दिल्ली में CNG ₹83.09 प्रति किलो: 11 दिनों में ₹6 की बढ़ोतरी, पेट्रोल भी ₹102.12 पर
सारांश
मुख्य बातें
मध्य-पूर्व संकट की आँच अब आम भारतीय की रसोई और गाड़ी तक पहुँच गई है। नई दिल्ली में मंगलवार, 26 मई से सीएनजी (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस) के दाम ₹2 प्रति किलो बढ़ा दिए गए हैं, जिससे राजधानी में यह ईंधन अब ₹83.09 प्रति किलोग्राम पर पहुँच गया है — पहले यह ₹81.09 प्रति किलो था। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में पहले ही बढ़ोतरी हो चुकी थी, और अब सीएनजी की यह वृद्धि ईंधन महँगाई की मार को और गहरा कर रही है।
11 दिनों में ₹6 की बढ़ोतरी: तारीखवार विवरण
पिछले 11 दिनों में सीएनजी के दाम में कुल ₹6 प्रति किलो की वृद्धि दर्ज की गई है। 15 मई को ₹2, 18 मई को ₹1, 23 मई को ₹1 और 26 मई को ₹2 प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई। यह लगातार संशोधनों का सिलसिला बताता है कि आपूर्ति-पक्ष का दबाव अभी थमा नहीं है।
पेट्रोल-डीजल भी महँगे: 10 दिनों में चौथी बार बढ़े दाम
सोमवार को पेट्रोल की कीमत में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की वृद्धि हुई — पिछले 10 दिनों में यह चौथी बार है जब इन दामों में इजाफा हुआ। बढ़ोतरी से पहले दिल्ली में पेट्रोल ₹99.51 प्रति लीटर और डीजल ₹92.49 प्रति लीटर था; अब पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर पर आ गया है।
दिल्ली से बाहर भी असर: नोएडा, मुंबई के दाम
ईंधन महँगाई केवल राजधानी तक सीमित नहीं है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में सीएनजी के दाम बढ़कर ₹88.70 प्रति किलोग्राम पर पहुँच चुके हैं। मुंबई में भी सीएनजी की कीमत ₹84 प्रति किलोग्राम हो गई है। लगातार मूल्य संशोधनों से देशभर के ऑटो-रिक्शा, कैब और सीएनजी वाहन चालकों की परिचालन लागत बढ़ रही है।
मूल कारण: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और कच्चे तेल के बढ़ते दाम
भारत अपनी ऊर्जा जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिये पूरा करता है। मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के लगभग बंद होने से भारत की आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है। कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की अंतरराष्ट्रीय कीमत अब $100 प्रति बैरल के पार पहुँच गई है, जबकि संकट से पहले यह करीब $70 प्रति बैरल थी। विशेषज्ञों के अनुसार जब तक भू-राजनीतिक स्थिति स्थिर नहीं होती, घरेलू ईंधन दरों में राहत मिलना मुश्किल है।
आम जनता और परिवहन क्षेत्र पर असर
सीएनजी को पेट्रोल-डीजल के सस्ते और स्वच्छ विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया गया था, लेकिन लगातार मूल्य वृद्धि से यह धारणा कमजोर पड़ रही है। दिल्ली-एनसीआर में लाखों ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और बस चालक सीएनजी पर निर्भर हैं। किराया-वृद्धि का दबाव बढ़ने के साथ, परिवहन लागत का बोझ अंततः यात्रियों पर पड़ सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊँची बनी रहीं, तो आने वाले हफ्तों में और संशोधनों की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।