गिलगित-बाल्टिस्तान में बाढ़ का कहर: चौथे दिन भी हजारों लोग कटे, GLOF से राजमार्ग तबाह
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (POGB) में अचानक आई बाढ़ और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के चलते कई इलाकों का सड़क संपर्क 25 जुलाई 2026 को लगातार चौथे दिन भी बहाल नहीं हो सका। राष्ट्रीय राजमार्गों को व्यापक नुकसान पहुँचने से राहत और पुनर्निर्माण कार्य गंभीर रूप से बाधित हैं, जबकि हजारों स्थानीय निवासी और पर्यटक विभिन्न घाटियों में फँसे हुए हैं।
आपदा का मुख्य कारण और घटनाक्रम
गिलगित-बाल्टिस्तान आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के महानिदेशक अताउर रहमान काकर के अनुसार, 18 से 21 जुलाई के बीच क्षेत्र में रिकॉर्ड स्तर का तापमान दर्ज किया गया, जिससे ग्लेशियर तेज़ी से पिघले और कई स्थानों पर GLOF की घटनाएँ हुईं। इससे पहले 13 जुलाई को दियामेर जिले में छह स्थानों पर फ्लैश फ्लड दर्ज की गई थीं, जिन्होंने तबाही की नींव रख दी थी।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, काराकोरम हाईवे के कई हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। थोरे घाटी में मुख्य सड़क कई स्थानों पर बह जाने से यातायात पूरी तरह ठप है। बिजली की ट्रांसमिशन लाइनें टूटने और मलबा घरों में घुसने से हजारों परिवार मुश्किल में हैं।
प्रभावित क्षेत्र और लोगों की स्थिति
नगर जिले की हिस्पर घाटी के निवासियों ने बताया कि सड़क संपर्क टूटने से मरीजों और छात्रों को गंभीर परेशानियाँ हो रही हैं। खाद्य सामग्री और दवाइयों का स्टॉक तेज़ी से समाप्त हो रहा है। दियामेर, अस्तोर, घिजर और अन्य प्रभावित जिलों में पेयजल, बिजली और संचार सेवाएँ बाधित हैं।
खानबरी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ में कई घर पूरी तरह बह गए और बड़ी संख्या में पशुधन के नष्ट होने की भी खबरें सामने आई हैं। फसलें, कृषि भूमि तथा सार्वजनिक और निजी संपत्तियाँ भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
राहत कार्यों पर सवाल
अस्तोर घाटी के निवासियों ने प्रशासन पर राहत कार्यों की धीमी गति को लेकर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि घाटी का सड़क संपर्क पिछले तीन दिनों से पूरी तरह बाधित है, जिससे क्षेत्र लगभग अलग-थलग पड़ गया है। राहत सामग्री समय पर न पहुँचने से स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है और आपदा प्रबंधन के लिए संसाधनों की भारी कमी है। गौरतलब है कि गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र हर वर्ष मानसून और ग्लेशियर पिघलने के कारण बाढ़ की चपेट में आता है, लेकिन इस बार रिकॉर्ड तापमान ने संकट को और गहरा कर दिया है।
आगे की चुनौतियाँ
राष्ट्रीय राजमार्गों की बहाली में अभी कई दिन और लग सकते हैं, जबकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बारिश की आशंका जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस क्षेत्र में GLOF की घटनाएँ आने वाले वर्षों में और अधिक बार और तीव्र रूप में हो सकती हैं। फँसे हुए पर्यटकों और निवासियों को निकालने के लिए हवाई मार्ग ही एकमात्र विकल्प बचा है, लेकिन खराब मौसम इसमें भी बाधा बन रहा है।