गुजरात बाढ़: 42,158 लोगों को सुरक्षित निकाला, 308 मवेशियों की मौत; उत्तरी जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात में कई दिनों की लगातार भारी बारिश के बाद राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत अभियान चलाते हुए अब तक 42,158 लोगों को जोखिम वाले इलाकों से सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार इस बाढ़ में पूरे गुजरात में 308 मवेशियों की मौत हुई है, जबकि राहत और पुनर्वास कार्य तेज़ी से जारी हैं।
मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने शनिवार देर शाम गांधीनगर स्थित स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर (SEOC) में बारिश की बदलती स्थिति और राहत कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस बैठक में मुख्य सचिव एम.के. दास, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) डॉ. जयंती रवि और राहत आयुक्त गौरव मकवाना भी उपस्थित रहे।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि एहतियात के तौर पर राज्यभर के संवेदनशील इलाकों से 42,158 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा चुका है। प्रभावित परिवारों को नकद सहायता देने का काम शुरू हो गया है और घर-गृहस्थी से जुड़ी मदद भी शीघ्र उपलब्ध कराई जाएगी।
दक्षिण से उत्तर की ओर बदला संकट
दक्षिण गुजरात में बारिश की तीव्रता कम होने के साथ ही राज्य का ध्यान बचाव कार्यों से हटकर प्रभावित जिलों में राहत और पुनर्वास पर केंद्रित हो गया है। यह ऐसे समय में हुआ है जब अगले 24 घंटों में उत्तरी गुजरात के पाटन, मेहसाणा, वाव-थराद और बनासकांठा जिलों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
इसके मद्देनज़र राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें इन जिलों में पहले ही तैनात कर दी गई हैं।
वर्षा के आँकड़े: पिछले साल से आगे
राहत आयुक्त ने समीक्षा बैठक में बताया कि इस महीने कई जिलों में बारिश का स्तर पिछले वर्ष जुलाई की इसी अवधि को पार कर चुका है। जुलाई के मासिक औसत के मुकाबले वलसाड में 93%, नवसारी में 97%, डांग में 71%, सूरत में 81%, अहमदाबाद में 66% और अमरेली में 63% वर्षा दर्ज की जा चुकी है।
सरकार के निर्देश और आगे की कार्रवाई
मुख्यमंत्री पटेल ने प्रभावित इलाकों के जिला कलेक्टरों को हाई अलर्ट पर रहने और सभी ज़रूरी एहतियाती उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाढ़ का पानी उतरते ही प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सफाई अभियान, सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय और नुकसान आकलन सर्वे शुरू किए जाएँ। गौरतलब है कि बाढ़ के बाद जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए स्वास्थ्य उपायों को प्राथमिकता देना ज़रूरी है। आने वाले दिनों में उत्तरी जिलों की स्थिति पर सरकार की पैनी नज़र बनी रहेगी।