उदयपुर में 'ऑपरेशन शंकर': NCB और ANTF ने 7,577 गांजे के पौधे नष्ट किए, ₹11.76 करोड़ की अवैध फसल जब्त
सारांश
मुख्य बातें
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) जोधपुर, एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) राजस्थान और राजस्थान पुलिस की संयुक्त टीमों ने 7 अक्टूबर 2026 को 'ऑपरेशन शंकर' के तहत उदयपुर ज़िले की कोटरा तहसील के नयावास गाँव में बड़े पैमाने पर अवैध गांजे की खेती का भंडाफोड़ किया। अधिकारियों ने 9.4 बीघा भूमि पर फैले 7,577 गांजे के पौधों को नष्ट किया, जिनसे अनुमानतः 2,273 किलोग्राम गांजा प्राप्त हो सकता था।
अभियान का विवरण और बरामदगी
तीनों एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में कोटरा तहसील के नयावास गाँव को निशाने पर लिया गया, जहाँ दूरदराज़ की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर अवैध खेती की जा रही थी। अधिकारियों के अनुसार, नष्ट की गई फसल का बाज़ार मूल्य लगभग ₹11.76 करोड़ आँका गया है। NCB जोधपुर ने इस मामले में अपराध संख्या 07/2026 दर्ज की है और जाँच जारी है।
गौरतलब है कि राजस्थान के आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों में अवैध नशीली फसलों की खेती दशकों से एक गंभीर समस्या रही है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राज्य सरकार ने निगरानी तंत्र को कड़ा करने के नए निर्देश जारी किए हैं।
राष्ट्रीय विज़न दस्तावेज़ और नीतिगत ढाँचा
यह अभियान मादक पदार्थ नियंत्रण राष्ट्रीय विज़न दस्तावेज़ के अनुरूप संचालित किया गया, जिसका लक्ष्य दिसंबर 2027 तक चिन्हित क्षेत्रों में अवैध भांग और अफीम की खेती को पूरी तरह समाप्त करना है। इस दस्तावेज़ में केंद्रीय और राज्य एजेंसियों, ज़िला प्रशासनों और स्थानीय समुदायों की साझेदारी को अनिवार्य बताया गया है।
NCB के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, राजस्थान ने अवैध खेती पर अपनी कार्रवाई को और कड़ा किया है — निगरानी बढ़ाकर, राजस्व अधिकारियों पर सख्त रिपोर्टिंग दायित्व लागू करके और संवेदनशील इलाकों में प्रवर्तन अभियान तेज़ करके।
राजस्व अमले पर नई जवाबदेही
नए निर्देशों के तहत पटवारियों को गिरदावरी के दौरान नियमित रूप से अपने क्षेत्र का निरीक्षण करना होगा और किसी भी संदिग्ध खेती की सूचना तत्काल संबंधित गिरदावर और तहसीलदार को देनी होगी। गिरदावरों को मौके पर जाकर सत्यापन करना होगा और भूमि अभिलेख, भूस्वामी की पहचान, खेती का प्रकार और दायरा, संलिप्त व्यक्तियों का विवरण तथा पूर्व में की गई कार्रवाई का ब्योरा देते हुए विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
राज्य सरकार ने इन रिपोर्टों को पता चलने के 48 घंटों के भीतर ANTF और NCB को भेजना अनिवार्य कर दिया है। अधिकारियों को स्पष्ट किया गया है कि रिपोर्टिंग में किसी भी विफलता या देरी को गंभीर लापरवाही माना जाएगा, जिसके परिणामस्वरूप अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
प्रशासनिक निगरानी और आगे की राह
ज़िला कलेक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वे इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और नियमित निगरानी तंत्र बनाए रखें। आलोचकों का कहना है कि जब तक अवैध खेती करने वाले किसानों को वैकल्पिक आजीविका नहीं दी जाती, तब तक केवल विनाशकारी अभियान दीर्घकालिक समाधान नहीं दे सकते।
राज्य में आने वाले महीनों में इसी तरह के और अभियान अपेक्षित हैं, क्योंकि सरकार दिसंबर 2027 की समय-सीमा पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध है।