26 जुलाई 2026
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अनाहत सिंह बनीं भारत की पहली वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियन, मिस्र की दूसरी वरीयता को 3-0 से हराया

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अनाहत सिंह बनीं भारत की पहली वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियन, मिस्र की दूसरी वरीयता को 3-0 से हराया

सारांश

चार साल की निराशा, सेमीफाइनल और क्वार्टर फाइनल में बार-बार हार — और फिर जूनियर सर्किट के आखिरी साल में अनाहत सिंह ने वह कर दिखाया जो पहले किसी भारतीय ने नहीं किया। ओंटारियो में वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतकर वह भारत की पहली सिंगल्स विश्व जूनियर चैंपियन बन गई हैं।

मुख्य बातें

अनाहत सिंह ने 26 जुलाई 2026 को ओंटारियो में वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीती — भारत की पहली सिंगल्स वर्ल्ड जूनियर चैंपियन।
फाइनल में मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से हराया।
2005 में जोशना चिनप्पा के बाद वर्ल्ड जूनियर फाइनल में पहुँचने वाली पहली भारतीय।
पिछले सीज़न में सेमीफाइनल तक पहुँचकर ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी थीं; इस बार जूनियर सर्किट का अंतिम वर्ष था।
SRFI सेक्रेटरी-जनरल साइरस पोंचा ने इसे दिवंगत एन.
रामचंद्रन के सपने का साकार होना बताया।

भारत की अनाहत सिंह ने 26 जुलाई 2026 को ओंटारियो में वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप का खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। फाइनल में उन्होंने मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से पराजित किया और भारत को यह गौरव दिलाया। 2005 में जोशना चिनप्पा के बाद वर्ल्ड जूनियर फाइनल तक पहुँचने वाली पहली भारतीय बनने का श्रेय भी अनाहत को ही जाता है।

मुख्य घटनाक्रम

अनाहत ने पूरे टूर्नामेंट में लगातार जीत दर्ज करते हुए फाइनल तक का सफर तय किया। पिछले सीज़न में वह सेमीफाइनल तक पहुँचकर ब्रॉन्ज मेडल जीत चुकी थीं, लेकिन इस बार जूनियर सर्किट में अपने अंतिम वर्ष में उन्होंने शीर्ष खिताब अपने नाम किया। यह उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

अनाहत की प्रतिक्रिया

जीत के बाद अनाहत ने कहा, 'मुझे अभी भी ऐसा लग रहा है जैसे मैं सपना देख रही हूँ। पिछले चार वर्षों से मैं सेमीफाइनल और क्वार्टर फाइनल में हारती रही हूँ। जब भी किसी ने पूछा, तो मैंने हमेशा यही कहा कि यह टूर्नामेंट मेरे लिए किसी श्राप जैसा है और मैं इस इवेंट में कभी अच्छा नहीं खेल पाई।'

उन्होंने आगे कहा, 'यह मेरा जूनियर के तौर पर आखिरी साल है और यह इसे जीतने का मेरा एकमात्र मौका था। इसीलिए मैंने तय किया कि तनाव में नहीं रहूँगी — बस कोर्ट पर उतरी और अपने शॉट्स सही तरीके से खेले। मैं वर्ल्ड चैंपियनशिप फाइनल के हर पल का आनंद लेना चाहती थी।'

फेडरेशन की प्रतिक्रिया

स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SRFI) के सेक्रेटरी-जनरल साइरस पोंचा ने इस जीत को भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक पल करार दिया। उन्होंने कहा, 'अनाहत में बड़ी ऊंचाइयाँ हासिल करने की क्षमता है।'

पोंचा ने यह भी कहा कि SRFI के संरक्षक और इंडियन स्क्वैश एकेडमी के दूरदर्शी दिवंगत एन. रामचंद्रन का सपना था कि भारत व्यक्तिगत इवेंट्स में वर्ल्ड चैंपियन तैयार करे। 'हमने डबल्स में यह हासिल किया था, लेकिन सिंगल्स में भी वैसी ही सफलता दोहराना वाकई एक सपने के सच होने जैसा है,' उन्होंने कहा।

ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि भारत में स्क्वैश की विरासत मज़बूत रही है — जोशना चिनप्पा और दीपिका पल्लीकल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है। लेकिन वर्ल्ड जूनियर सिंगल्स खिताब पहली बार किसी भारतीय के नाम हुआ है, जो इस खेल में भारत की नई पीढ़ी की ताकत को दर्शाता है। यह जीत ऐसे समय में आई है जब भारत ओलंपिक और एशियाई खेलों में स्क्वैश में पदक की दावेदारी मज़बूत करने की दिशा में काम कर रहा है।

आगे की राह

जूनियर सर्किट से बाहर होने के बाद अनाहत अब सीनियर प्रोफेशनल सर्किट पर ध्यान केंद्रित करेंगी। इस खिताब के साथ उनकी विश्व रैंकिंग और प्रायोजन संभावनाओं में उल्लेखनीय सुधार की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारतीय स्क्वैश की उस पीढ़ी का उदय है जो जोशना और दीपिका की विरासत को आगे ले जाने के लिए तैयार है। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या SRFI और खेल मंत्रालय इस प्रतिभा को सीनियर सर्किट में भी उसी गति से पोषित कर पाएंगे — क्योंकि जूनियर खिताब से सीनियर शिखर तक की राह में भारतीय खेल ढाँचा अक्सर चूकता रहा है। अनाहत के पास क्षमता है; अब परीक्षा संस्थागत समर्थन की है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनाहत सिंह कौन हैं और उन्होंने क्या हासिल किया?
अनाहत सिंह एक भारतीय स्क्वैश खिलाड़ी हैं जिन्होंने 26 जुलाई 2026 को ओंटारियो में वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीती। वह यह खिताब जीतने वाली भारत की पहली सिंगल्स वर्ल्ड जूनियर चैंपियन बन गई हैं।
अनाहत सिंह ने फाइनल में किसे और कैसे हराया?
अनाहत सिंह ने फाइनल में मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 के स्कोर से सीधे तीन गेमों में हराया।
इससे पहले वर्ल्ड जूनियर फाइनल में कौन-सी भारतीय खिलाड़ी पहुँची थीं?
2005 में जोशना चिनप्पा वर्ल्ड जूनियर फाइनल में पहुँचने वाली आखिरी भारतीय थीं। अनाहत सिंह 21 साल बाद यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय बनीं।
अनाहत सिंह के लिए यह खिताब इतना खास क्यों था?
यह जूनियर सर्किट में अनाहत का आखिरी साल था, इसलिए यह उनके लिए खिताब जीतने का एकमात्र और अंतिम मौका था। पिछले चार वर्षों में वह इस टूर्नामेंट में क्वार्टर फाइनल और सेमीफाइनल में हार चुकी थीं।
SRFI ने इस जीत पर क्या कहा?
स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी-जनरल साइरस पोंचा ने इसे भारतीय स्क्वैश के लिए ऐतिहासिक पल बताया और कहा कि यह दिवंगत एन. रामचंद्रन के उस सपने का साकार होना है जिसमें वे भारत को व्यक्तिगत इवेंट में वर्ल्ड चैंपियन देखना चाहते थे।
राष्ट्र प्रेस
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