कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: जयशंकर ने निकाला ड्रॉ, 1,000 यात्री चुने गए — जून से शुरू होंगे 20 बैच

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कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: जयशंकर ने निकाला ड्रॉ, 1,000 यात्री चुने गए — जून से शुरू होंगे 20 बैच

सारांश

पाँच साल के अंतराल के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 में और विस्तृत रूप से लौट रही है — 1,000 यात्री, 20 बैच, दो मार्ग। लेकिन लिपुलेख पर नेपाल की आपत्ति और भारत के कड़े जवाब के बीच यह तीर्थयात्रा राजनयिक पेचीदगियों के साये में भी है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 21 मई 2026 को KMY 2026 के लिए कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ निकाला।
कुल 1,000 यात्री चुने गए; यात्रा जून से अगस्त 2026 तक 20 बैचों (प्रत्येक में 50 यात्री) में होगी।
मार्ग: लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथू ला दर्रा (सिक्किम) — दोनों पूरी तरह मोटरेबल।
यात्रा 2020 में गलवान विवाद के बाद रोकी गई थी; 2025 में पुनः शुरू हुई, 2026 में बैच दोगुने।
नेपाल ने लिपुलेख मार्ग पर आपत्ति जताई; विदेश मंत्रालय ने कहा यह 1954 से स्थापित मार्ग है।
चयनित यात्री हेल्पलाइन 011-23088214 या वेबसाइट पर अपना स्टेटस जाँच सकते हैं।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 21 मई 2026 को कैलाश मानसरोवर यात्रा (KMY) 2026 के लिए कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ निकाला, जिसमें 1,000 तीर्थयात्रियों का चयन किया गया। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह चयन एक निष्पक्ष, कंप्यूटर-आधारित, यादृच्छिक और लिंग-संतुलित प्रक्रिया के तहत हुआ। यात्रा जून 2026 से शुरू होकर अगस्त 2026 तक चलेगी।

चयन प्रक्रिया और बैच विवरण

चुने गए 1,000 यात्री कुल 20 बैचों में यात्रा करेंगे, जिनमें प्रत्येक बैच में 50 यात्री होंगे। ये तीर्थयात्री लिपुलेख दर्रे (उत्तराखंड) और नाथू ला दर्रे (सिक्किम) — दोनों मार्गों से यात्रा करेंगे। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों रास्ते अब पूरी तरह मोटरेबल हैं और न्यूनतम ट्रेकिंग की आवश्यकता है। बैच और मार्ग से संबंधित विस्तृत जानकारी यात्रा की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।

चयनित यात्रियों को SMS और ईमेल के माध्यम से सूचित कर दिया गया है। यात्री अपना चयन स्तर वेबसाइट पर लॉगिन करके या हेल्पलाइन नंबर 011-23088214 पर संपर्क करके जाँच सकते हैं।

पाँच साल के अंतराल के बाद पुनरुद्धार

गौरतलब है कि 2020 में भारत-चीन के बीच गलवान घाटी विवाद के बाद कैलाश मानसरोवर यात्रा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था। 2025 में दोनों देशों के बीच राजनयिक सुलह के बाद यात्रा पुनः आरंभ हुई, जिसमें 5 बैच लिपुलेख मार्ग से और 10 बैच नाथू ला मार्ग से — प्रत्येक में 50 यात्री — रवाना हुए। 2026 का सत्र उस पुनरुद्धार का विस्तार है, जिसमें बैचों की संख्या दोगुनी कर दी गई है।

नेपाल का ऐतराज और भारत का जवाब

यह ऐसे समय में आया है जब नेपाल की बालेंद्र शाह सरकार ने लिपुलेख मार्ग के उपयोग पर आपत्ति जताई है। नेपाल का कहना है कि भारत और चीन को इस मार्ग के लिए नेपाली भूमि का उपयोग नहीं करना चाहिए।

इस पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में स्पष्ट किया: 'इस बारे में भारत का रुख एक जैसा और साफ रहा है। लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक पुराना रास्ता रहा है और इस रास्ते से यात्रा दशकों से होती आ रही है। यह कोई नई बात नहीं है। जहाँ तक इलाके के दावों की बात है, भारत ने हमेशा कहा है कि ऐसे दावे न तो सही हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित हैं।'

आगे क्या

यात्रा का पहला बैच जून 2026 में रवाना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा की बहाली भारत-चीन संबंधों के सामान्यीकरण का एक महत्वपूर्ण सांकेतिक कदम है, हालाँकि सीमा विवाद के मूल मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं। लिपुलेख पर नेपाल के दावे इस मार्ग की दीर्घकालिक राजनयिक स्थिति को और जटिल बनाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे सीमा विवाद के समाधान के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए — वास्तविक नियंत्रण रेखा पर तनाव के मूल कारण अभी भी अनसुलझे हैं। लिपुलेख पर नेपाल की आपत्ति एक नई कूटनीतिक परत जोड़ती है: भारत का '1954 से स्थापित मार्ग' वाला तर्क ऐतिहासिक रूप से मज़बूत है, पर नेपाल के साथ सीमा संवेदनशीलता को नज़रअंदाज़ करना दीर्घकालिक पड़ोसी संबंधों के लिए महँगा पड़ सकता है। 2025 के मुकाबले 2026 में बैचों की संख्या दोगुनी करना सरकार के आत्मविश्वास का संकेत है, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि क्या यह यात्रा बिना किसी राजनयिक व्यवधान के पूरी होती है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए कितने यात्री चुने गए हैं?
KMY 2026 के लिए कुल 1,000 यात्री चुने गए हैं। चयन एक निष्पक्ष, कंप्यूटर-आधारित, यादृच्छिक और लिंग-संतुलित प्रक्रिया के तहत विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर द्वारा 21 मई 2026 को किया गया।
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 कब शुरू होगी और कौन-से मार्ग होंगे?
यात्रा जून 2026 में शुरू होकर अगस्त 2026 तक चलेगी। 20 बैच रवाना होंगे — लिपुलेख दर्रे (उत्तराखंड) और नाथू ला दर्रे (सिक्किम) से, दोनों मार्ग अब पूरी तरह मोटरेबल हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2020 में क्यों रोकी गई थी?
2020 में भारत-चीन के बीच गलवान घाटी में सैन्य टकराव के बाद यात्रा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। 2025 में दोनों देशों के बीच राजनयिक सुलह के बाद यात्रा पुनः आरंभ हुई।
नेपाल ने लिपुलेख मार्ग पर आपत्ति क्यों जताई है?
नेपाल की बालेंद्र शाह सरकार का कहना है कि लिपुलेख की भूमि नेपाल की है और भारत-चीन को इस मार्ग का उपयोग नहीं करना चाहिए। भारत ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा है कि लिपुलेख 1954 से KMY का स्थापित मार्ग है और नेपाल के एकतरफा क्षेत्रीय दावे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
चयनित यात्री अपना स्टेटस कैसे जाँचें?
चयनित यात्रियों को SMS और ईमेल से सूचित किया जा चुका है। वे यात्रा की आधिकारिक वेबसाइट पर लॉगिन करके या हेल्पलाइन नंबर 011-23088214 पर संपर्क करके अपना चयन स्तर जाँच सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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