कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: पहला जत्था 20 जून को नाथुला से तिब्बत में करेगा प्रवेश, 500 तीर्थयात्री चयनित
सारांश
मुख्य बातें
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के तहत तीर्थयात्रियों का पहला जत्था 20 जून 2026 को नाथुला दर्रे के रास्ते चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) में प्रवेश करेगा। सिक्किम पर्यटन विकास निगम (STDC) के अध्यक्ष लोकेंद्र रसैली के अनुसार, पहला जत्था 11 जून को नई दिल्ली पहुँच चुका है और फिलहाल विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा समन्वित अनिवार्य चिकित्सा जाँच, फिटनेस मूल्यांकन एवं वीज़ा प्रक्रियाओं से गुज़र रहा है।
यात्रा की तैयारी और चयन प्रक्रिया
इस वर्ष देशभर से लगभग 1,500 आवेदकों में से MEA द्वारा आयोजित कम्प्यूटरीकृत लॉटरी के ज़रिए 500 तीर्थयात्रियों का चयन किया गया है। ये तीर्थयात्री 50-50 यात्रियों के 10 जत्थों में यात्रा करेंगे। पहला जत्था 15 जून को गंगटोक, सिक्किम पहुँचेगा और 20 जून को तिब्बत के लिए रवाना होगा। अंतिम जत्थे के अगस्त 2026 तक यात्रा पूरी करने की उम्मीद है।
अनुकूलन कार्यक्रम और स्वास्थ्य निगरानी
गंगटोक पहुँचने के बाद तीर्थयात्री उच्च-ऊँचाई वाले वातावरण के लिए एक सुनियोजित अनुकूलन कार्यक्रम से गुज़रेंगे। पहले चरण में वे लगभग 10,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित 18वें मील के अनुकूलन केंद्र में दो रातें बिताएँगे। इसके बाद लगभग 13,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित हांगू झील में भी दो रातें रुकना होगा।
अनुकूलन चरण में स्थानीय भ्रमण, चिकित्सा निगरानी और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) द्वारा अंतिम स्वास्थ्य मूल्यांकन शामिल है। इस मूल्यांकन में सफल होने के बाद ही तीर्थयात्रियों को 14,140 फीट की ऊँचाई पर स्थित नाथुला दर्रे को पार करने की अनुमति दी जाती है।
तिब्बत में यात्रा मार्ग
तिब्बत में प्रवेश के बाद तीर्थयात्री कांगमा, लाजी, झोंगबा और कैलाश पर्वत के प्रवेश द्वार दारचेन से होकर गुज़रेंगे। इस पवित्र तीर्थयात्रा में कैलाश परिक्रमा शामिल है, जिसके बाद उसी मार्ग से भारत वापसी होती है। गौरतलब है कि नाथुला मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा 2015 में इस पवित्र तीर्थ के वैकल्पिक मार्ग के रूप में शुरू की गई थी।
यात्रा की समयरेखा और प्रशासनिक व्यवस्था
22 दिनों की इस यात्रा में दिल्ली में दस्तावेज़ीकरण और स्वास्थ्य जाँच के लिए चार दिन, सिक्किम में उच्च-ऊँचाई अनुकूलन के लिए कई दिन और तिब्बत में लगभग 12 दिन शामिल हैं। यात्रा की देखरेख के लिए चिकित्सा दल, संपर्क अधिकारी तथा MEA, ITBP, आयुष मंत्रालय और सिक्किम सरकार के अधिकारी तैनात रहेंगे।
यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में द्विपक्षीय संपर्क के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले हफ्तों में शेष जत्थों के रवाना होने के साथ इस ऐतिहासिक तीर्थयात्रा की पूरी तस्वीर और स्पष्ट होगी।