31 जुलाई 2026
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गुजरात में भारी बारिश: 15 जिलों में अलर्ट, सूरत से 1,117 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

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गुजरात में भारी बारिश: 15 जिलों में अलर्ट, सूरत से 1,117 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

सारांश

गुजरात में IMD की भारी बारिश चेतावनी के बाद 15 जिले हाई अलर्ट पर हैं। सूरत में 1,117 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, स्कूल बंद किए गए और वरिष्ठ अधिकारियों को तालुका स्तर पर तैनात किया गया। अगले 48 घंटे राज्य के लिए निर्णायक हैं।

मुख्य बातें

IMD ने गुजरात के 15 जिलों में अगले दो दिनों तक भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की।
सूरत जिले से 31 जुलाई की शाम 4 बजे तक 1,117 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया।
सबसे बड़ा बचाव अभियान मंगरोल तालुका में चला, जहाँ 321 लोगों को निकाला गया।
अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ.
जयंती रवि ने SEOC का निरीक्षण कर सभी दलों को 24 घंटे अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया।
सूरत जिले के तालुकाओं में 3 से 10 इंच बारिश दर्ज; पलसाना और उमरपाडा में और निकासी की निगरानी जारी।
कई जिलों में स्कूल बंद ; निकाले गए लोगों के लिए भोजन व आश्रय की व्यवस्था सुनिश्चित।

गुजरात में 31 जुलाई 2026 को भारी से अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी के बाद राज्य प्रशासन ने युद्धस्तर पर आपदा प्रबंधन की तैयारी शुरू कर दी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की चेतावनी के बाद अधिकारियों ने जोखिम वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया, आपातकालीन दलों को चौबीसों घंटे हाई अलर्ट पर रखा और कई जिलों में राहत-बचाव तंत्र को मजबूत किया।

किन जिलों में जारी हुई चेतावनी

IMD ने अगले दो दिनों के लिए अहमदाबाद, आणंद, अरावली, भरूच, भावनगर, डांग, गांधीनगर, खेड़ा, नर्मदा, नवसारी, साबरकांठा, सूरत, तापी, वडोदरा और वलसाड — कुल 15 जिलों में भारी वर्षा का पूर्वानुमान जारी किया। इन जिलों में निवासियों को अनावश्यक यात्रा से बचने और घर के भीतर रहने की सलाह दी गई।

यह ऐसे समय में आया है जब गुजरात के कई हिस्सों में मानसून पहले से ही सामान्य से अधिक सक्रिय है। सूरत जिले के विभिन्न तालुकाओं में 3 से 10 इंच तक बारिश दर्ज की जा चुकी थी, जिसके बाद प्रशासन ने सबसे बड़ा एहतियाती कदम उठाया।

राज्य स्तर पर तैयारी का जायजा

गांधीनगर में अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) डॉ. जयंती रवि ने राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) का दौरा किया। उन्होंने राहत आयुक्त गौरव मकवाना से मौजूदा स्थिति की विस्तृत जानकारी ली और कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया।

डॉ. रवि ने सभी आपातकालीन प्रतिक्रिया दलों को 24 घंटे अलर्ट मोड में रहने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि SEOC इस मानसून सीजन में लगातार दूसरी बार उच्च-स्तरीय समीक्षा का केंद्र बना है।

सूरत में बड़ा निकासी अभियान

शुक्रवार शाम 4 बजे तक सूरत जिले के ग्रामीण इलाकों के निचले और जोखिम वाले गाँवों से 1,117 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इन्हें सरकारी प्राथमिक स्कूलों, शेल्टर होम, सामुदायिक हॉल और रिश्तेदारों के घरों में ठहराया गया।

सबसे बड़ा बचाव अभियान मंगरोल तालुका में चलाया गया, जहाँ वसरावी, लुवारा, हरंगम, वंकल, भीलवाड़ा, खरेडा, बोरिया, शाह और अंबावाड़ी जैसे गाँवों से 321 लोगों को निकाला गया। इसके अलावा:

मांडवी तालुका से 276, अंबिका तालुका से 151, ओलपाड तालुका से 99, अरेथ तालुका से 76, बारडोली तालुका से 40, चोरयासी तालुका से 40 और कामरेज तालुका के चिखली गाँव से 34 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया।

आम जनता पर असर और राहत इंतजाम

निकाले गए सभी 1,117 लोगों के लिए भोजन और आश्रय की व्यवस्था की गई है। पलसाना और उमरपाडा क्षेत्रों में और निकासी की आवश्यकता को देखते हुए प्रशासन कड़ी निगरानी बनाए हुए है।

इसके साथ ही कई जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे बिना आवश्यकता के यात्रा न करें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।

आगे की योजना और प्रशासनिक तैयारी

आपदा प्रबंधन को और सुदृढ़ करने के लिए सूरत जिला प्रशासन ने आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत प्रत्येक ग्रामीण तालुका में राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी हेतु वरिष्ठ क्लास-1 अधिकारियों को तैनात किया है। ये अधिकारी सीधे सूरत डिज़ास्टर मैनेजमेंट सेंटर के साथ समन्वय करेंगे और अपने-अपने क्षेत्रों में तैयारी, निकासी और आपातकालीन अभियानों की देखरेख करेंगे। अगले 48 घंटे राज्य के लिए निर्णायक माने जा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब बारिश चरम पर हो — न कि पूर्वानुमान के चरण में। राज्य में पिछले कुछ वर्षों में मानसूनी आपदाओं के दौरान निकासी में देरी के मामले सामने आए हैं; इस बार 1,117 लोगों की समय पर निकासी एक सकारात्मक संकेत है। फिर भी, पलसाना और उमरपाडा जैसे इलाकों में जारी निगरानी यह भी बताती है कि जोखिम अभी टला नहीं है। जलवायु परिवर्तन के चलते गुजरात में अत्यधिक वर्षा की घटनाएँ बढ़ रही हैं — दीर्घकालिक आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचे में निवेश अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में भारी बारिश की चेतावनी किन जिलों के लिए जारी की गई है?
IMD ने अहमदाबाद, आणंद, अरावली, भरूच, भावनगर, डांग, गांधीनगर, खेड़ा, नर्मदा, नवसारी, साबरकांठा, सूरत, तापी, वडोदरा और वलसाड — कुल 15 जिलों में अगले दो दिनों तक भारी से अत्यंत भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है।
सूरत में कितने लोगों को सुरक्षित निकाला गया और कहाँ भेजा गया?
31 जुलाई की शाम 4 बजे तक सूरत जिले के जोखिम वाले गाँवों से 1,117 लोगों को निकाला गया। इन्हें सरकारी प्राथमिक स्कूलों, शेल्टर होम, सामुदायिक हॉल और रिश्तेदारों के घरों में ठहराया गया है।
गुजरात में स्कूल क्यों बंद किए गए हैं?
IMD की भारी बारिश चेतावनी और बाढ़ के खतरे को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई जिलों में स्कूल बंद किए गए हैं। प्रशासन ने नागरिकों को अनावश्यक यात्रा से बचने की भी सलाह दी है।
राज्य स्तर पर आपदा प्रबंधन की क्या तैयारी की गई है?
अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. जयंती रवि ने SEOC का निरीक्षण किया और सभी आपातकालीन दलों को 24 घंटे अलर्ट पर रहने का निर्देश दिया। सूरत जिले में आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत प्रत्येक ग्रामीण तालुका में वरिष्ठ क्लास-1 अधिकारी तैनात किए गए हैं।
सूरत में सबसे अधिक प्रभावित कौन सा क्षेत्र रहा?
मंगरोल तालुका सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहाँ से 321 लोगों को निकाला गया। इसके बाद मांडवी तालुका (276), अंबिका तालुका (151) और ओलपाड तालुका (99) का स्थान रहा।
राष्ट्र प्रेस
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