दिल्ली में CNG ₹2 प्रति किलो महंगी, मध्य पूर्व तनाव से ईंधन कीमतों की मार — आम लोग बोले 'जीना मुश्किल'
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में मंगलवार, 26 मई को सीएनजी (CNG) की कीमतों में ₹2 प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई, जिससे पेट्रोल-डीजल के बाद अब सीएनजी उपभोक्ताओं पर भी महंगाई की मार पड़ी है। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव को इस मूल्यवृद्धि की प्रमुख वजह बताया जा रहा है। राजधानी के आम नागरिकों, कैब चालकों और मध्यमवर्गीय परिवारों में इस फैसले को लेकर गहरी नाराज़गी देखी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया उछाल के बाद 26 मई को सीएनजी के दाम भी बढ़ा दिए गए। दिल्ली में यह बढ़ोतरी ₹2 प्रति किलो की है। यह ऐसे समय में आई है जब मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण वैश्विक पेट्रोलियम आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना हुआ है और भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
आम जनता की प्रतिक्रिया
दिल्ली के निवासी जगदीश ने कहा, 'बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी की जा रही है। ऐसे तो नहीं चलेगा और कीमतें ऐसे ही बढ़ती रहीं तो बहुत परेशानी हो जाएगी।' एक अन्य युवक अनुज सिंह ने कहा कि सीएनजी के दाम बढ़ने से गरीब तबके पर सबसे ज़्यादा असर पड़ रहा है।
गाज़ियाबाद के लोकेश कुमार ने कहा, 'ईंधन की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी से हमारे जीवन पर असर पड़ रहा है। मध्यम वर्ग से लेकर गरीब लोगों के जीवन पर फर्क पड़ रहा है, लेकिन अपने मन की बात कोई बोल नहीं रहा है।' नोएडा के युवक करन ने सवाल उठाया, 'सीएनजी की कीमतों में तो रोज़ बढ़ोतरी की जा रही है। अब पेट्रोल और सीएनजी में क्या फर्क रह गया है? गाड़ियों की किश्त जमा करना भी मुश्किल हो रहा है, घर का खर्चा भी नहीं निकल पा रहा।'
कैब चालकों पर दोहरी मार
निजी कैब चालकों के लिए यह बढ़ोतरी विशेष रूप से कठिन साबित हो रही है। अनुज सिंह के अनुसार, 'पहले जहाँ ₹700-800 की गैस में काम हो जाता था, अब दोगुना लग रहा है।' कैब कंपनियों ने भी शिकायत की है कि उनकी समस्याओं की ओर किसी का ध्यान नहीं है। गौरतलब है कि सीएनजी को पेट्रोल के किफायती विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया गया था, लेकिन लगातार मूल्यवृद्धि से यह अंतर तेज़ी से सिकुड़ रहा है।
सरकार के पक्ष में भी आवाज़ें
अंकुर गुप्ता ने कहा कि ईरान युद्ध की वजह से सीएनजी के दामों में बढ़ोतरी की जा रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्थिति नियंत्रण में है। उनके अनुसार, 'युद्ध की वजह से पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ाना सरकार की मजबूरी है।' हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि मूल्यवृद्धि का बोझ हमेशा अंतिम उपभोक्ता पर ही पड़ता है।
आगे क्या होगा
मध्य पूर्व में तनाव कम न होने की स्थिति में विशेषज्ञों का अनुमान है कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में और दबाव बन सकता है। सीएनजी की इस बढ़ोतरी का असर सार्वजनिक परिवहन किराए और रोज़मर्रा की लागत पर भी पड़ सकता है, जिससे दिल्ली-एनसीआर के लाखों परिवारों का मासिक बजट प्रभावित होने की आशंका है।