नाथू ला दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा 20 जून से शुरू, 500 तीर्थयात्री 10 जत्थों में करेंगे पवित्र यात्रा
सारांश
मुख्य बातें
कैलाश मानसरोवर यात्रा 20 जून 2026 को सिक्किम के नाथू ला दर्रे से आधिकारिक रूप से शुरू हो गई। इस वर्ष 500 तीर्थयात्री नाथू ला मार्ग से पवित्र माउंट कैलाश और मानसरोवर झील की यात्रा करेंगे। विदेश मंत्रालय (MEA) और चीन सरकार के संयुक्त आयोजन में यह यात्रा वर्षों की कूटनीतिक समन्वय के बाद पुनः गति पकड़ रही है।
यात्रा की संरचना और व्यवस्था
तीर्थयात्रियों को 50-50 प्रतिभागियों के 10 जत्थों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक जत्थे के साथ एक संपर्क अधिकारी और एक मेडिकल असिस्टेंट तैनात रहेगा, जो यात्रा के दौरान समन्वय और आपातकालीन सहायता सुनिश्चित करेंगे। नाथू ला दर्रे से प्रवेश के बाद तीर्थयात्रियों का स्वागत चीनी कस्टम और आव्रजन अधिकारियों द्वारा किया जाएगा, और फिर उन्हें बस से याडोंग काउंटी ले जाया जाएगा।
राजदूत का संदेश और दूतावास की तैयारी
चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने यात्रा से पूर्व एक वीडियो संदेश जारी कर तीर्थयात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने यात्रा के कार्यक्रम, रहने की व्यवस्था, भोजन की सुविधा और मार्ग में उपलब्ध मुद्रा विनिमय सेवाओं के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, 'विदेश मंत्रालय की ओर से चीन सरकार के साथ मिलकर आयोजित कैलाश मानसरोवर यात्रा 20 जून को भारतीय क्षेत्र से रवाना होगी।'
मार्गों की समीक्षा
राजदूत दोराईस्वामी और दूतावास की टीम ने हाल ही में सिक्किम और उत्तराखंड से तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र तक जाने वाले दोनों प्रमुख मार्गों का निरीक्षण किया — नाथू ला दर्रा मार्ग (सिक्किम) और लिपुलेख दर्रा मार्ग (उत्तराखंड)। इस समीक्षा का उद्देश्य तैयारियों और व्यवस्थाओं की पुष्टि करना था। दूतावास ने बताया कि आने वाले दिनों में तीर्थयात्रियों के लिए और वीडियो व ट्रैवल एडवाइजरी जारी की जाएंगी।
धार्मिक महत्व
कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदुओं, बौद्धों, जैनियों और बोन धर्म के अनुयायियों के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। मान्यता है कि माउंट कैलाश भगवान शिव का निवास स्थान है, जबकि मानसरोवर झील विश्व की सबसे पवित्र झीलों में गिनी जाती है। यह यात्रा न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से, बल्कि भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों के एक सांस्कृतिक सेतु के रूप में भी महत्वपूर्ण है।
आगे की राह
दूतावास ने कहा कि सभी तीर्थयात्रियों की यात्रा 'सुरक्षित, संतोषजनक और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध हो' — यह कामना की गई है। गौरतलब है कि यह यात्रा MEA और चीनी अधिकारियों के बीच सघन समन्वय का परिणाम है, और इसके सुचारु संचालन को भविष्य के जत्थों के लिए एक मानक के रूप में देखा जाएगा।