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अनाहत सिंह ने रचा इतिहास: वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय, PM मोदी ने की तारीफ

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अनाहत सिंह ने रचा इतिहास: वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय, PM मोदी ने की तारीफ

सारांश

18 वर्षीय अनाहत सिंह ने वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतकर इतिहास रच दिया — वह यह खिताब जीतने वाली पहली भारतीय और 2010 के बाद पहली गैर-मिस्री खिलाड़ी बनीं। मिस्र के 15 साल के दबदबे को तोड़ते हुए उन्होंने भारतीय स्क्वैश को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई।

मुख्य बातें

अनाहत सिंह ने 26 जुलाई 2025 को वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनकर इतिहास रचा।
फाइनल में मिस्र की रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से हराया; पूरे टूर्नामेंट में एक भी मैच नहीं गँवाया।
अनाहत ने महिला वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश खिताब पर मिस्र के 15 साल के एकाधिकार को समाप्त किया।
PM मोदी ने एक्स पर लिखा कि यह उपलब्धि युवाओं के बीच स्क्वैश को और लोकप्रिय बनाएगी।
अनाहत ने 2022 एशियाई खेलों में 15 साल की उम्र में दो ब्रॉन्ज मेडल जीते थे और कॉमनवेल्थ गेम्स में भी देश का प्रतिनिधित्व किया है।

अनाहत सिंह ने 26 जुलाई 2025 को इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया — वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाली वह पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। कनाडा के ओंटारियो के नियाग्रा-ऑन-द-लेक में आयोजित इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के विमेंस सिंगल्स फाइनल में 18 वर्षीय अनाहत ने मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से पराजित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस उपलब्धि को 'ऐतिहासिक' करार देते हुए कहा कि इससे देश के युवाओं में स्क्वैश के प्रति रुचि और बढ़ेगी।

फाइनल में शानदार प्रदर्शन

अनाहत टूर्नामेंट में शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी के रूप में उतरी थीं और उन्होंने पूरे इवेंट में एक भी मैच नहीं गँवाया। फाइनल में उन्होंने तीनों गेम जीतकर खिताब अपने नाम किया। यह जीत इसलिए भी विशेष है क्योंकि अनाहत ने महिला वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप पर मिस्र के 15 साल के एकाधिकार को समाप्त किया। इससे पहले 2010 में अमेरिकी खिलाड़ी अमांडा सोभी ने यह खिताब जीता था — यानी अनाहत गैर-मिस्री खिलाड़ियों में भी इस खिताब को जीतने वाली पहली खिलाड़ी हैं।

अनाहत का भावुक बयान

खिताबी जीत के बाद अनाहत ने कहा, 'मुझे अभी भी ऐसा लग रहा है जैसे मैं सपना देख रही हूँ। पिछले चार वर्षों से मैं सेमीफाइनल और क्वार्टर फाइनल में हारती रही हूँ। जब भी किसी ने पूछा, तो मैंने हमेशा यही कहा कि यह टूर्नामेंट मेरे लिए किसी श्राप जैसा है।' उन्होंने आगे कहा, 'यह मेरा जूनियर के तौर पर आखिरी साल था और इसे जीतने का एकमात्र मौका। इसीलिए मैं बस कोर्ट पर उतरी और अपने शॉट्स सही तरीके से खेले — मैं वर्ल्ड चैंपियनशिप फाइनल के हर पल का आनंद लेना चाहती थी।'

PM मोदी की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप में एक ऐतिहासिक उपलब्धि। अनाहत सिंह पर गर्व है कि उन्होंने गोल्ड मेडल जीता और वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी बनीं। यह उपलब्धि युवाओं के बीच स्क्वैश को और लोकप्रिय बनाएगी।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत विभिन्न खेलों में अपनी अंतरराष्ट्रीय उपस्थिति को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

अनाहत का करियर और पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि अनाहत सिंह ने महज 15 साल की उम्र में 2022 एशियाई खेलों में दो ब्रॉन्ज मेडल जीते थे और कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है। वह भारत की सबसे प्रतिभाशाली युवा स्क्वैश खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं। यह जीत उनके तेज़ी से आगे बढ़ते करियर में एक निर्णायक मोड़ है और भारतीय स्क्वैश के लिए एक नए युग की शुरुआत का संकेत देती है।

भारतीय स्क्वैश के लिए क्या मायने रखती है यह जीत

यह जीत केवल एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत सफलता नहीं है — यह भारतीय स्क्वैश के लिए एक ऐतिहासिक पल है। वर्षों से मिस्र और अन्य देशों के दबदबे वाले इस खेल में भारत ने अब वैश्विक स्तर पर अपनी दावेदारी पेश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनाहत की इस जीत से देश में स्क्वैश की अकादमियों और प्रशिक्षण सुविधाओं की माँग बढ़ सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या खेल प्रशासन इस उपलब्धि को एक आंदोलन में बदल पाएगा। भारत में स्क्वैश अब भी कुलीन वर्ग का खेल माना जाता है — सरकारी स्कूलों और ग्रामीण अकादमियों में इसकी पहुँच नगण्य है। PM मोदी की सराहना प्रेरणादायक है, लेकिन बिना ढाँचागत निवेश के यह जीत एक अपवाद बनकर रह जाएगी, न कि एक प्रवृत्ति। भारतीय स्क्वैश महासंघ के लिए यह सही समय है कि वह अनाहत की सफलता को जूनियर विकास कार्यक्रमों और सार्वजनिक कोर्ट निर्माण में रूपांतरित करे।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनाहत सिंह ने वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप कब और कहाँ जीती?
अनाहत सिंह ने 26 जुलाई 2025 को कनाडा के ओंटारियो के नियाग्रा-ऑन-द-लेक में आयोजित वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीती। उन्होंने विमेंस सिंगल्स फाइनल में मिस्र की रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से हराया।
अनाहत सिंह की यह जीत ऐतिहासिक क्यों है?
अनाहत वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं। इसके साथ ही उन्होंने 2010 के बाद पहली बार किसी गैर-मिस्री खिलाड़ी के रूप में यह खिताब जीता और महिला वर्ग में मिस्र के 15 साल के एकाधिकार को समाप्त किया।
PM मोदी ने अनाहत सिंह की जीत पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा कि अनाहत सिंह ने गोल्ड मेडल जीतकर वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी बनकर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने भरोसा जताया कि यह उपलब्धि युवाओं के बीच स्क्वैश को और लोकप्रिय बनाएगी।
अनाहत सिंह के करियर की प्रमुख उपलब्धियाँ क्या हैं?
अनाहत सिंह ने 15 साल की उम्र में 2022 एशियाई खेलों में दो ब्रॉन्ज मेडल जीते थे और कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया है। अब 18 साल की उम्र में वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतकर वह भारत की सबसे सफल युवा स्क्वैश खिलाड़ी बन गई हैं।
अनाहत सिंह ने फाइनल में किसे और किस स्कोर से हराया?
अनाहत सिंह ने फाइनल में मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से हराया। अनाहत टूर्नामेंट में शीर्ष वरीयता प्राप्त खिलाड़ी थीं और उन्होंने पूरे इवेंट में एक भी मैच नहीं गँवाया।
राष्ट्र प्रेस
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