पश्चिम बंगाल: राज्यपाल के नाम पर फर्जी कॉल, लोक भवन ने एडवाइजरी जारी की
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के लोक भवन ने 1 अक्टूबर 2026 को एक एडवाइजरी जारी कर सरकारी अधिकारियों, संगठनों और आम नागरिकों को आगाह किया कि कुछ अज्ञात व्यक्ति राज्यपाल के नाम पर फर्जी फोन कॉल कर रहे हैं और उनकी तस्वीर का अनधिकृत रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है। लोक भवन ने स्पष्ट किया है कि ऐसे किसी भी संदिग्ध संपर्क या दावे की सत्यता की पुष्टि किए बिना उस पर भरोसा न किया जाए और न ही उसके आधार पर कोई कदम उठाया जाए।
फर्जी कॉल का मामला
लोक भवन के संज्ञान में आया है कि मोबाइल नंबर 9836205162 और 9836874913 से कथित तौर पर फर्जी कॉल किए गए। रिपोर्टों के अनुसार, इनमें से एक कॉल करने वाले ने खुद को गवर्नर हाउस का 'आकाश सिंह' बताया, जबकि दूसरे व्यक्ति ने खुद को पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बताया।
लोक भवन ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि आकाश सिंह नाम का कोई भी व्यक्ति वर्तमान में लोक भवन में कार्यरत नहीं है। यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि कॉल करने वाले लोग राजभवन कर्मियों के नाम पर भी झूठा परिचय दे रहे हैं।
तस्वीर के अनधिकृत इस्तेमाल का मामला
एक अलग प्रकरण में, कोलकाता में आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम की प्रचार सामग्री में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल की तस्वीर को उनकी सहमति या अनुमति के बिना इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। लोक भवन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट माँगी है।
गौरतलब है कि किसी संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति की छवि या नाम का बिना अनुमति इस्तेमाल करना न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि कानूनी कार्यवाही को भी आमंत्रण देता है।
जाँच के निर्देश
लोक भवन ने दोनों मामलों — फर्जी कॉल और तस्वीर के दुरुपयोग — में संबंधित अधिकारियों को जाँच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को घटनाओं के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान करने और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने को कहा गया है।
आम जनता पर असर और सावधानी की अपील
लोक भवन की एडवाइजरी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उचित अनुमति के बिना किसी कार्यक्रम या प्रचार-प्रसार के लिए राज्यपाल के नाम, तस्वीर या पदनाम का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। लोक भवन ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें ऐसा कोई संदिग्ध कॉल, संदेश या अनधिकृत इस्तेमाल की जानकारी मिले, तो वे तत्काल आधिकारिक माध्यमों से सूचित करें।
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब डिजिटल और टेलीफोनिक धोखाधड़ी के मामले पूरे देश में बढ़ रहे हैं। राज्यपाल जैसे उच्च संवैधानिक पद के नाम पर ठगी का प्रयास प्रशासनिक विश्वसनीयता के साथ खिलवाड़ है और इसके व्यापक सामाजिक निहितार्थ हो सकते हैं।