फीफा वर्ल्ड कप 2026: कोलंबियाई मिडफील्डर जैमिंटन कैम्पाज को जानलेवा धमकियाँ, फेडरेशन ने जाँच की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
कोलंबियाई फुटबॉल फेडरेशन (एफसीएफ) ने शनिवार, 11 जुलाई को अधिकारियों से आग्रह किया कि मिडफील्डर जैमिंटन कैम्पाज को मिल रही जानलेवा धमकियों की तत्काल जाँच की जाए — यह धमकियाँ फीफा वर्ल्ड कप 2026 के राउंड ऑफ 16 में स्विट्जरलैंड से पेनाल्टी शूटआउट में 3-4 से हारने के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ शुरू हुईं। 26 वर्षीय यह खिलाड़ी उस मौके के लिए निशाने पर आए जब एक्स्ट्रा टाइम में उनका शॉट गोल के बजाय क्रॉसबार के ऊपर से निकल गया।
मैच में क्या हुआ
वैंकूवर में खेले गए इस राउंड ऑफ 16 मुकाबले में निर्धारित समय और एक्स्ट्रा टाइम तक स्कोर गोल-रहित बना रहा। एक्स्ट्रा टाइम के दौरान कैम्पाज के सामने गोलकीपर को छकाने का स्पष्ट अवसर था, लेकिन उनका शॉट क्रॉसबार के ऊपर चला गया। अगर वह गोल होता, तो कोलंबिया क्वार्टर फाइनल में पहुँच जाता। पेनाल्टी शूटआउट में 3-4 से हार के साथ कोलंबिया का वर्ल्ड कप सफर समाप्त हो गया।
धमकियाँ और फेडरेशन की प्रतिक्रिया
हार के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर कैम्पाज को जान से मारने की धमकियाँ मिलने लगीं। एफसीएफ ने एक आधिकारिक बयान में कहा, 'हम जैमिंटन कैम्पाज, उनके परिवार, कोलंबियाई राष्ट्रीय टीम के सभी खिलाड़ियों और पूरे प्रतिनिधिमंडल के साथ पूरी एकजुटता और समर्थन जाहिर करते हैं। हम अटॉर्नी जनरल के ऑफिस से यह भी अनुरोध करते हैं कि वे इन हरकतों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने, उन पर मुकदमा चलाने और उन्हें सजा देने के लिए तुरंत जरूरी जाँच करें।'
फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि उसने सरकारी वकीलों से धमकी देने वालों की तुरंत पहचान कर उन पर कानूनी कार्रवाई करने को कहा है। एफसीएफ ने यह भी कहा, 'फुटबॉल एकता, सम्मान और उम्मीद की जगह होनी चाहिए, न कि नफरत, डराने-धमकाने या हिंसा का मंच।'
कैम्पाज का बयान
हार के बाद अर्जेंटीना के क्लब रोसारियो सेंट्रल के लिए खेलने वाले कैम्पाज कोलंबिया नहीं लौटे। उन्होंने सोशल मीडिया पर दुख में चेहरा ढके हुए अपनी एक तस्वीर साझा कर प्रशंसकों से माफी माँगी। कैम्पाज ने लिखा, 'मुझे इस बात का बेहद अफसोस है कि मैं आपको वह खुशी नहीं दे पाया जिसकी हम सभी को उम्मीद थी, लेकिन मैं चाहता हूँ कि आप जानें कि इस जर्सी के लिए मेरी प्रतिबद्धता, समर्पण या प्यार में कभी कोई कमी नहीं रही। मैंने मैदान पर अपना सब कुछ झोंक दिया। मैं अपने देश के लिए ऐसा हजारों बार करूँगा।'
1994 की दर्दनाक याद
इस घटना ने कोलंबियाई फुटबॉल के सबसे काले अध्याय की याद ताजा कर दी। फीफा वर्ल्ड कप 1994 में डिफेंडर आंद्रेस एस्कोबार ने अमेरिका के खिलाफ एक 'ओन गोल' किया था, जिसके बाद मेडेलिन में उनकी हत्या कर दी गई थी। तीन दशक बाद भी कोलंबियाई फुटबॉल में खिलाड़ियों के खिलाफ हिंसक प्रतिक्रिया की यह प्रवृत्ति चिंता का विषय बनी हुई है।
आगे क्या होगा
एफसीएफ के आग्रह पर कोलंबिया के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय द्वारा जाँच शुरू किए जाने की उम्मीद है। यह मामला न केवल एक खिलाड़ी की सुरक्षा का सवाल है, बल्कि खेल के मैदान में हार-जीत को हिंसा से जोड़ने की खतरनाक सोच पर भी बहस छेड़ता है।