एनसीबी और ओडिशा एएनटीएफ का 'मिशन जीरो कैनाबिस': कंधमाल में 30 एकड़ अवैध गांजे की खेती नष्ट
सारांश
मुख्य बातें
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने 11 अक्टूबर 2026 को ओडिशा एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के 'मिशन जीरो कैनाबिस कल्टीवेशन' अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसके अंतर्गत कंधमाल और बौद्ध जिलों में अवैध गांजे की खेती के विरुद्ध व्यापक कार्रवाई शुरू की गई है। इस अभियान के पहले ही दिन, कंधमाल के काकेन्द्री गांव में करीब 30 एकड़ भूमि पर फैली अवैध गांजे की फसल को नष्ट किया गया।
अभियान का लक्ष्य और रूपरेखा
एनसीबी के बयान के अनुसार, यह मिशन नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट (2026-29) के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका प्राथमिक लक्ष्य मार्च 2027 तक कंधमाल और बौद्ध जिलों में अवैध गांजे की खेती को पूरी तरह समाप्त करना है। ये दोनों जिले ओडिशा में अवैध कैनाबिस उत्पादन के सर्वाधिक संवेदनशील क्षेत्र माने जाते हैं।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय विजन दस्तावेज़ का दीर्घकालिक उद्देश्य दिसंबर 2027 तक चिन्हित क्षेत्रों में अवैध भांग और अफीम की खेती को केंद्रीय एजेंसियों, राज्य प्रशासनों और स्थानीय समुदायों के समन्वित प्रयासों से समाप्त करना है।
समुदाय की भागीदारी और जागरूकता
अभियान की शुरुआत में जन-जागरूकता को भी महत्व दिया गया। सुद्रुकम्पा में पंचायत सदस्यों सहित 500 लोगों ने 'नशा मुक्त' की शपथ ली। इसके साथ ही फूलबानी में 500 कॉलेज छात्रों ने एक मिनी-मैराथन में भाग लेकर नशामुक्त भारत के संदेश को प्रसारित किया।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें मादक पदार्थों के विरुद्ध अभियान को महज प्रवर्तन तक सीमित न रखकर सामाजिक जागरूकता से जोड़ने पर ज़ोर दे रही हैं।
राजस्थान में 'ऑपरेशन शंकर': ₹11.76 करोड़ के गांजे के पौधे नष्ट
ओडिशा के समानांतर, एनसीबी जोधपुर, एएनटीएफ राजस्थान और राजस्थान पुलिस ने संयुक्त रूप से 'ऑपरेशन शंकर' चलाया। इस अभियान में उदयपुर जिले की कोटरा तहसील के नयावास गांव में 9.4 बीघा भूमि पर लगभग 7,577 गांजे के पौधे पकड़े जाकर नष्ट किए गए। अधिकारियों के अनुमान के अनुसार इन पौधों से करीब 2,273 किलोग्राम गांजा प्राप्त हो सकता था, जिसका बाज़ार मूल्य लगभग ₹11.76 करोड़ आंका गया है। एनसीबी जोधपुर ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और जांच जारी है।
राजस्थान में निगरानी तंत्र और सख्त
बयान के अनुसार, राजस्थान ने मादक फसलों पर निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए राजस्व अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ाई है। नए निर्देशों के तहत पटवारियों को गिरदावरी के दौरान अपने क्षेत्र का नियमित निरीक्षण करना होगा और किसी भी संदिग्ध नशीली फसल की सूचना तत्काल संबंधित गिरदावर और तहसीलदार को देनी होगी।
यह प्रशासनिक ढांचा इस बात का संकेत है कि अब जमीनी स्तर के अधिकारियों को भी इस मुहिम में सीधे उत्तरदायी बनाया जा रहा है — जो पिछले अभियानों से एक महत्वपूर्ण बदलाव है।
आगे की राह
केंद्रीय और राज्य स्तर पर इस समन्वित कार्रवाई से स्पष्ट है कि एनसीबी का दृष्टिकोण अब केवल जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि खेती के मूल स्रोत को नष्ट करने और समुदायों को नशे के विरुद्ध लामबंद करने पर केंद्रित है। मार्च 2027 की समयसीमा को देखते हुए अगले महीनों में कंधमाल और बौद्ध जिलों में और अधिक गहन अभियान चलाए जाने की संभावना है।