकांग और जापान की उन खिलाड़ियों से मुकाबला करना होगा जो विश्व की टॉप-10 और टॉप-20 रैंकिंग में हैं। अनाहत खुद फिलहाल विश्व की टॉप-20 में हैं, इसलिए यह प्रतिस्पर्धा उनके लिए कड़ी परीक्षा होगी।
अनाहत सिंह एशियन गेम्स 2026 की तैयारी कैसे कर रही हैं?
अनाहत ने कहा है कि वह अगले कुछ महीनों में कड़ी ट्रेनिंग करेंगी और अपने खेल में ज़रूरी सुधार लाएंगी। उनका लक्ष्य एशियन गेम्स में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना है और इसे ओलंपिक सफर की शुरुआत मानती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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