अहमदाबाद में ₹1.82 करोड़ का एम्बरग्रीस बरामद, सरखेज से तीन तस्कर गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद के सरखेज इलाके में 1 जुलाई 2026 को स्थानीय अपराध शाखा (एलसीबी) जोन-7 ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 1.823 किलोग्राम एम्बरग्रीस के साथ तीन व्यक्तियों को गिरफ्तार किया, जिसका अनुमानित बाज़ार मूल्य ₹1,82,35,000 है। एम्बरग्रीस — जिसे सामान्य भाषा में 'व्हेल की उल्टी' कहा जाता है — वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत एक संरक्षित उत्पाद है और इसका कब्जा, भंडारण व बिक्री पूर्णतः अवैध है।
कार्रवाई का घटनाक्रम
रथ यात्रा से पूर्व शहर में अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए अहमदाबाद नगर पुलिस आयुक्त जीएस मलिक के मार्गदर्शन में एक लक्षित कार्य योजना तैयार की गई थी। इसी योजना के तहत गश्त के दौरान मिली विशिष्ट सूचना पर पुलिस सब-इंस्पेक्टर एचडी वाघेला के नेतृत्व में एलसीबी जोन-7 की टीम ने एसपी रिंग रोड, सनाथल पुल के निकट तीनों संदिग्धों को रोककर तलाशी ली।
तलाशी में 1.823 किलोग्राम एम्बरग्रीस के अलावा ₹5,000 मूल्य का एक मोबाइल फोन भी बरामद हुआ। जब्त सामग्री का कुल मूल्य ₹1,82,35,000 आंका गया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
हिरासत में लिए गए तीनों व्यक्तियों की पहचान इस प्रकार हुई है: सुरेंद्रनगर जिले के लिंबडी निवासी 27 वर्षीय विश्वराजसिंह चुडासमा, लिंबडी निवासी 24 वर्षीय दर्शन सभाद, तथा अहमदाबाद जिले के चांगोदर निवासी 25 वर्षीय वीरपालसिंह राठौड़।
पुलिस उपायुक्त (जोन-7) शिवम वर्मा ने बताया कि तीनों सरखेज पुलिस थाना क्षेत्र में एम्बरग्रीस बेचने की फिराक में थे, जिसके बाद छापेमारी कर उन्हें गिरफ्तार किया गया।
एम्बरग्रीस क्या है और यह इतना कीमती क्यों
एम्बरग्रीस शुक्राणु व्हेल (Sperm Whale) की पाचन प्रणाली में बनने वाला एक दुर्लभ मोमनुमा पदार्थ है, जो अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में इत्र उद्योग में अत्यधिक मूल्यवान माना जाता है। भारत में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अंतर्गत इसे संरक्षित वन्यजीव उत्पाद की श्रेणी में रखा गया है, जिसके कारण इसका व्यापार पूर्णतः प्रतिबंधित है।
गौरतलब है कि एम्बरग्रीस की तस्करी के मामले गुजरात के तटीय ज़िलों में पहले भी सामने आते रहे हैं, क्योंकि अरब सागर तट से इसकी अवैध आपूर्ति की आशंका अधिकारियों को लंबे समय से रहती है।
पुलिस की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
पुलिस उपायुक्त वर्मा ने स्पष्ट किया कि यह गिरफ्तारी अवैध गतिविधियों के विरुद्ध जारी 'लक्षित कार्य योजना' का हिस्सा है। तीनों आरोपियों के विरुद्ध वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
आगे की जाँच में पुलिस इस तस्करी नेटवर्क के स्रोत और आपूर्ति श्रृंखला का पता लगाने की कोशिश करेगी।