27 जुलाई 2026
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गिलगित-बाल्टिस्तान में बाढ़ का कहर: चौथे दिन भी हजारों लोग कटे, GLOF से राजमार्ग तबाह

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गिलगित-बाल्टिस्तान में बाढ़ का कहर: चौथे दिन भी हजारों लोग कटे, GLOF से राजमार्ग तबाह

सारांश

रिकॉर्ड तापमान से ग्लेशियर पिघले, GLOF ने काराकोरम हाईवे तोड़ा — और चौथे दिन भी गिलगित-बाल्टिस्तान की कई घाटियाँ देश से कटी हैं। हजारों लोग दवा, खाने और पानी के बिना फँसे हैं, जबकि राहत की रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं।

मुख्य बातें

पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान में 25 जुलाई 2026 को लगातार चौथे दिन भी कई इलाकों का सड़क संपर्क बाधित रहा।
18–21 जुलाई के बीच रिकॉर्ड तापमान से ग्लेशियर पिघले, जिससे कई स्थानों पर GLOF की घटनाएँ हुईं।
13 जुलाई को दियामेर जिले में 6 स्थानों पर फ्लैश फ्लड दर्ज; काराकोरम हाईवे के कई हिस्से क्षतिग्रस्त।
हिस्पर घाटी, अस्तोर, दियामेर, घिजर, खानबरी समेत कई क्षेत्रों में पेयजल, बिजली, दवा और खाद्य सामग्री की भारी कमी।
स्थानीय निवासियों ने राहत कार्यों की धीमी गति पर प्रशासन के खिलाफ चिंता जताई।
हजारों निवासी और पर्यटक विभिन्न घाटियों में फँसे; पशुधन और फसलों को भी भारी नुकसान।

पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (POGB) में अचानक आई बाढ़ और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) के चलते कई इलाकों का सड़क संपर्क 25 जुलाई 2026 को लगातार चौथे दिन भी बहाल नहीं हो सका। राष्ट्रीय राजमार्गों को व्यापक नुकसान पहुँचने से राहत और पुनर्निर्माण कार्य गंभीर रूप से बाधित हैं, जबकि हजारों स्थानीय निवासी और पर्यटक विभिन्न घाटियों में फँसे हुए हैं।

आपदा का मुख्य कारण और घटनाक्रम

गिलगित-बाल्टिस्तान आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के महानिदेशक अताउर रहमान काकर के अनुसार, 18 से 21 जुलाई के बीच क्षेत्र में रिकॉर्ड स्तर का तापमान दर्ज किया गया, जिससे ग्लेशियर तेज़ी से पिघले और कई स्थानों पर GLOF की घटनाएँ हुईं। इससे पहले 13 जुलाई को दियामेर जिले में छह स्थानों पर फ्लैश फ्लड दर्ज की गई थीं, जिन्होंने तबाही की नींव रख दी थी।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, काराकोरम हाईवे के कई हिस्से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। थोरे घाटी में मुख्य सड़क कई स्थानों पर बह जाने से यातायात पूरी तरह ठप है। बिजली की ट्रांसमिशन लाइनें टूटने और मलबा घरों में घुसने से हजारों परिवार मुश्किल में हैं।

प्रभावित क्षेत्र और लोगों की स्थिति

नगर जिले की हिस्पर घाटी के निवासियों ने बताया कि सड़क संपर्क टूटने से मरीजों और छात्रों को गंभीर परेशानियाँ हो रही हैं। खाद्य सामग्री और दवाइयों का स्टॉक तेज़ी से समाप्त हो रहा है। दियामेर, अस्तोर, घिजर और अन्य प्रभावित जिलों में पेयजल, बिजली और संचार सेवाएँ बाधित हैं।

खानबरी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ में कई घर पूरी तरह बह गए और बड़ी संख्या में पशुधन के नष्ट होने की भी खबरें सामने आई हैं। फसलें, कृषि भूमि तथा सार्वजनिक और निजी संपत्तियाँ भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

राहत कार्यों पर सवाल

अस्तोर घाटी के निवासियों ने प्रशासन पर राहत कार्यों की धीमी गति को लेकर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि घाटी का सड़क संपर्क पिछले तीन दिनों से पूरी तरह बाधित है, जिससे क्षेत्र लगभग अलग-थलग पड़ गया है। राहत सामग्री समय पर न पहुँचने से स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट से जूझ रहा है और आपदा प्रबंधन के लिए संसाधनों की भारी कमी है। गौरतलब है कि गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र हर वर्ष मानसून और ग्लेशियर पिघलने के कारण बाढ़ की चपेट में आता है, लेकिन इस बार रिकॉर्ड तापमान ने संकट को और गहरा कर दिया है।

आगे की चुनौतियाँ

राष्ट्रीय राजमार्गों की बहाली में अभी कई दिन और लग सकते हैं, जबकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बारिश की आशंका जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस क्षेत्र में GLOF की घटनाएँ आने वाले वर्षों में और अधिक बार और तीव्र रूप में हो सकती हैं। फँसे हुए पर्यटकों और निवासियों को निकालने के लिए हवाई मार्ग ही एकमात्र विकल्प बचा है, लेकिन खराब मौसम इसमें भी बाधा बन रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार रिकॉर्ड तापमान और GLOF का संयोग बताता है कि यह महज मौसमी आपदा नहीं — जलवायु परिवर्तन का सीधा असर है। चिंताजनक यह है कि चौथे दिन भी राहत की रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं, जो पाकिस्तान के आपदा प्रबंधन ढाँचे की पुरानी कमज़ोरियों को एक बार फिर उजागर करता है। काराकोरम हाईवे जैसी रणनीतिक धमनी का बार-बार टूटना यह भी दर्शाता है कि बुनियादी ढाँचे की जलवायु-अनुकूल मज़बूती अभी भी प्राथमिकता नहीं बन पाई है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गिलगित-बाल्टिस्तान में बाढ़ का मुख्य कारण क्या है?
गिलगित-बाल्टिस्तान आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के महानिदेशक अताउर रहमान काकर के अनुसार, 18 से 21 जुलाई के बीच रिकॉर्ड तापमान दर्ज होने से ग्लेशियर तेज़ी से पिघले और कई स्थानों पर ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) हुई। इसके साथ भारी बारिश ने फ्लैश फ्लड को और विनाशकारी बना दिया।
कौन-कौन से जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं?
दियामेर, अस्तोर, घिजर और नगर जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं। इनके अलावा हिस्पर घाटी, थोरे घाटी और खानबरी क्षेत्र में भी व्यापक तबाही की खबरें हैं।
काराकोरम हाईवे कब तक बहाल होने की उम्मीद है?
अभी तक प्रशासन की ओर से बहाली की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई है। राष्ट्रीय राजमार्गों को हुए व्यापक नुकसान और खराब मौसम की आशंका को देखते हुए बहाली में कई दिन और लग सकते हैं।
फँसे हुए लोगों तक राहत कैसे पहुँचाई जा रही है?
सड़क संपर्क टूटे होने के कारण हवाई मार्ग ही मुख्य विकल्प है, लेकिन खराब मौसम इसमें भी बाधा बन रहा है। स्थानीय निवासियों ने राहत कार्यों की धीमी गति पर प्रशासन के खिलाफ चिंता जताई है।
GLOF क्या होता है और यह क्षेत्र के लिए कितना खतरनाक है?
ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) तब होती है जब ग्लेशियर के पिघलने से बनी झील का बाँध अचानक टूट जाता है और बड़ी मात्रा में पानी एक साथ नीचे आ जाता है। गिलगित-बाल्टिस्तान में विश्व के सबसे अधिक ग्लेशियर हैं, इसलिए यह क्षेत्र GLOF के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है और जलवायु परिवर्तन के कारण यह खतरा बढ़ता जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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