दिल्ली में सीएनजी ₹81.09 प्रति किलो: 10 दिनों में तीसरी बार बढ़े दाम, पेट्रोल-डीजल भी महंगा
सारांश
मुख्य बातें
इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने 23 मई 2026 को नई दिल्ली में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) की खुदरा कीमत ₹1 प्रति किलो बढ़ाकर ₹81.09 प्रति किलो कर दी — पिछले 10 दिनों में यह तीसरी बढ़ोतरी है। इसी दिन सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ा दिए, जिससे राजधानी में ईंधन की कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच गई हैं।
सीएनजी की नई दरें: दिल्ली और एनसीआर
IGL के अनुसार, नई दिल्ली में सीएनजी की कीमत ₹80.09 से बढ़कर ₹81.09 प्रति किलो हो गई है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में यह दर ₹89.70 प्रति किलो पर पहुंच गई है, जबकि गुरुग्राम में सीएनजी ₹86.12 प्रति किलो हो गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले 15 मई को ₹2 प्रति किलो और 17 मई को ₹1 प्रति किलो की बढ़ोतरी की गई थी। यानी केवल 10 दिनों में सीएनजी कुल ₹4 प्रति किलो महंगी हो चुकी है।
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी इजाफा
सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने शनिवार को पेट्रोल में 87 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की — यह भी 10 दिनों में तीसरी बार है। नई दिल्ली में पेट्रोल ₹98.64 से बढ़कर ₹99.51 प्रति लीटर और डीजल ₹91.58 से बढ़कर ₹92.49 प्रति लीटर हो गया है।
कोलकाता में पेट्रोल ₹110.64 प्रति लीटर और डीजल ₹97.02 प्रति लीटर पर पहुंच गया है। मुंबई में पेट्रोल ₹108.49 प्रति लीटर और डीजल ₹95.02 प्रति लीटर हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, यह बढ़ोतरी देशभर के कई शहरों में एक समान रूप से लागू की गई है।
बढ़ोतरी की वजह: वैश्विक कारक
ईंधन की यह बढ़ोतरी वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण बताई जा रही है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाज़ार पर पड़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू महंगाई पहले से ही आम उपभोक्ताओं पर दबाव बना रही है।
सरकार की प्रतिक्रिया
ईंधन की बढ़ती कीमतों की आलोचना के जवाब में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल में तीव्र उछाल के बावजूद भारत ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को सीमित रखने में सफलता हासिल की है।
आम जनता और ट्रांसपोर्ट पर असर
सीएनजी और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में एक साथ हुई बढ़ोतरी का सीधा असर ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों, ऑटो-टैक्सी चालकों और गैस-चालित वाहनों के यात्रियों पर पड़ने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लॉजिस्टिक्स लागत और घरेलू बजट दोनों पर दबाव बढ़ेगा। यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी स्तर पर बनी रहीं, तो आने वाले हफ्तों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।