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क्या त्रिपुरा में सुरक्षा बलों ने 108 करोड़ रुपए के गांजे के पौधे नष्ट किए?

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क्या त्रिपुरा में सुरक्षा बलों ने 108 करोड़ रुपए के गांजे के पौधे नष्ट किए?

सारांश

त्रिपुरा में सुरक्षा बलों ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाते हुए 23 लाख गांजे के पौधे नष्ट किए। यह ऑपरेशन राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में चलाए गए थे, जिससे स्थानीय खेती और तस्करी की जड़ों पर प्रहार किया गया।

मुख्य बातें

सुरक्षा बलों ने 23 लाख गांजे के पौधे नष्ट किए।
ऑपरेशन में 108 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
तस्करी और अवैध खेती के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
स्थानीय लोगों की आजीविका पर प्रभाव पड़ सकता है।
कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

अगरतला, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा में सुरक्षा बलों ने रविवार को दो अलग-अलग ऑपरेशन में, सेपाहिजाला जिले में लगभग 108 करोड़ रुपए के 23 लाख से ज्यादा गांजे के पौधे नष्ट किए हैं।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि त्रिपुरा पुलिस, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल, वन विभाग और उत्पाद शुल्क विभाग के जवानों ने दो अलग-अलग ऑपरेशन के दौरान सेपाहिजाला जिले की 414 एकड़ पहाड़ी जमीन पर फैले 23 लाख से ज्यादा गांजे के पौधे नष्ट किए हैं।

अधिकारी ने कहा, "नशीले पदार्थों के खिलाफ चल रहे अभियान में, पिछले तीन दिनों में सेपाहिजाला जिले के आनंदपुर और घाटिगढ़ जंगल क्षेत्रों में गांजे के पौधों को नष्ट किया गया।"

उन्होंने कहा कि इसी अवधि के दौरान, दक्षिण त्रिपुरा और खोवाई सहित अन्य जिलों में भी कई लाख गांजे के पौधे नष्ट किए गए।

27 दिसंबर को, उनाकोटी जिले के तहत, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स के जवानों ने माछमारा चाय बागान के पास कुली बस्ती जंगल क्षेत्र में एक विशेष ऑपरेशन किया और जमीन के आठ प्लॉट में फैले लगभग 15,000 से 17,000 गांजे के पौधे नष्ट कर दिए।

नशीले पदार्थों के खिलाफ ऑपरेशन का नेतृत्व जिला पुलिस अधीक्षक या अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक ने किया। अवैध खेती में शामिल कई लोगों को नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि त्रिपुरा में पैदा होने वाले सूखे गांजे का सेवन स्थानीय स्तर पर नहीं किया जाता है और इसे बिहार और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में तस्करी किया जाता है, जहां इसकी ज्यादा कीमत मिलती है।

परिवहन के दौरान, सूखे गांजे की खेप अक्सर ट्रकों और यात्री ट्रेनों से जब्त की जाती है। महिलाओं सहित निवासियों ने दावा किया कि वे अपनी आजीविका के हिस्से के रूप में पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में गांजे की खेती करते हैं।

पुलिस अधिकारी ने कहा कि कई मौकों पर यह पाया गया कि जंगल की जमीन और अन्य सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया गया था और गांजे की खेती के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि त्रिपुरा में नशीले पदार्थों की समस्या गंभीर होती जा रही है। सरकारी प्रयासों से न केवल इन पौधों को नष्ट किया गया है, बल्कि तस्करी को रोकने के लिए आवश्यक कदम भी उठाए जा रहे हैं। यह स्थिति सभी के लिए चिंता का विषय है और सही दिशा में उठाए गए कदम महत्वपूर्ण हैं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिपुरा में गांजे की खेती क्यों होती है?
त्रिपुरा में गांजे की खेती आमदनी का एक स्रोत मानी जाती है, खासकर पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में।
क्या गांजा केवल त्रिपुरा में पाया जाता है?
नहीं, गांजा अन्य राज्यों में भी पाया जाता है, लेकिन त्रिपुरा इसका एक प्रमुख उत्पादक है।
सुरक्षा बलों द्वारा गांजे के पौधे नष्ट करने से क्या असर होगा?
यह कदम न केवल तस्करी को रोकने में मदद करेगा, बल्कि स्थानीय खेती पर भी प्रभाव डालेगा।
गांजे की तस्करी का मुख्य रास्ता क्या है?
गांजे की तस्करी मुख्यतः बिहार और उत्तर प्रदेश की ओर होती है।
क्या पुलिस ने किसी को गिरफ्तार किया?
हाँ, कई लोगों को नशीले पदार्थों के खिलाफ कानूनों के तहत गिरफ्तार किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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