दक्षिण त्रिपुरा: जमीन में दफन मिला 210.5 किलो गांजा, बारी पुलिस ने अमल दास के घर छापा मारा
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण त्रिपुरा के बेलोनिया सब-डिविजन में 17 जून को पुलिस ने एक बड़े नशा-तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए 210.5 किलोग्राम सूखा गांजा बरामद किया, जिसे एक नवनिर्मित मकान की जमीन के नीचे छिपाकर रखा गया था। बारी पुलिस स्टेशन की टीम ने यह कार्रवाई वेस्ट पिपरियाखोला, साधुपारा निवासी अमल दास (52) के घर पर की, जहाँ से एक मोटरसाइकिल भी जब्त की गई।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, मंगलवार दोपहर 2:10 बजे से शाम 4:00 बजे के बीच चलाए गए तलाशी अभियान में जब नए बने मकान की जमीन खोदी गई, तो वहाँ 6 प्लास्टिक ड्रम और 5 प्लास्टिक बोरियाँ दबी हुई मिलीं। इन सभी में कुल 210.5 किलोग्राम सूखा गांजा भरा था।
पुलिस की मौजूदगी की भनक लगते ही घर का मालिक अमल दास और उसका बेटा मौके से फरार हो गए। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
पृष्ठभूमि और क्षेत्रीय संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वोत्तर भारत में गांजा तस्करी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। गौरतलब है कि 9 जून को उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में क्राइम ब्रांच और वेस्ट जोन पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में मुखबिर की सूचना पर एक ट्रक रोककर लगभग छह क्विंटल गांजा जब्त किया गया था, जिसकी ब्लैक मार्केट कीमत लगभग ₹10 करोड़ आँकी गई थी। अधिकारियों का मानना था कि वह खेप कई जिलों में फैले एक बड़े वितरण नेटवर्क का हिस्सा थी।
इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के संयुक्त अभियान में 406.8 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया और तस्करी में संलिप्त चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
तस्करों की रणनीति
दक्षिण त्रिपुरा में इस मामले की खास बात यह है कि आरोपी ने नशीले पदार्थ को जमीन के अंदर दफनाकर छिपाने की असामान्य तकनीक अपनाई, जो सामान्य तलाशी में आसानी से नहीं पकड़ में आती। यह तरीका दर्शाता है कि तस्करी नेटवर्क लगातार अपने तौर-तरीके बदल रहे हैं।
आगे की कार्रवाई
पुलिस ने जब्त गांजे और मोटरसाइकिल को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित कर लिया है। फरार अमल दास और उसके बेटे की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। जाँच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह गांजा किस स्रोत से आया और इसका वितरण नेटवर्क कहाँ तक फैला है।