अनाहत सिंह वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के क्वार्टर फाइनल में, डॉयस ये सैन को 3-0 से हराया
सारांश
मुख्य बातें
भारत की शीर्ष वरीयता प्राप्त स्क्वैश खिलाड़ी अनाहत सिंह ने 23 जुलाई 2026 को ओंटारियो में जारी वर्ल्ड स्क्वैश जूनियर व्यक्तिगत चैंपियनशिप के प्री-क्वार्टर फाइनल में मलेशिया की डॉयस ये सैन ली को सीधे गेम में हराकर अंतिम आठ में जगह पक्की कर ली। टूर्नामेंट की टॉप सीड अनाहत ने यह मुकाबला 11-4, 11-8 और 11-3 के स्कोर से अपने नाम किया।
मुख्य घटनाक्रम
अनाहत सिंह पिछले वर्ष इसी प्रतियोगिता में ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी हैं और इस बार वह और ऊँचे लक्ष्य के साथ मैदान में उतरी हैं। उनका अगला मुकाबला मिस्र की 5/8 सीड खिलाड़ी हबीबा रिजक से होगा, जिन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल में अमेरिका की शार्लेट जे को चार गेम में हराया।
महिला वर्ग के अन्य उल्लेखनीय नतीजों में बेल्जियम की सवाना मोक्सहैम ने पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए हांगकांग की एना क्वांग को 3-1 से हराया। मिस्र की मलिका एलकाराक्सी ने अमेरिका की दिया यादव को हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया।
पुरुष वर्ग में उलटफेर
पुरुष वर्ग में टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर भारत के आर्यवीर दीवान की हार के रूप में सामने आया। 5/8 सीड और मौजूदा एशियाई अंडर-19 चैंपियन आर्यवीर को अमेरिका के यासीन शलाबी ने 11-4, 11-1 और 11-5 के एकतरफा अंदाज़ में हराया। यह परिणाम आर्यवीर के लिए निराशाजनक रहा, क्योंकि उनसे गहरे दौर तक पहुँचने की उम्मीद थी।
पुरुष वर्ग के अन्य मुकाबलों में टॉप सीड मोहम्मद जकारिया ने पाकिस्तान के नौमान खान को हराया। फ्रांस के अमीर खालिद-जौसेलिन ने इंग्लैंड के रॉनी हिकलिंग को सीधे गेम में मात दी। सऊदी अरब के मोहम्मद अलनासफान ने इंग्लैंड के डायलन रॉबर्ट्स को पाँच गेम के रोमांचक मुकाबले में हराकर क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई।
टूर्नामेंट का कार्यक्रम
वर्ल्ड स्क्वैश जूनियर चैंपियनशिप 2026 में व्यक्तिगत मुकाबले 20 से 25 जुलाई तक खेले जा रहे हैं। इसके बाद 26 से 31 जुलाई तक पुरुष और महिला टीम प्रतियोगिताएँ आयोजित होंगी।
भारतीय टीम की उम्मीदें
भारतीय पुरुष टीम इस टूर्नामेंट में मज़बूत दावेदार के रूप में उतरी है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष काहिरा में टीम ने ब्रॉन्ज मेडल जीता था, जिससे भारत का 13 साल से चला आ रहा पदक का इंतज़ार समाप्त हुआ था। अनाहत के क्वार्टर फाइनल में पहुँचने के साथ भारत की पदक की उम्मीदें एक बार फिर जीवित हैं।