1 अक्टूबर 2026
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साबरकांठा में कपास के खेत में छुपी थी ₹1.72 करोड़ की गांजा फसल, 967 पौधे जब्त

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साबरकांठा में कपास के खेत में छुपी थी ₹1.72 करोड़ की गांजा फसल, 967 पौधे जब्त

सारांश

कपास की फसल की आड़ में राजस्थान बॉर्डर के पास गांजे की खेती — साबरकांठा एलसीबी ने 967 पौधे और ₹1.72 करोड़ की खेप जब्त की। एक आरोपी गिरफ्तार, दो फरार। पहाड़ी और दुर्गम इलाके में इंटेलिजेंस-आधारित कार्रवाई का बड़ा उदाहरण।

मुख्य बातें

साबरकांठा एलसीबी ने 1 अक्टूबर 2026 को कोटडा गढ़ी गांव में 967 गांजे के पौधे जब्त किए।
जब्त फसल का वजन 345.6 किलोग्राम और अनुमानित कीमत ₹1,72,80,000 आंकी गई।
कपास की फसल के बीच गांजे की खेती की जा रही थी — जाँच में मिट्टी के तीन सैंपल और तीन कंट्रोल सैंपल लिए गए।
25 वर्षीय रायचंदभाई रामाभाई गमर गिरफ्तार; जागा रामाभाई गमर और रवा पुनाभाई गमर अभी फरार।
NDPS अधिनियम, 1985 की धारा 8(सी), 20(ए)(1), 20(बी)(2-सी) और 29 के तहत मामला दर्ज।
ऑपरेशन 'ड्रग-फ्री साबरकांठा' मिशन के तहत चलाया गया।

गुजरात के साबरकांठा जिले में लोकल क्राइम ब्रांच (एलसीबी) ने 1 अक्टूबर 2026 को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए कोटडा गढ़ी गांव के खेतों से 967 गांजे के पौधे जब्त किए, जिनका कुल वजन 345.6 किलोग्राम और अनुमानित बाज़ार मूल्य ₹1,72,80,000 बताया गया है। पुलिस के अनुसार इन पौधों की खेती कपास की फसल की आड़ में की जा रही थी, ताकि गश्त दल की नज़र से बचा जा सके।

मुख्य घटनाक्रम

खेरोज पुलिस स्टेशन क्षेत्र में नियमित गश्त के दौरान एलसीबी को मुखबिर से सूचना मिली कि पोशी तालुका के कोटडा गढ़ी गांव के मगरा फलिया इलाके में एक परिवार के सदस्य अपने खेतों में गांजे की खेती कर रहे हैं। इस सूचना पर तत्काल कार्रवाई करते हुए टीम ने छापेमारी की और मौके पर कपास की फसल के बीच उगाए गए गांजे के पौधे बरामद किए।

ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने तीन मिट्टी के सैंपल और तीन कंट्रोल सैंपल भी एकत्रित किए, जिन्हें फोरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया है। यह कार्रवाई 'से नो टू ड्रग्स' और 'ड्रग-फ्री साबरकांठा' मिशन के तहत की गई, जिसका उद्देश्य जिले में नशीले पदार्थों के उत्पादन, अवैध परिवहन, खरीद और बिक्री पर रोक लगाना है।

आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी

पुलिस ने खेतों के मालिकों और कब्जेदारों के रूप में रायचंदभाई रामाभाई गमर, जागा रामाभाई गमर और रवा पुनाभाई गमर की पहचान की — ये तीनों कोटडा गढ़ी गांव के निवासी हैं। 25 वर्षीय रायचंदभाई रामाभाई गमर को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि जागा रामाभाई गमर और रवा पुनाभाई गमर अभी भी फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

पुलिस ने खेरोज पुलिस स्टेशन में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम, 1985 की धाराओं 8(सी), 20(ए)(1), 20(बी)(2-सी) और 29 के तहत मामला दर्ज किया है।

भौगोलिक चुनौतियाँ और जाँच पद्धति

साबरकांठा पुलिस ने स्वीकार किया कि राजस्थान सीमा से लगे दूरदराज के पहाड़ी इलाकों में अवैध खेती का पता लगाना बेहद कठिन काम है। खेत मुख्य सड़कों से काफी दूर हैं, आबादी भी कम है और भौगोलिक परिस्थितियाँ जटिल हैं। एलसीबी के अनुसार, टीम ने ह्यूमन इंटेलिजेंस, तकनीकी निगरानी और जमीनी जाँच के संयुक्त प्रयोग से इस खेती की पहचान की।

गौरतलब है कि गुजरात-राजस्थान सीमावर्ती इलाके में नशीले पदार्थों की खेती और तस्करी की घटनाएँ समय-समय पर सामने आती रही हैं। यह ऑपरेशन जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर चलाया गया था।

आगे क्या होगा

अधिकारियों के अनुसार मामले की जाँच और कानूनी कार्रवाई अभी जारी है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ यह भी जाँचा जा रहा है कि इस नेटवर्क से कहीं और भी अवैध खेती या तस्करी से कोई संबंध तो नहीं था। पुलिस ने संकेत दिया है कि जिले में ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साबरकांठा में जब्त गांजे की फसल कितनी बड़ी थी?
पुलिस ने कुल 967 गांजे के पौधे जब्त किए, जिनका वजन 345.6 किलोग्राम और अनुमानित बाज़ार मूल्य ₹1,72,80,000 बताया गया। ये पौधे कोटडा गढ़ी गांव के खेतों में कपास की फसल के बीच उगाए जा रहे थे।
इस मामले में कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
अब तक 25 वर्षीय रायचंदभाई रामाभाई गमर को गिरफ्तार किया गया है। जागा रामाभाई गमर और रवा पुनाभाई गमर अभी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
पुलिस ने किन कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया?
खेरोज पुलिस स्टेशन में NDPS अधिनियम, 1985 की धाराओं 8(सी), 20(ए)(1), 20(बी)(2-सी) और 29 के तहत मामला दर्ज किया गया है। जाँच और कानूनी कार्रवाई अभी जारी है।
कपास की फसल के बीच गांजे की खेती क्यों की जा रही थी?
कथित तौर पर कपास की लंबी और घनी फसल को छद्म आवरण के रूप में इस्तेमाल किया गया, ताकि गश्त दलों और हवाई निगरानी से गांजे के पौधे छुपाए जा सकें। पुलिस के अनुसार राजस्थान सीमा से लगे पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में ऐसी खेती का पता लगाना भौगोलिक और लॉजिस्टिकल दृष्टि से बेहद कठिन है।
'ड्रग-फ्री साबरकांठा' मिशन क्या है?
यह साबरकांठा पुलिस का एक अभियान है जिसका उद्देश्य जिले में नशीले पदार्थों के उत्पादन, अवैध परिवहन, खरीद और बिक्री पर रोक लगाना है। इसी मिशन के तहत एलसीबी ने ह्यूमन इंटेलिजेंस, तकनीकी निगरानी और जमीनी जाँच के संयोजन से यह कार्रवाई की।
राष्ट्र प्रेस
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