दिल्ली-एनसीआर में CNG ₹3.89 प्रति किलो महंगी, 96 रुपये के पार; मध्यम वर्ग और ड्राइवरों पर दोहरी मार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी (CNG) की कीमतों में ₹3.89 प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी के बाद 29 अगस्त, शनिवार को स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों ने गहरी चिंता जताई। बढ़ती महंगाई के बीच इस मूल्यवृद्धि को मध्यम वर्ग और टैक्सी-ऑटो चालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ के रूप में देखा जा रहा है।
कितनी बढ़ी कीमत और अब कहाँ पहुँची
नई दरों के लागू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर में CNG की कीमत बढ़कर ₹86.98 प्रति किलोग्राम के करीब पहुँच गई है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि जब उन्होंने अपनी कार खरीदी थी, तब CNG लगभग ₹56 प्रति किलोग्राम थी, जो अब ₹96 प्रति किलोग्राम तक जा पहुँची है — यानी लगभग पेट्रोल की कीमत के बराबर। गौरतलब है कि यह वृद्धि कुछ ही समय में दूसरी बार हुई है, और इससे पहले भी दाम बढ़ाए जा चुके हैं।
मध्यम वर्ग पर असर
निवासियों का कहना है कि CNG को पेट्रोल के किफायती विकल्प के रूप में अपनाया गया था, लेकिन अब यह अंतर तेज़ी से सिकुड़ रहा है। एक निवासी ने कहा, 'पहले हम CNG के लिए लगभग ₹16 प्रति किलो देते थे, और अब बढ़ोतरी के बाद यह ₹86.98 प्रति किलो हो जाएगा। यह मध्यम वर्ग के साथ अन्याय है।' एक सप्ताह पहले चीनी के दाम बढ़ने के बाद अब ईंधन की यह मार घरेलू बजट को और निचोड़ रही है।
टैक्सी और ऑटो चालकों पर दोहरी मार
CNG मूल्यवृद्धि का सबसे सीधा असर बाइक टैक्सी, रेडियो कैब और ऑटो रिक्शा चालकों पर पड़ रहा है। एक कैब चालक ने बताया कि वे सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक गाड़ी चलाकर रोज़ाना ₹1,000 से ₹1,500 तक कमा पाते हैं, लेकिन ईंधन की बढ़ती लागत इस कमाई को और घटा देगी। उन्होंने कहा कि किराया उसी अनुपात में नहीं बढ़ता जिस अनुपात में ईंधन महंगा होता है।
आपूर्ति श्रृंखला और उपभोक्ताओं पर व्यापक असर
निवासियों ने चेतावनी दी कि अगर CNG की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो माल और खाद्य पदार्थों की आपूर्ति करने वाले परिवहन तंत्र पर दबाव बढ़ेगा और अंततः उपभोक्ताओं के लिए रोज़मर्रा की वस्तुओं के दाम भी ऊपर जाएंगे। सार्वजनिक परिवहन से यात्रा करने वाले आम लोगों को भी अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है, जिससे निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों का बजट और तनाव में आएगा।
सरकार की नीति पर सवाल
कई निवासियों ने सरकार की ईंधन मूल्य नीति पर असंतोष जताया। एक निवासी ने कहा, 'सरकार जिस तरह से इस मामले को संभाल रही है, उससे हम खुश नहीं हैं।' बार-बार हो रही इस वृद्धि ने CNG को 'सस्ते ईंधन' की श्रेणी से बाहर धकेल दिया है और वाहन मालिकों के लिए खर्चों का प्रबंधन दिन-प्रतिदिन कठिन होता जा रहा है। यह देखना होगा कि क्या सरकार टैक्सी और ऑटो चालकों को राहत देने के लिए किराया संशोधन की अनुमति देती है।