1 अक्टूबर 2026
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पुणे: भिगवण में 66 महिलाओं से ₹5.69 लाख गबन के आरोपी वसूली अधिकारी को जमानत

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पुणे: भिगवण में 66 महिलाओं से ₹5.69 लाख गबन के आरोपी वसूली अधिकारी को जमानत

सारांश

पुणे के भिगवण में महिला बचत समूहों की 66 सदस्याओं से ₹5.69 लाख वसूल कर संस्था में जमा न करने के आरोपी वसूली अधिकारी सुरेंद्र घोलप को इंदापुर न्यायालय ने 29 सितंबर 2026 को ₹50 हजार के पीआर बॉन्ड पर जमानत दी। मामले में 68 गवाह हैं और आरोपी के पास से कोई बरामदगी नहीं हुई।

मुख्य बातें

आरोपी सुरेंद्र चंद्रकांत घोलप को 29 सितंबर 2026 को इंदापुर न्यायालय से जमानत मिली।
आरोप है कि 14 मई से 30 अक्टूबर 2025 के बीच 66 महिलाओं से ₹5 लाख 69 हजार 508 रुपये वसूले गए, लेकिन संस्था में जमा नहीं कराए गए।
आरोपी को 18 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था; आरोपत्र पहले ही दाखिल हो चुका है।
मामले में 68 गवाह हैं; आरोपी के पास से कोई बरामदगी नहीं हुई।
जमानत की शर्त — ₹50 हजार का पीआर बॉन्ड, एक जमानतदार, और सुनवाई तारीखों पर उपस्थिति अनिवार्य।
BNS की धारा 316(4) के तहत अधिकतम सात वर्ष की सजा का प्रावधान।

पुणे जिले के इंदापुर तालुका के भिगवण में महिला बचत समूहों की 66 सदस्याओं से कर्ज की किस्तों के नाम पर कथित तौर पर ₹5 लाख 69 हजार 508 रुपये वसूल कर संस्था में जमा न करने के मामले में आरोपी वसूली अधिकारी सुरेंद्र चंद्रकांत घोलप को इंदापुर न्यायालय ने 29 सितंबर 2026 को जमानत दे दी है। न्यायालय ने ₹50 हजार के पर्सनल रिकग्निजेंस (पीआर) बॉन्ड और एक जमानतदार की शर्त पर यह राहत मंजूर की।

मामले की पृष्ठभूमि

सी कॉमर्स मार्केट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड की भिगवण शाखा के प्रबंधक सोमनाथ भोंडवे की शिकायत पर भिगवण पुलिस स्टेशन में यह मामला दर्ज हुआ था। आरोप है कि 14 मई 2025 को वसूली अधिकारी के पद पर नियुक्त सुरेंद्र घोलप को महिला कर्जदारों से मूलधन और ब्याज की किस्तें एकत्र कर संस्था के खाते में जमा करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी।

शिकायत के अनुसार, 14 मई से 30 अक्टूबर 2025 के बीच आरोपी ने नकद और ऑनलाइन माध्यम से 66 महिलाओं से कुल ₹5 लाख 69 हजार 508 रुपये वसूले, लेकिन वह रकम संस्था में जमा नहीं कराई गई। इस मामले में सुरेंद्र घोलप को 18 जून 2026 को गिरफ्तार किया गया था।

बचाव पक्ष की दलीलें

जमानत याचिका की सुनवाई में आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपत्र भी न्यायालय में दाखिल किया जा चुका है। बचाव पक्ष ने एफआईआर दर्ज करने में करीब आठ महीने की देरी का मुद्दा भी न्यायालय के समक्ष प्रमुखता से उठाया।

न्यायालय के अवलोकन

इंदापुर न्यायालय ने सुनवाई के दौरान इस तथ्य पर विशेष ध्यान दिया कि आरोपी के पास से आरोपित रकम की कोई बरामदगी नहीं हुई है। इसके अलावा मामले में 68 गवाह होने के कारण न्यायालय ने माना कि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में काफी समय लगने की संभावना है। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए जमानत मंजूर की गई।

लागू धारा और शर्तें

इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(4) लगाई गई है, जिसके तहत सात वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। न्यायालय ने जमानत देते हुए आरोपी को सख्त निर्देश दिए हैं कि वह साक्ष्यों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करेगा, गवाहों पर किसी तरह का दबाव नहीं डालेगा और सुनवाई की प्रत्येक तारीख पर न्यायालय में नियमित रूप से उपस्थित रहेगा।

आगे क्या होगा

मामले में 68 गवाहों की गवाही होनी है, जिससे मुकदमे की प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है। यह मामला ग्रामीण क्षेत्रों में महिला स्वयं सहायता समूहों की कर्ज-वसूली प्रणाली की कमज़ोरियों को उजागर करता है, जहाँ नकद लेन-देन पर निगरानी अपेक्षाकृत कम होती है। गौरतलब है कि ऑनलाइन और नकद दोनों माध्यमों से वसूली के बावजूद रकम के गायब होने का यह मामला संस्थागत जवाबदेही के सवाल खड़े करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे भिगवण महिला बचत समूह गबन मामला क्या है?
यह मामला पुणे जिले के इंदापुर तालुका के भिगवण में सी कॉमर्स मार्केट सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड के वसूली अधिकारी सुरेंद्र चंद्रकांत घोलप के खिलाफ है। आरोप है कि उन्होंने 66 महिलाओं से ₹5 लाख 69 हजार 508 रुपये वसूल किए लेकिन वह रकम संस्था में जमा नहीं कराई।
आरोपी सुरेंद्र घोलप को जमानत क्यों मिली?
इंदापुर न्यायालय ने पाया कि जांच पूरी हो चुकी है, आरोपत्र दाखिल हो चुका है और आरोपी के पास से कोई बरामदगी नहीं हुई। इसके अलावा 68 गवाहों की गवाही के कारण मुकदमा लंबा चलने की संभावना है, जिसे देखते हुए 29 सितंबर 2026 को ₹50 हजार के पीआर बॉन्ड पर जमानत मंजूर की गई।
इस मामले में कौन-सी कानूनी धारा लगाई गई है?
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(4) लगाई गई है, जिसके तहत अधिकतम सात वर्ष के कारावास का प्रावधान है।
पीड़ित 66 महिलाओं पर इस मामले का क्या असर है?
इन 66 महिलाओं ने अपने कर्ज की किस्तें चुकाई थीं, लेकिन वह रकम संस्था के खाते में नहीं पहुंची, जिससे उनके ऋण खातों की स्थिति अनिश्चित बनी। मुकदमे की लंबी प्रक्रिया के दौरान उन्हें न्यायालय में गवाह के रूप में उपस्थित होना पड़ सकता है।
मामले में आगे क्या होगा?
आरोपी को जमानत मिल चुकी है लेकिन मुकदमा जारी रहेगा। 68 गवाहों की गवाही होनी है, इसलिए सुनवाई में काफी समय लग सकता है। न्यायालय ने आरोपी को साक्ष्यों से छेड़छाड़ न करने और गवाहों पर दबाव न डालने का सख्त निर्देश दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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