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कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: पहला जत्था 20 जून को नाथुला से तिब्बत में करेगा प्रवेश, 500 तीर्थयात्री चयनित

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कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: पहला जत्था 20 जून को नाथुला से तिब्बत में करेगा प्रवेश, 500 तीर्थयात्री चयनित

सारांश

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का पहला जत्था 20 जून को नाथुला दर्रे से तिब्बत में कदम रखेगा। 1,500 आवेदकों में से MEA की लॉटरी से चुने गए 500 तीर्थयात्री 10 जत्थों में यात्रा करेंगे। 2015 में शुरू हुए इस वैकल्पिक मार्ग पर 22 दिनों की यह यात्रा अगस्त तक जारी रहेगी।

मुख्य बातें

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का पहला जत्था 20 जून को नाथुला दर्रे से तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) में प्रवेश करेगा।
MEA की कम्प्यूटरीकृत लॉटरी से 1,500 आवेदकों में से 500 तीर्थयात्री चयनित; 50-50 यात्रियों के 10 जत्थों में यात्रा होगी।
पहला जत्था 11 जून को नई दिल्ली पहुँचा; 15 जून को गंगटोक रवाना होगा।
अनुकूलन कार्यक्रम में 18वें मील (10,500 फीट) और हांगू झील (13,000 फीट) पर दो-दो रातें; ITBP का अंतिम स्वास्थ्य मूल्यांकन अनिवार्य।
22 दिनों की यात्रा में दिल्ली में 4 दिन, सिक्किम में अनुकूलन और तिब्बत में लगभग 12 दिन शामिल।
अंतिम जत्थे की यात्रा अगस्त 2026 तक पूरी होने की उम्मीद।

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के तहत तीर्थयात्रियों का पहला जत्था 20 जून 2026 को नाथुला दर्रे के रास्ते चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) में प्रवेश करेगा। सिक्किम पर्यटन विकास निगम (STDC) के अध्यक्ष लोकेंद्र रसैली के अनुसार, पहला जत्था 11 जून को नई दिल्ली पहुँच चुका है और फिलहाल विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा समन्वित अनिवार्य चिकित्सा जाँच, फिटनेस मूल्यांकन एवं वीज़ा प्रक्रियाओं से गुज़र रहा है।

यात्रा की तैयारी और चयन प्रक्रिया

इस वर्ष देशभर से लगभग 1,500 आवेदकों में से MEA द्वारा आयोजित कम्प्यूटरीकृत लॉटरी के ज़रिए 500 तीर्थयात्रियों का चयन किया गया है। ये तीर्थयात्री 50-50 यात्रियों के 10 जत्थों में यात्रा करेंगे। पहला जत्था 15 जून को गंगटोक, सिक्किम पहुँचेगा और 20 जून को तिब्बत के लिए रवाना होगा। अंतिम जत्थे के अगस्त 2026 तक यात्रा पूरी करने की उम्मीद है।

अनुकूलन कार्यक्रम और स्वास्थ्य निगरानी

गंगटोक पहुँचने के बाद तीर्थयात्री उच्च-ऊँचाई वाले वातावरण के लिए एक सुनियोजित अनुकूलन कार्यक्रम से गुज़रेंगे। पहले चरण में वे लगभग 10,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित 18वें मील के अनुकूलन केंद्र में दो रातें बिताएँगे। इसके बाद लगभग 13,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित हांगू झील में भी दो रातें रुकना होगा।

अनुकूलन चरण में स्थानीय भ्रमण, चिकित्सा निगरानी और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) द्वारा अंतिम स्वास्थ्य मूल्यांकन शामिल है। इस मूल्यांकन में सफल होने के बाद ही तीर्थयात्रियों को 14,140 फीट की ऊँचाई पर स्थित नाथुला दर्रे को पार करने की अनुमति दी जाती है।

तिब्बत में यात्रा मार्ग

तिब्बत में प्रवेश के बाद तीर्थयात्री कांगमा, लाजी, झोंगबा और कैलाश पर्वत के प्रवेश द्वार दारचेन से होकर गुज़रेंगे। इस पवित्र तीर्थयात्रा में कैलाश परिक्रमा शामिल है, जिसके बाद उसी मार्ग से भारत वापसी होती है। गौरतलब है कि नाथुला मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा 2015 में इस पवित्र तीर्थ के वैकल्पिक मार्ग के रूप में शुरू की गई थी।

यात्रा की समयरेखा और प्रशासनिक व्यवस्था

22 दिनों की इस यात्रा में दिल्ली में दस्तावेज़ीकरण और स्वास्थ्य जाँच के लिए चार दिन, सिक्किम में उच्च-ऊँचाई अनुकूलन के लिए कई दिन और तिब्बत में लगभग 12 दिन शामिल हैं। यात्रा की देखरेख के लिए चिकित्सा दल, संपर्क अधिकारी तथा MEA, ITBP, आयुष मंत्रालय और सिक्किम सरकार के अधिकारी तैनात रहेंगे।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों में द्विपक्षीय संपर्क के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले हफ्तों में शेष जत्थों के रवाना होने के साथ इस ऐतिहासिक तीर्थयात्रा की पूरी तस्वीर और स्पष्ट होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो 2020 के गलवान संकट के बाद से बाधित थी। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच सीमावर्ती तनाव में कमी के प्रयास जारी हैं। हालाँकि 500 तीर्थयात्रियों की संख्या सीमित है, इस यात्रा की सफलता या विफलता आगामी द्विपक्षीय सांस्कृतिक और कूटनीतिक संपर्क की दिशा तय कर सकती है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि ITBP और आयुष मंत्रालय की संयुक्त निगरानी इस यात्रा को सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों मोर्चों पर एक जटिल लॉजिस्टिक अभियान बनाती है, जिसकी समीक्षा हर जत्थे के बाद होनी चाहिए।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का पहला जत्था तिब्बत कब पहुँचेगा?
पहला जत्था 20 जून 2026 को नाथुला दर्रे के रास्ते चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) में प्रवेश करेगा। इससे पहले जत्था 15 जून को गंगटोक, सिक्किम पहुँचेगा और अनुकूलन कार्यक्रम पूरा करेगा।
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए कितने तीर्थयात्री चुने गए हैं?
विदेश मंत्रालय (MEA) की कम्प्यूटरीकृत लॉटरी के ज़रिए लगभग 1,500 आवेदकों में से 500 तीर्थयात्री चयनित किए गए हैं। ये 50-50 यात्रियों के 10 जत्थों में यात्रा करेंगे।
नाथुला मार्ग से कैलाश मानसरोवर यात्रा में अनुकूलन कार्यक्रम कैसा होता है?
तीर्थयात्री पहले 10,500 फीट पर स्थित 18वें मील के अनुकूलन केंद्र में दो रातें और फिर 13,000 फीट पर स्थित हांगू झील में दो रातें बिताते हैं। इसके बाद ITBP द्वारा अंतिम स्वास्थ्य मूल्यांकन किया जाता है, जिसमें सफल होने पर ही 14,140 फीट ऊँचे नाथुला दर्रे को पार करने की अनुमति मिलती है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा का नाथुला मार्ग कब शुरू हुआ था?
नाथुला दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा 2015 में पारंपरिक लिपुलेख मार्ग के विकल्प के रूप में शुरू की गई थी। यह मार्ग सिक्किम से होते हुए तिब्बत तक जाता है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 की पूरी अवधि कितनी है और इसमें कौन-से मंत्रालय शामिल हैं?
यह 22 दिनों की यात्रा है जिसमें दिल्ली में 4 दिन (दस्तावेज़ीकरण व स्वास्थ्य जाँच), सिक्किम में अनुकूलन के कई दिन और तिब्बत में लगभग 12 दिन शामिल हैं। MEA, ITBP, आयुष मंत्रालय और सिक्किम सरकार मिलकर इस यात्रा की देखरेख करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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