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गुजरात: बावला में ₹4.35 करोड़ का 4.354 किलो एम्बरग्रीस जब्त, दो आरोपी हिरासत में

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गुजरात: बावला में ₹4.35 करोड़ का 4.354 किलो एम्बरग्रीस जब्त, दो आरोपी हिरासत में

सारांश

गुजरात पुलिस के स्टेट मॉनिटरिंग सेल ने बावला में ₹4.35 करोड़ मूल्य की 4.354 किलो एम्बरग्रीस बरामद की। यह पदार्थ परफ्यूम उद्योग में अत्यंत मूल्यवान है और स्पर्म व्हेल से मिलता है — जो भारत में शेड्यूल-I संरक्षित प्रजाति है। दो लोग हिरासत में, आपूर्ति श्रृंखला की जाँच जारी।

मुख्य बातें

गुजरात SMC ने 1 अक्टूबर 2026 को बावला, अहमदाबाद ग्रामीण में 4.354 किलोग्राम एम्बरग्रीस जब्त की, जिसकी कीमत ₹4.35 करोड़ है।
अन्य जब्त सामान सहित कुल बरामदगी का मूल्य ₹4,38,17,770 आँका गया।
अजय चावड़ा (तारकपुर, खंभात) और हितेश चौहान (भेटावाड़ा, ढोलका) को वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत हिरासत में लिया गया।
छापेमारी का नेतृत्व PSI वीके राठौड़ ने किया; DGP जीएस मलिक के निर्देशों पर अभियान चलाया गया।
स्पर्म व्हेल वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत शेड्यूल-I में सूचीबद्ध — भारत में उच्चतम संरक्षण दर्जा।
मामले में मेहुल डाभी , किशन गोहेल , अशोक वाघेला और सचिन नामक व्यक्ति की भूमिका की जाँच जारी।

गुजरात पुलिस के स्टेट मॉनिटरिंग सेल (SMC) ने 1 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद ग्रामीण के बावला इलाके में छापेमारी कर दो व्यक्तियों से 4.354 किलोग्राम एम्बरग्रीस (जिसे 'व्हेल की उल्टी' भी कहा जाता है) जब्त किया, जिसकी अनुमानित कीमत ₹4.35 करोड़ बताई जा रही है। अन्य जब्त सामान सहित कुल बरामदगी का मूल्य ₹4,38,17,770 आँका गया है।

कैसे हुई छापेमारी

पुलिस महानिदेशक (DGP) जीएस मलिक के राज्य में गैर-कानूनी गतिविधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के निर्देशों के बाद SMC ने यह अभियान चलाया। पुलिस सब-इंस्पेक्टर वीके राठौड़ के नेतृत्व में टीम ने राजकोट-अहमदाबाद हाईवे पर स्थित आकृति आर्केड कॉम्प्लेक्स के पार्किंग एरिया में यह जब्ती की।

बरामद एम्बरग्रीस सफेद, क्रीम, सुनहरे और भूरे रंग के सख्त व ठोस टुकड़ों के रूप में था। वन विभाग और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के अधिकारियों ने सामग्री की जाँच कर पुष्टि की।

हिरासत में लिए गए आरोपी

पुलिस के बयान के अनुसार, दोनों हिरासत में लिए गए व्यक्तियों की पहचान अजय चावड़ा (निवासी: तारकपुर, खंभात तालुका, आनंद जिला) और हितेश चौहान (निवासी: भेटावाड़ा, ढोलका तालुका, अहमदाबाद जिला) के रूप में की गई है।

पूछताछ में चावड़ा ने बताया कि मेहुल डाभी (तारकपुर, खंभात) ने उसे एम्बरग्रीस बेचने में सहायता के लिए बावला बुलाया था। इसके बाद वह किशन गोहेल और एक अन्य व्यक्ति के साथ वहाँ पहुँचा।

पुलिस के अनुसार, चौहान अशोक वाघेला (हेडलपारा, खंभात) से एम्बरग्रीस लेकर आया था और कथित तौर पर उसने यह काम सचिन नामक व्यक्ति के निर्देश पर किया। ग्रुप का इरादा इसे किशन गोहेल को सौंपकर बेचना था, जहाँ छापेमारी में दोनों को रंगे हाथों पकड़ लिया गया।

कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 106 के तहत सामान जब्त किया और धारा 35(1)(ई) के अंतर्गत दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया। उन्हें वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई हेतु बावला पुलिस स्टेशन को सौंप दिया गया है। उल्लेखनीय है कि इस अधिनियम के तहत स्पर्म व्हेल को शेड्यूल-I में रखा गया है, जो इसे उच्चतम संरक्षण का दर्जा देता है।

एम्बरग्रीस क्यों है इतना कीमती

एम्बरग्रीस स्पर्म व्हेल की पाचन प्रणाली से उत्पन्न एक दुर्लभ पदार्थ है। इसका उपयोग उच्च-गुणवत्ता वाले परफ्यूम में 'फिक्सेटिव' के रूप में किया जाता है, जिससे खुशबू अधिक देर तक टिकती है। अगरबत्ती, सुगंधित तेल और अन्य खुशबूदार उत्पादों में भी इसका प्रयोग होता रहा है।

ऐतिहासिक रूप से इसे दवा और कुछ संस्कृतियों में कामोत्तेजक के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता रहा है, जिस कारण अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इसकी माँग और कीमत असाधारण रूप से ऊँची है। SMC के अनुसार, इस मामले में जाँच जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी जागरूकता और निगरानी तंत्र अपर्याप्त बने हुए हैं। आपूर्ति श्रृंखला में कई नाम उभरे हैं — मेहुल डाभी, किशन गोहेल, अशोक वाघेला, सचिन — जो संकेत देते हैं कि यह एक संगठित रैकेट है, न कि दो लोगों की अकेली करतूत। असली सवाल यह है कि इस नेटवर्क के ऊपरी सिरे तक जाँच पहुँचती है या नहीं।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एम्बरग्रीस क्या होता है और यह इतना महंगा क्यों है?
एम्बरग्रीस स्पर्म व्हेल की पाचन प्रणाली से निकलने वाला एक दुर्लभ मोमी पदार्थ है, जिसका उपयोग उच्च-गुणवत्ता वाले परफ्यूम में 'फिक्सेटिव' के रूप में होता है। इसकी अत्यंत सीमित उपलब्धता और अंतरराष्ट्रीय माँग के कारण यह अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में असाधारण रूप से महँगा बिकता है।
गुजरात में एम्बरग्रीस रखना या बेचना कानूनी है?
नहीं। भारत में स्पर्म व्हेल वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत शेड्यूल-I में संरक्षित है, इसलिए एम्बरग्रीस का कब्ज़ा, खरीद-बिक्री और तस्करी पूरी तरह गैर-कानूनी है। इस अपराध में कड़ी सज़ा का प्रावधान है।
बावला छापेमारी में कितने लोगों को हिरासत में लिया गया और उन पर क्या आरोप हैं?
दो लोगों — अजय चावड़ा और हितेश चौहान — को हिरासत में लिया गया है। उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 35(1)(ई) के तहत हिरासत में लेकर वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए बावला पुलिस स्टेशन को सौंपा गया है।
इस मामले में और कितने संदिग्ध हैं?
पूछताछ में मेहुल डाभी, किशन गोहेल, अशोक वाघेला और सचिन नामक व्यक्ति के नाम सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार इन सभी की भूमिका की जाँच जारी है और आगे की कार्रवाई बावला पुलिस स्टेशन के ज़रिए हो रही है।
गुजरात SMC ने यह छापेमारी कैसे की?
DGP जीएस मलिक के गैर-कानूनी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देशों के बाद PSI वीके राठौड़ के नेतृत्व में टीम ने राजकोट-अहमदाबाद हाईवे पर आकृति आर्केड कॉम्प्लेक्स के पार्किंग एरिया में छापा मारा। वन विभाग और FSL अधिकारियों ने मौके पर सामग्री की जाँच की।
राष्ट्र प्रेस
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