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वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियन अनाहत सिंह की नजर LA ओलंपिक 2028 पर, बोलीं — 'ओलंपिक एक बोनस है'

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वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियन अनाहत सिंह की नजर LA ओलंपिक 2028 पर, बोलीं — 'ओलंपिक एक बोनस है'

सारांश

टोरंटो में मिस्र के दबदबे को तोड़ते हुए अनाहत सिंह भारत की पहली वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियन बनीं। अब 18 वर्षीया इस खिलाड़ी की नजर एशियन गेम्स के जरिए LA ओलंपिक 2028 के लिए क्वालीफाई करने पर है — और उनके लिए 'ओलंपिक एक बोनस है।'

मुख्य बातें

अनाहत सिंह वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं।
उन्होंने फाइनल में मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को सीधे गेम में हराया।
इस जीत ने 2005 में जोशना चिनप्पा के रनर-अप रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा।
अनाहत का लक्ष्य एशियन गेम्स में गोल्ड जीतकर LA ओलंपिक 2028 के लिए सीधे क्वालीफाई करना है।
उनकी कोचिंग टीम में पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 ग्रेगरी गॉल्टियर और सौरव घोषाल शामिल हैं।

टोरंटो में इतिहास रचने के बाद अनाहत सिंह ने अपना अगला बड़ा लक्ष्य तय कर लिया है — लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 में भारत के लिए पदक। 18 वर्षीया दिल्ली की इस खिलाड़ी ने वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतकर भारतीय स्क्वैश में एक नया अध्याय लिखा है और अब ओलंपिक मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना संजो रही हैं।

ऐतिहासिक खिताब और मिस्र के दबदबे का अंत

अनाहत ने टोरंटो में खेली गई वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप के फाइनल में मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को सीधे गेम में पराजित कर यह खिताब जीता। इस जीत के साथ वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गईं और उन्होंने 2005 में जोशना चिनप्पा के रनर-अप रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। उल्लेखनीय यह भी है कि अनाहत ने फाइनल से पहले लगातार तीन मिस्री खिलाड़ियों को हराकर इस टूर्नामेंट पर मिस्र के वर्षों पुराने वर्चस्व को तोड़ा।

ओलंपिक पर नजरें, एशियन गेम्स होगा पहला पड़ाव

स्क्वैश के लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक में शामिल होने को अनाहत ने खिलाड़ियों के लिए अप्रत्याशित अवसर बताया। उन्होंने कहा, 'हर स्क्वैश खिलाड़ी इस बात से बहुत खुश है कि स्क्वैश ओलंपिक का हिस्सा बन गया है। किसी ने कभी नहीं सोचा था कि हमें यह मौका मिलेगा।' ओलंपिक क्वालीफिकेशन के लिए उनकी प्राथमिक योजना एशियन गेम्स के जरिए गोल्ड मेडल जीतकर सीधे क्वालीफाई करने की है, हालांकि उन्होंने कहा कि अन्य रास्ते भी उपलब्ध हैं।

स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के माध्यम से हुई बातचीत में अनाहत ने कहा, 'ओलंपिक एक बोनस की तरह है, लेकिन मेरी सोच वही रहेगी। मैं बस यह पक्का करना चाहती हूं कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करूं।'

मानसिक मजबूती और परिवार का सहारा

अनाहत ने स्वीकार किया कि इतनी कम उम्र में उम्मीदों का बोझ उठाना हमेशा सहज नहीं होता। उन्होंने जमीन से जुड़े रहने का श्रेय अपने माता-पिता को दिया। उनके अनुसार, 'मेरे माता-पिता ने हमेशा मुझे सिखाया है कि दूसरों की उम्मीदों के बारे में ज्यादा सोचने की जरूरत नहीं है। मैं बस अपनी ट्रेनिंग और अपने खेल पर ध्यान देती हूं।' यह उनका आखिरी वर्ल्ड जूनियर्स था, और इस तथ्य ने उन्हें अपना सब कुछ झोंक देने के लिए प्रेरित किया।

पिछले दो संस्करणों में बढ़त बनाने के बावजूद हार का सामना कर चुकी अनाहत ने कहा, 'मैंने दबाव को बेहतर ढंग से संभालना सीखा है। मुझे खुशी है कि इस बार मैंने वही गलती नहीं दोहराई।'

PSA सर्किट का अनुभव बना हथियार

अनाहत का मानना है कि PSA टूर पर विश्व के शीर्ष खिलाड़ियों के विरुद्ध लगातार खेलने के अनुभव ने उन्हें जूनियर वर्ल्ड खिताब के लिए तैयार किया। उन्होंने कहा, 'पिछले एक साल में टॉप-10 और टॉप-20 खिलाड़ियों के विरुद्ध खेलने से मुझे यह समझने में मदद मिली कि मुझे कितना सुधार करना है। उन मैचों की यादें मुझे दबाव में भी सर्वश्रेष्ठ खेल खेलने का आत्मविश्वास देती हैं।'

कोचिंग टीम और आगे की राह

अनाहत के सफर में पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 ग्रेगरी गॉल्टियर और भारतीय स्क्वैश दिग्गज सौरव घोषाल का मार्गदर्शन रहा है। उन्होंने कहा, 'कनाडा में सौरव के होने से बहुत फर्क पड़ा। ग्रेग और सौरव ने मेरी निरंतरता पर बहुत काम किया है और यह सुनिश्चित किया है कि मैं मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत रहूं।' अब एशियन गेम्स की तैयारी के साथ अनाहत का अगला बड़ा अध्याय शुरू होने को है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ एक 18 वर्षीया भारतीय खिलाड़ी का तीन मिस्री खिलाड़ियों को हराकर खिताब जीतना असाधारण है। लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है: PSA सर्किट पर सीनियर स्तर की प्रतिस्पर्धा और ओलंपिक क्वालीफिकेशन का दबाव जूनियर सफलता से कहीं अधिक माँग करता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि SAI और भारतीय स्क्वैश फेडरेशन इस प्रतिभा को सही संसाधन और प्रतिस्पर्धी एक्सपोजर देने में कितने सक्षम हैं।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनाहत सिंह ने वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप कैसे जीती?
अनाहत सिंह ने टोरंटो में खेले गए फाइनल में मिस्र की दूसरी वरीयता प्राप्त खिलाड़ी रुकैया सलेम को सीधे गेम में हराकर यह खिताब जीता। वह यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं और उन्होंने 2005 में जोशना चिनप्पा के रनर-अप रहने के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया।
अनाहत सिंह LA ओलंपिक 2028 के लिए कैसे क्वालीफाई करेंगी?
अनाहत की प्राथमिक योजना एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई करने की है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि एशियन गेम्स में यह संभव न हो, तो अन्य क्वालीफिकेशन रास्ते भी उपलब्ध हैं।
अनाहत सिंह की कोचिंग टीम में कौन शामिल हैं?
अनाहत सिंह पिछले लगभग दो वर्षों से पूर्व वर्ल्ड नंबर 1 ग्रेगरी गॉल्टियर और भारतीय स्क्वैश दिग्गज सौरव घोषाल के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण ले रही हैं। उनके अनुसार, इन दोनों कोचों ने उनकी निरंतरता और मानसिक-शारीरिक मजबूती पर विशेष ध्यान दिया है।
वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश में भारत का इतिहास क्या रहा है?
इससे पहले 2005 में जोशना चिनप्पा वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप में रनर-अप रही थीं, जो किसी भारतीय का इस टूर्नामेंट में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। अनाहत सिंह ने 2026 में खिताब जीतकर उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए भारत के लिए पहली बार यह चैंपियनशिप जीती।
अनाहत सिंह ने दबाव को कैसे संभाला?
अनाहत ने बताया कि पिछले दो वर्ल्ड जूनियर्स में बढ़त बनाने के बावजूद हार के अनुभवों ने उनकी जीत की मानसिकता को मजबूत किया। उन्होंने माता-पिता की सीख — दूसरों की उम्मीदों की बजाय अपने खेल पर ध्यान देना — और PSA सर्किट पर शीर्ष खिलाड़ियों के विरुद्ध खेलने के अनुभव को अपनी मानसिक मजबूती का आधार बताया।
राष्ट्र प्रेस
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