कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: राजदूत दोरईस्वामी ने 500 श्रद्धालुओं को दी ज़रूरी सलाह, 6,000 मीटर ऊंचाई की चुनौती
सारांश
मुख्य बातें
चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने 22 जून 2026 को कैलाश मानसरोवर यात्रा के तीर्थयात्रियों के लिए एक विशेष वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने तैयारियों की पूरी जानकारी, परिक्रमा मार्ग के अपने प्रत्यक्ष अनुभव और ऊंचाई तथा मौसम से जुड़ी अहम सावधानियाँ साझा कीं। इस वर्ष नाथू ला मार्ग से कुल 500 श्रद्धालु यात्रा करेंगे — यह यात्रा वर्षों के अंतराल के बाद फिर से शुरू हो रही है।
मुख्य घटनाक्रम
राजदूत दोरईस्वामी और दूतावास की टीम ने स्वयं कैलाश पर्वत के परिक्रमा मार्ग और यात्रा के सभी आधिकारिक प्रवेश स्थानों का दौरा किया। टीम ने केवल मार्ग का निरीक्षण नहीं किया, बल्कि उन होटलों की भी जाँच की जहाँ श्रद्धालुओं को प्रत्येक रात ठहराया जाएगा — रसोई, कमरे और चिकित्सा सुविधाएँ सभी की समीक्षा की गई।
यात्रियों को 50-50 के 10 समूहों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक समूह के साथ एक संपर्क अधिकारी और एक मेडिकल सहायक तैनात रहेगा, ताकि आपात स्थिति में तत्काल सहायता सुनिश्चित हो सके।
ऊंचाई और मौसम की चुनौतियाँ
राजदूत ने स्पष्ट किया कि यात्रा के अधिकांश समय श्रद्धालु समुद्र तल से 3,500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर रहेंगे। परिक्रमा मार्ग की अधिकतम ऊंचाई लगभग 5,605 मीटर — यानी करीब 6,000 मीटर — तक पहुँचती है। उन्होंने कहा, 'यात्रियों से बात करते हुए भी मुझे सांस संभालनी पड़ रही है।'
उन्होंने यह भी बताया कि कैलाश पर्वत के आसपास का मौसम अत्यंत अनिश्चित है — एक ही समय में बर्फबारी, धूप और बारिश की स्थिति बन सकती है। श्रद्धालुओं को गर्म परतदार कपड़े, ऑक्सीजन स्तर की निगरानी और स्वास्थ्य सावधानियों के प्रति पूरी तरह सतर्क रहने की सलाह दी गई।
इस वर्ष यात्रा का विशेष महत्व
राजदूत ने बताया कि 2026 चीनी और पारंपरिक तिब्बती कैलेंडर के अनुसार हर 12 साल में एक बार आने वाला विशेष वर्ष है, जिसके कारण कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के क्षेत्र में स्थानीय तीर्थयात्रियों की संख्या भी असाधारण रूप से अधिक रहेगी। भारतीय श्रद्धालुओं को इस भीड़ के लिए मानसिक रूप से तैयार रहने की सलाह दी गई है।
गौरतलब है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित है और इसे हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्म के अनुयायियों के लिए सर्वाधिक पवित्र तीर्थस्थलों में से एक माना जाता है।
सरकार की तैयारियाँ
भारतीय दूतावास ने बताया कि चीनी सरकार के साथ समन्वय करते हुए व्यापक तैयारियाँ पूरी की गई हैं। चिकित्सा सहायता, आवास और मार्ग सुरक्षा — सभी पहलुओं की जाँच की गई है। हालाँकि, राजदूत ने स्पष्ट किया कि यात्रा की शारीरिक कठिनाइयों को कम नहीं आँका जाना चाहिए।
आगे का मार्ग
यात्रा के पहले समूह की रवानगी जल्द ही अपेक्षित है। प्रत्येक समूह के साथ नियुक्त मेडिकल सहायक और संपर्क अधिकारी पूरी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा की निगरानी करेंगे। यह यात्रा भारत-चीन के बीच जन-संपर्क के एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में भी देखी जाती है।