अनाहत सिंह बनीं पहली भारतीय वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियन, मिस्र का 15 साल का दबदबा तोड़ा
सारांश
मुख्य बातें
अनाहत सिंह ने 26 जुलाई 2025 को इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया — 18 वर्षीय यह भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का महिला खिताब जीतने वाली पहली भारतीय बन गई हैं। कनाडा के ओंटारियो स्थित नियाग्रा-ऑन-द-लेक में आयोजित वर्ल्ड स्क्वैश जूनियर इंडिविजुअल चैंपियनशिप के फाइनल में उन्होंने मिस्र की दूसरी सीड खिलाड़ी रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से हराकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।
मुख्य घटनाक्रम
वर्ल्ड नंबर 20 और टॉप सीड अनाहत ने फाइनल में एकतरफा दबदबे के साथ तीन गेम में जीत दर्ज की। इससे पहले शुक्रवार रात के सेमीफाइनल में उन्होंने मिस्र की बारब सामेह को चार गेम में हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। यह उन्हें 21 वर्षों में वर्ल्ड स्क्वैश जूनियर चैंपियनशिप के फाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी भी बनाता है।
गौरतलब है कि पिछले साल इसी प्रतियोगिता में अनाहत सेमीफाइनल तक पहुँची थीं और ब्रॉन्ज मेडल जीता था। इस बार उन्होंने एक कदम और आगे बढ़कर स्वर्णिम इतिहास रचा।
मिस्र का 15 साल का वर्चस्व टूटा
अनाहत की यह जीत महज एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि स्क्वैश की दुनिया में एक बड़ा भूचाल है। वे 2010 में अमेरिका की अमांडा सोभी के बाद इस खिताब को जीतने वाली पहली गैर-मिस्र खिलाड़ी बनी हैं। 2011 से मिस्र की खिलाड़ियों ने लगातार इस खिताब पर कब्ज़ा बनाए रखा था — अनाहत ने 15 साल के उस अटूट सिलसिले को तोड़ दिया।
खिलाड़ी की प्रतिक्रिया
सेमीफाइनल में जीत के बाद अनाहत ने कहा था, 'मैं सच में बहुत खुश हूँ। मैंने कुछ महीने पहले ब्रिटिश जूनियर ओपन में बारब के खिलाफ खेला था और वह भी ऐसा ही कड़ा मुकाबला था, इसलिए मुझे पता था कि मुझे बहुत अच्छा खेलना होगा। कल मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ खेल नहीं दिखाया था और मुझे पता था कि आज मुझे कोर्ट पर उतरकर दिखाना होगा कि मैं क्या कर सकती हूँ। मैंने चार वर्ल्ड जूनियर टूर्नामेंट खेले हैं और क्वार्टर-फाइनल और सेमीफाइनल में हार गई थी, इसलिए फाइनल में पहुँचने से मेरे माता-पिता और कोच बहुत खुश हैं, लेकिन टूर्नामेंट अभी खत्म नहीं हुआ है।'
पुरुष वर्ग में मिस्र का दबदबा जारी
पुरुष वर्ग में मिस्र की ताकत बरकरार रही। टॉप सीड मोहम्मद जकारिया ने अपने ही देश के सेफेल्डिन रेफे को सीधे गेम में हराकर लगातार चौथी बार फाइनल में जगह बनाई। उनका सामना मिस्र के दूसरे सीड खिलाड़ी एडम हवाल से होना है, जो उनके संभावित तीसरे वर्ल्ड जूनियर खिताब की राह में खड़े हैं।
आगे की राह
अनाहत की यह जीत भारतीय स्क्वैश के लिए एक नए युग की शुरुआत मानी जा रही है। यह ऐसे समय में आई है जब भारत ओलंपिक में स्क्वैश को शामिल कराने की पैरवी कर रहा है। 18 साल की उम्र में विश्व खिताब जीतने वाली अनाहत अब सीनियर सर्किट में और बड़ी उपलब्धियों की दावेदार बन गई हैं।