सूर्यकुमार यादव: 'टी20 विश्व कप 2026 जीतना यादगार, पर मेरा सर्वश्रेष्ठ अभी बाकी है'
सारांश
मुख्य बातें
सूर्यकुमार यादव ने भारत को टी20 विश्व कप 2026 में कप्तानी करते हुए ऐतिहासिक जीत दिलाई — लेकिन अभी वे टीम से बाहर हैं और फिटनेस व फॉर्म दोबारा हासिल करने में जुटे हैं। 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर उन्होंने नई दिल्ली में एक विशेष बातचीत में खुलकर अपनी भावनाएँ साझा कीं। सितंबर में 36 वर्ष के होने वाले सूर्यकुमार का कहना है कि उम्र कभी बाधा नहीं बनती — असली फर्क तैयारी और प्रक्रिया से पड़ता है।
विश्व कप जीत का वह अविस्मरणीय एहसास
सूर्यकुमार यादव ने कहा कि विश्व कप जीत की रात को शब्दों में बयान करना लगभग असंभव है। उनके अनुसार, 'जब आप विश्व कप उठाते हैं, तो यह सिर्फ आपकी यात्रा नहीं होती — यह हर उस कोच की याद दिलाता है जिसने आपको डांटा, हर उस दोस्त की याद दिलाता है जिसने किट बैग उठाने में मदद की, और हर उस परिवार के सदस्य की याद दिलाता है जिसने आपके लिए प्रार्थना की।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह उनके करियर का अब तक का सबसे अच्छा पल है, लेकिन वे चाहते हैं कि सर्वश्रेष्ठ अभी आना बाकी हो।
उम्र नहीं, तैयारी है असली पैमाना
घरेलू क्रिकेट में वर्षों बस और ट्रेन से सफर करने वाले सूर्यकुमार ने युवाओं को संदेश दिया कि वे खुद की तुलना दूसरों से न करें। उनका मानना है, 'भारत में ज्यादातर लोग सोचते हैं कि अगर आप 21 या 25 साल की उम्र तक सफल नहीं हुए, तो करियर खत्म हो गया — लेकिन उम्र कोई सीमा नहीं है, अहम आपकी तैयारी है।' यह बात ऐसे समय में और भी प्रासंगिक हो जाती है जब वे खुद 36 वर्ष की उम्र में टीम में वापसी की कोशिश में हैं।
क्रिकेटरों की जिम्मेदारी: दूसरे खेलों को भी बढ़ावा दें
भारत में क्रिकेट के वर्चस्व को स्वीकार करते हुए सूर्यकुमार ने कहा कि इस प्रभाव का इस्तेमाल दूसरे खेलों के लिए भी होना चाहिए। उनके अनुसार, सोशल मीडिया पर किसी दूसरे खेल के बारे में एक पोस्ट या इंस्टाग्राम स्टोरी भी उस खेल पर लाखों लोगों का ध्यान खींच सकती है। उन्होंने कहा, 'आखिर में, हम सब पहले टीम भारत हैं।'
ओलंपिक में क्रिकेट की वापसी: ऐतिहासिक अवसर
लॉस एंजेलेस 2028 ओलंपिक में 128 साल बाद क्रिकेट की वापसी को सूर्यकुमार ने 'ऐतिहासिक पल' बताया। उन्होंने कहा कि ओलंपिक मेडल जीतने का अनुभव एक अलग ही भावना होगी — जहाँ अलग-अलग खेलों के भारतीय एथलीटों के साथ पोडियम पर खड़े होने का मौका मिलेगा। एशियन गेम्स में दूसरे भारतीय एथलीटों के साथ गेम्स विलेज साझा करने का अनुभव उन्होंने 'निश्चित रूप से खास' बताया।
खेल का बदलता माहौल और सरकारी पहलें
सूर्यकुमार ने कहा कि जब उन्होंने क्रिकेट शुरू किया था, तब इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत कम था। आज खेलो इंडिया, फिट इंडिया और टॉप्स जैसी पहलों और नई अकादमियों की बदौलत छोटे शहरों के बच्चों को भी ग्राउंड, कोच और फंडिंग मिल रही है। उन्होंने कहा कि अब माता-पिता भी खेल को करियर के रूप में देखने लगे हैं — जो पहले नहीं होता था। गौरतलब है कि भारत की खेल नीति में यह बदलाव पिछले एक दशक में स्पष्ट रूप से दिखा है।
सूर्यकुमार यादव की यह बातचीत उस समय आई है जब वे टीम से बाहर हैं और 2028 ओलंपिक तथा 2028 टी20 विश्व कप जैसे बड़े लक्ष्यों की ओर नज़र टिकाए हुए हैं — यह संकेत है कि उनकी क्रिकेट यात्रा अभी खत्म नहीं हुई।