मानसी पारेख की कैलाश यात्रा: 'घोड़े के साल' में परिक्रमा, बोलीं- जिंदगी भर याद रहेगा यह सफर
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री मानसी पारेख ने हाल ही में कैलाश पर्वत की आध्यात्मिक यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की और 29 अगस्त को इंस्टाग्राम पर अपनी इस यात्रा की झलकियाँ साझा कीं। उन्होंने इसे अपने जीवन के सबसे अविस्मरणीय और आत्मिक अनुभवों में से एक बताया।
यात्रा की शुरुआत और चुनौतियाँ
मानसी ने बताया कि यात्रा के दिन वे बिना अलार्म के सुबह 5 बजे उठ गईं, क्योंकि उत्साह इतना था कि नींद अपने आप खुल गई। उन्होंने बताया कि हाई एल्टीट्यूड पर नाक में कैस्टर ऑयल लगाना अनिवार्य है, अन्यथा नाक से खून निकलने की आशंका रहती है। उन्होंने कहा, 'पहाड़ों में कोई मेकअप काम नहीं करता; सिर्फ एक चीज मायने रखती है, वो है ढेर सारा सनब्लॉक।'
यात्रा के दौरान उन्होंने 20 किमी तक ऊँचाई पर पैदल चलने, बारिश का सामना करने और अंतिम 1 किमी घोड़े पर सवार होकर अपने शेरपा के साथ पूरा करने का अनुभव साझा किया।
यमद्वारा से शुरू हुई आध्यात्मिक यात्रा
अभिनेत्री ने बताया कि यात्रा यमद्वारा से आरंभ होती है, जो प्रतीकात्मक रूप से यह दर्शाता है कि यात्री अपनी समस्त शिकायतें और परेशानियाँ पीछे छोड़कर एक नए आध्यात्मिक स्वरूप की ओर अग्रसर होता है। उन्होंने कहा, 'आप अपनी सारी शिकायतों और परेशानियों को, सब कुछ भूल जाते हैं और अपने नए आध्यात्मिक स्वरूप की ओर चलते हैं।'
'घोड़े के साल' का विशेष महत्व
मानसी ने बताया कि तिब्बती कैलेंडर के अनुसार इस वर्ष घोड़े का वर्ष है, जिसके चलते इस साल कैलाश यात्रा करना 13 बार यात्रा करने के बराबर माना जाता है। उन्होंने कहा, 'घोड़े का वर्ष समर्पण, परिवर्तन और विलय के बारे में है, और मुझे लगता है कि यह यात्रा निश्चित रूप से मेरे लिए यही है और इससे भी कहीं ज्यादा।'
यह ऐसे समय में आया है जब कैलाश यात्रा को लेकर भारत में आध्यात्मिक पर्यटन में उल्लेखनीय रुचि देखी जा रही है। गौरतलब है कि घोड़े के वर्ष में यात्रा का यह धार्मिक महत्व तिब्बती बौद्ध और हिंदू दोनों परंपराओं में गहराई से स्थापित है।
कैलाश के पूर्वी छोर ने दिया अलौकिक अनुभव
अभिनेत्री ने बताया कि जब उन्होंने कैलाश का पूर्वी छोर देखा, तो उन्हें गहरी शांति का अनुभव हुआ और सब कुछ सार्थक लगने लगा। उन्होंने कहा, 'पूर्वी छोर को देखने के बाद मुझे शांति महसूस हुई, सब कुछ सार्थक लगा।' इसी अनुभव के बाद उन्होंने घोड़े पर बैठकर अंतिम हिस्सा पूरा करने का निर्णय लिया।
उन्होंने यह भी बताया कि माँ के हाथों से पैक किए गए ड्राई फ्रूट्स उनके लिए यात्रा में सबसे काम का 'क्विक स्नैक' साबित हुए। अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में उन्होंने लिखा, 'क्या खास साल है और क्या खास सफर है जो हमेशा के लिए मेरे दिल में बस गया है।' यह यात्रा मानसी के लिए केवल एक धार्मिक अनुभव नहीं, बल्कि आत्मिक रूपांतरण की यात्रा बन गई।