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अनाहत सिंह ने रचा इतिहास: वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय, मंडाविया ने दी बधाई

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अनाहत सिंह ने रचा इतिहास: वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियन बनने वाली पहली भारतीय, मंडाविया ने दी बधाई

सारांश

18 साल की अनाहत सिंह ने कनाडा में मिस्र का 13 साल पुराना दबदबा तोड़ते हुए वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीती — यह भारतीय स्क्वैश की अब तक की सबसे बड़ी जीत है, और 2028 ओलंपिक से ठीक पहले आई यह उपलब्धि देश के लिए नई उम्मीद लेकर आई है।

मुख्य बातें

अनाहत सिंह वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं।
फाइनल में मिस्र की रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से हराया।
मिस्र का 13 साल का खिताबी दबदबा और भारत का 21 साल का इंतजार एक साथ खत्म हुआ।
मनसुख मंडाविया ने एक्स पर बधाई देते हुए इसे 'हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण' बताया।
स्क्वैश 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में पहली बार शामिल होगा, जिससे यह जीत और अहम हो जाती है।

अनाहत सिंह ने 26 जुलाई 2026 को कनाडा के नियाग्रा-ऑन-द-लेक में आयोजित वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का महिला सिंगल्स खिताब जीतकर भारतीय स्क्वैश का इतिहास बदल दिया। 18 वर्षीय इस खिलाड़ी ने फाइनल में मिस्र की दूसरी सीड रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से हराकर यह उपलब्धि हासिल की। इस जीत के साथ अनाहत यह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं।

ऐतिहासिक जीत का विवरण

वर्ल्ड नंबर 20 और टॉप सीड अनाहत सिंह ने फाइनल की शुरुआत से ही दबदबा कायम रखा और मिस्र की खिलाड़ी को वापसी का मौका नहीं दिया। तीनों गेम में एकतरफा प्रदर्शन करते हुए उन्होंने खिताब पर कब्जा किया। इससे एक दिन पहले, शुक्रवार को सेमीफाइनल में अनाहत ने मिस्र की बारब सामेह को चार गेम में हराकर 21 साल बाद वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय बनने का रिकॉर्ड भी बनाया था।

दो ऐतिहासिक रिकॉर्ड एक साथ ध्वस्त

अनाहत की इस जीत ने एक साथ दो बड़े रिकॉर्ड तोड़े। पहला — 2005 में जोशना चिनप्पा के महिला जूनियर फाइनल में पहुँचने के बाद से भारत का 21 साल का इंतजार खत्म हुआ। दूसरा — मिस्र के खिलाड़ियों का इस खिताब पर 13 साल से चला आ रहा दबदबा भी टूट गया। गौरतलब है कि अनाहत 2010 में अमेरिका की अमांडा सोभी के बाद यह खिताब जीतने वाली पहली गैर-मिस्र खिलाड़ी भी बन गई हैं।

खेल मंत्री और SAI की प्रतिक्रिया

केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने एक्स पर लिखा, 'इतिहास रच दिया गया। वर्ल्ड स्क्वैश जूनियर चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय बनने पर अनाहत सिंह को बधाई। यह एक शानदार उपलब्धि और हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है।' स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने भी इसे 'भारतीय स्क्वैश के इतिहास में एक नया अध्याय' करार देते हुए कहा कि यह उपलब्धि चैंपियंस की नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी।

2028 ओलंपिक और स्क्वैश का भविष्य

स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ने इस जीत को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया है, क्योंकि स्क्वैश 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में पहली बार शामिल होने जा रहा है। ऐसे में अनाहत की यह जीत भारत की ओलंपिक तैयारियों को नई दिशा और ऊर्जा दे सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय स्क्वैश वैश्विक मंच पर अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश में है। अनाहत की यह जीत आने वाले वर्षों में भारत के लिए और भी बड़े खिताबों की उम्मीद जगाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय स्क्वैश के लिए एक टर्निंग पॉइंट है — खासकर तब जब खेल पहली बार 2028 ओलंपिक में दस्तक देने वाला है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारतीय खेल तंत्र इस प्रतिभा को ओलंपिक पदक तक पहुँचाने के लिए पर्याप्त निवेश और ढाँचागत समर्थन देगा। जोशना चिनप्पा के बाद दो दशकों तक इस स्तर की सफलता न मिलना यह भी बताता है कि प्रतिभा पाइपलाइन में कहीं न कहीं खामी रही है। अनाहत की जीत उस खामी को भरने का अवसर है — बशर्ते नीति-निर्माता इसे सुर्खियों तक सीमित न रखें।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनाहत सिंह ने वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप कैसे जीती?
अनाहत सिंह ने 26 जुलाई 2026 को कनाडा के नियाग्रा-ऑन-द-लेक में महिला सिंगल्स फाइनल में मिस्र की रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से हराकर खिताब जीता। वह इस चैंपियनशिप को जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी हैं।
अनाहत सिंह की इस जीत का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
इस जीत ने एक साथ दो रिकॉर्ड तोड़े — मिस्र का 13 साल का खिताबी एकाधिकार और 2005 में जोशना चिनप्पा के फाइनल में पहुँचने के बाद से भारत का 21 साल का इंतजार। अनाहत 2010 में अमांडा सोभी के बाद यह खिताब जीतने वाली पहली गैर-मिस्र खिलाड़ी भी बनीं।
खेल मंत्री मनसुख मंडाविया ने अनाहत की जीत पर क्या कहा?
केंद्रीय खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने एक्स पर लिखा कि 'इतिहास रच दिया गया' और इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया। स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने भी इसे भारतीय स्क्वैश के इतिहास में नया अध्याय करार दिया।
2028 ओलंपिक में स्क्वैश के शामिल होने से अनाहत की जीत और कितनी अहम हो जाती है?
स्क्वैश पहली बार 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक में शामिल होने जा रहा है। ऐसे में अनाहत की वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप जीत भारत की ओलंपिक दावेदारी को मजबूत करती है और देश में इस खेल के प्रति रुचि और निवेश बढ़ाने का अवसर देती है।
अनाहत सिंह फाइनल से पहले सेमीफाइनल में कैसे पहुँचीं?
शुक्रवार को सेमीफाइनल में अनाहत ने मिस्र की बारब सामेह को चार गेम में हराया और 21 साल बाद वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं।
राष्ट्र प्रेस
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