25 अगस्त 2026
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दिल्ली में CNG ₹2 प्रति किलो महंगी, मध्य पूर्व तनाव से ईंधन कीमतों की मार — आम लोग बोले 'जीना मुश्किल'

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दिल्ली में CNG ₹2 प्रति किलो महंगी, मध्य पूर्व तनाव से ईंधन कीमतों की मार — आम लोग बोले 'जीना मुश्किल'

सारांश

पेट्रोल-डीजल के बाद अब सीएनजी भी ₹2 प्रति किलो महंगी हो गई है — और दिल्ली-एनसीआर के आम लोग, कैब चालक और मध्यमवर्गीय परिवार सीधे इसकी चपेट में हैं। मध्य पूर्व के संघर्ष की आँच अब रसोई और सड़क दोनों तक पहुँच रही है।

मुख्य बातें

दिल्ली में 26 मई 2026 को सीएनजी की कीमत में ₹2 प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई।
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव को मूल्यवृद्धि की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।
निजी कैब चालकों के अनुसार गैस का खर्च पहले के मुकाबले दोगुना हो गया है — जहाँ ₹700-800 में काम चलता था, अब उससे कहीं अधिक लग रहा है।
गाज़ियाबाद , नोएडा और दिल्ली के निवासियों ने मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों पर पड़ रहे असर को लेकर चिंता जताई।
कुछ नागरिकों ने मूल्यवृद्धि को वैश्विक परिस्थितियों की मजबूरी बताया, जबकि अधिकांश ने जीवनयापन की बढ़ती लागत पर नाराज़गी व्यक्त की।

नई दिल्ली में मंगलवार, 26 मई को सीएनजी (CNG) की कीमतों में ₹2 प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई, जिससे पेट्रोल-डीजल के बाद अब सीएनजी उपभोक्ताओं पर भी महंगाई की मार पड़ी है। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव को इस मूल्यवृद्धि की प्रमुख वजह बताया जा रहा है। राजधानी के आम नागरिकों, कैब चालकों और मध्यमवर्गीय परिवारों में इस फैसले को लेकर गहरी नाराज़गी देखी जा रही है।

मुख्य घटनाक्रम

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हालिया उछाल के बाद 26 मई को सीएनजी के दाम भी बढ़ा दिए गए। दिल्ली में यह बढ़ोतरी ₹2 प्रति किलो की है। यह ऐसे समय में आई है जब मध्य पूर्व में संघर्ष के कारण वैश्विक पेट्रोलियम आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना हुआ है और भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।

आम जनता की प्रतिक्रिया

दिल्ली के निवासी जगदीश ने कहा, 'बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी की जा रही है। ऐसे तो नहीं चलेगा और कीमतें ऐसे ही बढ़ती रहीं तो बहुत परेशानी हो जाएगी।' एक अन्य युवक अनुज सिंह ने कहा कि सीएनजी के दाम बढ़ने से गरीब तबके पर सबसे ज़्यादा असर पड़ रहा है।

गाज़ियाबाद के लोकेश कुमार ने कहा, 'ईंधन की कीमतों में हो रही बढ़ोतरी से हमारे जीवन पर असर पड़ रहा है। मध्यम वर्ग से लेकर गरीब लोगों के जीवन पर फर्क पड़ रहा है, लेकिन अपने मन की बात कोई बोल नहीं रहा है।' नोएडा के युवक करन ने सवाल उठाया, 'सीएनजी की कीमतों में तो रोज़ बढ़ोतरी की जा रही है। अब पेट्रोल और सीएनजी में क्या फर्क रह गया है? गाड़ियों की किश्त जमा करना भी मुश्किल हो रहा है, घर का खर्चा भी नहीं निकल पा रहा।'

कैब चालकों पर दोहरी मार

निजी कैब चालकों के लिए यह बढ़ोतरी विशेष रूप से कठिन साबित हो रही है। अनुज सिंह के अनुसार, 'पहले जहाँ ₹700-800 की गैस में काम हो जाता था, अब दोगुना लग रहा है।' कैब कंपनियों ने भी शिकायत की है कि उनकी समस्याओं की ओर किसी का ध्यान नहीं है। गौरतलब है कि सीएनजी को पेट्रोल के किफायती विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया गया था, लेकिन लगातार मूल्यवृद्धि से यह अंतर तेज़ी से सिकुड़ रहा है।

सरकार के पक्ष में भी आवाज़ें

अंकुर गुप्ता ने कहा कि ईरान युद्ध की वजह से सीएनजी के दामों में बढ़ोतरी की जा रही है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्थिति नियंत्रण में है। उनके अनुसार, 'युद्ध की वजह से पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें बढ़ाना सरकार की मजबूरी है।' हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि मूल्यवृद्धि का बोझ हमेशा अंतिम उपभोक्ता पर ही पड़ता है।

आगे क्या होगा

मध्य पूर्व में तनाव कम न होने की स्थिति में विशेषज्ञों का अनुमान है कि पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में और दबाव बन सकता है। सीएनजी की इस बढ़ोतरी का असर सार्वजनिक परिवहन किराए और रोज़मर्रा की लागत पर भी पड़ सकता है, जिससे दिल्ली-एनसीआर के लाखों परिवारों का मासिक बजट प्रभावित होने की आशंका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बोझ सबसे पहले उन्हीं पर पड़ता है जिन्होंने सरकारी प्रोत्साहन पर भरोसा करके सीएनजी वाहन खरीदे। मध्य पूर्व के तनाव को कारण बताना तथ्यात्मक रूप से सही हो सकता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सरकार के पास ऐसे बफर तंत्र हैं जो इन झटकों को आम उपभोक्ता तक पहुँचने से रोक सकें — जैसा कि कई देशों में होता है। कैब चालकों की पीड़ा इस बात की याद दिलाती है कि 'गिग इकॉनमी' के निचले पायदान पर खड़े लोगों के लिए कोई सुरक्षा जाल नहीं है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में सीएनजी की कीमत कितनी बढ़ी है?
26 मई 2026 को दिल्ली में सीएनजी की कीमत में ₹2 प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई है। यह बढ़ोतरी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हालिया उछाल के बाद आई है।
सीएनजी के दाम क्यों बढ़ाए गए हैं?
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष को इस मूल्यवृद्धि की प्रमुख वजह बताया जा रहा है, जिसके कारण वैश्विक पेट्रोलियम आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। कुछ नागरिकों ने इसे सरकार की मजबूरी बताया है।
सीएनजी मूल्यवृद्धि का कैब चालकों पर क्या असर पड़ा है?
निजी कैब चालकों के अनुसार उनका ईंधन खर्च लगभग दोगुना हो गया है — जहाँ पहले ₹700-800 में काम चल जाता था, अब उससे कहीं अधिक खर्च करना पड़ रहा है। कैब चालकों ने कहा है कि उनकी समस्याओं की ओर किसी का ध्यान नहीं है।
क्या आगे भी सीएनजी और ईंधन के दाम बढ़ सकते हैं?
मध्य पूर्व में तनाव जारी रहने की स्थिति में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर और दबाव बन सकता है। दिल्ली-एनसीआर के नागरिकों ने आशंका जताई है कि कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों का जीवनयापन और कठिन हो जाएगा।
सीएनजी मूल्यवृद्धि से कौन सबसे ज़्यादा प्रभावित है?
कैब चालक, निजी वाहन मालिक और मध्यमवर्गीय परिवार सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। गाज़ियाबाद और नोएडा जैसे दिल्ली-एनसीआर के शहरों में रहने वाले लोगों ने भी घर का बजट बिगड़ने की बात कही है।
राष्ट्र प्रेस
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